
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ट्वीट करके कहा कि मंडी में मंदी क्यों? - आजादपुर मंडी में मजदूरों, व्यापारियों और किसानों से एक मुलाकात!
किसानों से उपभोगताओं तक फसल पहुंचने के बीच एक लंबी कड़ी होती है जिसको सुनना, जिसके संघर्षों को जानना बहुत ज़रूरी है। यात्रा के क्रम को बढ़ाते हुए, इस कड़ी को जोड़ने हम आज़ादपुर मंडी पहुंचे।
भारत की इस सबसे पुरानी और सबसे बड़ी सब्ज़ी मंडी में काम कभी रुकता नहीं। ट्रकों का आना जाना, मज़दूरों का शोर, व्यापारियों का हिसाब, यह सब हर वक्त चालू रहता है।
मुलाकात के दौरान मंडी में काम करने वाले हर वर्ग से मेरी बात हुई। सबकी अपनी अपनी समस्याएं मगर फिर भी एक दूसरे से जुड़ी हुईं। जहां व्यापारी GST और महंगाई से परेशान दिखे वहीं मज़दूर महंगाई के साथ बेरोज़गारी से।
जटाशंकर एक मज़दूर हैं, जो इस काम के कारण एक साल से ज़्यादा से घर नहीं जा पाए हैं, अपने परिवार से नहीं मिल पाए हैं। जाएं भी तो कैसे, काम छूटा तो पैसे कट जाएंगे और इस महंगाई में गुज़ारा और मुश्किल हो जाएगा। नुकसान के कारण कई रातें वैसे भी भूखे गुज़र जाती हैं।
एक व्यापारी केवलानंद लोहनी सुबह 2 बजे से काम पर पहुंच जाते हैं - कहते हैं UPA की सरकार में बचत हो जाती थी, मौजूदा सरकार में उल्टा नुकसान हो रहा है। बच्चे चाहते हैं वो ये काम न करें, मगर उनके पास रोज़गार के अवसर भी नहीं हैं।
आज़ादपुर मंडी की सबसे खास बात यहां का सद्भाव है, हर धर्म, हर जात, हर प्रांत के लोग यहां मिल जुल कर काम करते हैं। आपस में मुकाबला भी है तो सम्मान के साथ। उनके शब्दों में, ये व्यापार व्यवहार से चलता है।
ये कड़ी एक पहेली सी लगती है, मगर उन्हें अगर सुना जाए, उनकी बात समझी जाए तो इनकी समस्याएं भी वही हैं जो पूरे देश की हैं, और उनका उपाय भी - महंगाई और बेरोज़गारी का अंत।
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