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अर्थतंत्र की बड़ी खबरें: भारत-फ्रांस व्यापार को देंगे नई गति और अगले हफ्ते 0.25% बढ़ सकता है रेपो रेट

केंद्रीय मंत्री गोयल ने बताया कि बैठक में भारत और फ्रांस के बीच आर्थिक साझेदारी को नई ऊंचाई देने से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श हुआ।

फोटो: सोशल मीडिया
फोटो: सोशल मीडिया 

केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को कहा कि उन्होंने अमेरिका में आयोजित जी20 व्यापार मंत्रियों की बैठक के दौरान फ्रांस के विदेश व्यापार और आर्थिक आकर्षण मामलों के मंत्री निकोलस फोरिसिएर के साथ मुलाकात कर दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश सहयोग को और मजबूत बनाने के उपायों पर चर्चा की।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए केंद्रीय मंत्री गोयल ने बताया कि बैठक में भारत और फ्रांस के बीच आर्थिक साझेदारी को नई ऊंचाई देने से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श हुआ। चर्चा का मुख्य फोकस भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (इंडिया-ईयू एफटीए) को आगे बढ़ाने, भारत में एयरोस्पेस विनिर्माण सहयोग का विस्तार करने, यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) के एकीकरण और संयुक्त नवाचार पहलों को बढ़ावा देने पर रहा।

उन्होंने कहा कि वह इस वर्ष के अंत में फ्रांसीसी मंत्री के भारत दौरे का स्वागत करने के लिए उत्सुक हैं, जहां दोनों देश द्विपक्षीय आर्थिक एजेंडा को आगे बढ़ाने पर और विस्तार से चर्चा करेंगे।

फ्रांस के अलावा पीयूष गोयल ने कनाडा के अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंत्री मनींदर सिद्धू के साथ भी बैठक की। इस दौरान दोनों देशों के बीच प्रस्तावित कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (सीईपीए) पर चल रही वार्ताओं की समीक्षा की गई। दोनों पक्षों ने बातचीत को तेज करने और वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 50 अरब डॉलर तक पहुंचाने के साझा लक्ष्य को हासिल करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

गोयल ने सऊदी अरब के वाणिज्य मंत्री माजिद बिन अब्दुल्ला अल-कसाबी के साथ भी मुलाकात की। इस बैठक में प्रस्तावित भारत-गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (जीसीसी) मुक्त व्यापार समझौते और व्यापार एवं निवेश सहयोग बढ़ाने के अवसरों पर चर्चा हुई।

इसके अलावा, दक्षिण कोरिया के व्यापार मंत्री पार्क जंग-सुंग के साथ हुई बैठक में भारत-दक्षिण कोरिया सीईपीए को अपग्रेड करने के मुद्दे पर विचार-विमर्श किया गया। वार्ता के दौरान संतुलित व्यापार वृद्धि, भारतीय कृषि, फार्मास्यूटिकल और समुद्री उत्पादों की बेहतर बाजार पहुंच तथा भारत में दक्षिण कोरियाई विनिर्माण निवेश बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।

आरबीआई ने सुधाकर मल्ली को बनाया नया कार्यकारी निदेशक, संभालेंगे पर्यवेक्षण विभाग की जिम्मेदारी

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को सुधाकर मल्ली को कार्यकारी निदेशक (इग्जीक्यूटिव डायरेक्टर) नियुक्त किया है। केंद्रीय बैंक के अनुसार, उनकी नियुक्ति 1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी हो गई है।

आरबीआई ने बयान में कहा कि कार्यकारी निदेशक के पद पर पदोन्नति से पहले सुधाकर मल्ली विभागीय पर्यवेक्षण में मुख्य महाप्रबंधक-प्रभारी के रूप में कार्यरत थे।

नई भूमिका में सुधाकर मल्ली पर्यवेक्षण विभाग यानी डिपार्टमेंट ऑफ सुपरविजन (सुपरवाइजरी असेसमेंट) की जिम्मेदारी संभालेंगे। यह विभाग बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थाओं की निगरानी एवं पर्यवेक्षण संबंधी गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

आरबीआई के अनुसार, सुधाकर मल्ली एक करियर सेंट्रल बैंकर हैं और उनके पास लगभग तीन दशकों का अनुभव है। उन्होंने दो दशक से अधिक समय तक बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) और सहकारी बैंकों की निगरानी से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम किया है।

इसके अलावा, उन्हें विदेशों में भी लगभग पांच वर्षों का पर्यवेक्षण संबंधी अनुभव है। उन्होंने आरबीआई के करेंसी मैनेजमेंट क्षेत्र में भी कार्य किया है, जिससे उन्हें केंद्रीय बैंकिंग के विभिन्न पहलुओं की व्यापक समझ हासिल हुई है।

शैक्षणिक रूप से सुधाकर मल्ली मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक डिग्रीधारक हैं। साथ ही वे इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकर्स (सीएआईआईबी) के प्रमाणित एसोसिएट भी हैं।

गौरतलब है कि हाल के महीनों में आरबीआई ने शीर्ष प्रबंधन स्तर पर कई महत्वपूर्ण नियुक्तियां की हैं। पिछले महीने केंद्रीय बैंक ने सुमन रे को कार्यकारी निदेशक नियुक्त किया था। पदोन्नति से पहले वह महाराष्ट्र के क्षेत्रीय निदेशक के रूप में कार्यरत थे। वर्तमान में वे डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (डीआईसीजीसी) और प्रिमाइसेस विभाग का दायित्व संभाल रहे हैं।

सुमन रे के पास भी रिजर्व बैंक में तीन दशक से अधिक का अनुभव है और उन्होंने करेंसी मैनेजमेंट, वित्तीय समावेशन, भुगतान एवं निपटान प्रणाली, उपभोक्ता संरक्षण तथा मानव संसाधन जैसे क्षेत्रों में कार्य किया है।

वैश्विक संकट गहराने के साथ ही वैश्विक ऊर्जा सब्सिडी 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है: यूएन रिपोर्ट

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष, बढ़ती तेल कीमतों और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच दुनिया भर की सरकारों के लिए उपभोक्ताओं को राहत देना लगातार कठिन होता जा रहा है। शुक्रवार को जारी संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2026 में वैश्विक ऊर्जा सब्सिडी 1 ट्रिलियन डॉलर से अधिक पहुंच सकती है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि ईंधन और खाद्य कीमतों में वृद्धि के असर को कम करने के लिए सरकारें बड़े पैमाने पर सब्सिडी, मूल्य नियंत्रण (प्राइस कैप) और कर रियायतों जैसे उपायों का सहारा ले रही हैं। हालांकि बढ़ती ब्याज दरों, महंगे कर्ज और मौसम संबंधी जोखिमों के कारण इन उपायों को लंबे समय तक जारी रखना और मुश्किल होता जा रहा है।

यूएनडीपी ने चेतावनी दी है कि आने वाले कुछ महीने उन देशों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगे जो ईंधन सब्सिडी और अन्य राहत उपायों के जरिए महंगाई से निपटने की कोशिश कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचने से कई देशों की सार्वजनिक वित्त व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव बढ़ रहा है।

यूएनडीपी के मुख्य अर्थशास्त्री जॉर्ज ग्रे मोलिना ने कहा कि अगले कुछ सप्ताह और महीने अनिश्चितता से भरे रह सकते हैं, क्योंकि दुनिया एक साथ कई संकटों का सामना कर रही है। उन्होंने कहा कि वर्तमान स्थिति से बाहर निकलने का कोई स्पष्ट रास्ता फिलहाल दिखाई नहीं दे रहा है।

विश्व बैंक, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) के आंकड़ों पर आधारित रिपोर्ट में बताया गया है कि अप्रैल से सितंबर के बीच राहत उपाय अपनाने वाले देशों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई। इससे यह साफ संकेत मिलता है कि ऊर्जा और खाद्य कीमतों में वृद्धि का असर अधिक व्यापक होता जा रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी सहायता कार्यक्रमों ने इस वर्ष अनुमानित 13 करोड़ लोगों को प्रतिदिन 6.85 डॉलर की गरीबी रेखा से नीचे जाने से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हालांकि इसके लिए सरकारों को अपने बजट पर भारी बोझ उठाना पड़ रहा है।

यूएनडीपी का अनुमान है कि भू-राजनीतिक तनाव, कड़े वैश्विक वित्तीय हालात और जलवायु संबंधी झटकों का संयुक्त प्रभाव 2027 की शुरुआत तक अपने चरम पर पहुंच सकता है। ऐसे में कई विकासशील देशों के लिए आर्थिक स्थिरता बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

आरबीआई अगले हफ्ते होने वाली एमपीसी बैठक में रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की कर सकता है बढ़ोतरी : एसबीआई रिपोर्ट

मौजूदा समय में जोखिमों का संतुलन भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा 25 आधार अंक (0.25 प्रतिशत) की ब्याज दर बढ़ोतरी के पक्ष में निर्णायक रूप से झुक गया है। इसकी वजह महंगाई का दबाव बढ़ना, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों का बिगड़ना, तरलता की बदलती स्थिति और वैश्विक स्तर पर जोखिमों के नए सिरे से उभरना है। यह जानकारी भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की एक रिपोर्ट में दी गई।

आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक 5 से 7 अक्टूबर तक होनी है, जिसमें बेंचमार्क रेपो रेट पर फैसला किया जाएगा।

एसबीआई की रिपोर्ट में कहा गया है कि भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों से जुड़े जोखिम और वैश्विक स्तर पर जोखिमों के पुनर्मूल्यांकन को देखते हुए, “हमारे लिए बेहतर होगा कि हम स्थिति से पीछे रहने के बजाय पहले से ही एहतियाती कदम उठाएं।”

रिपोर्ट में कहा गया, “हमें यह भी उम्मीद है कि आरबीआई वित्त वर्ष 2026-27 के लिए जीडीपी वृद्धि के अनुमान में 30 आधार अंक और महंगाई के अनुमान में 20 आधार अंक की बढ़ोतरी करेगा।”

महंगाई लगातार बढ़ती जा रही है। अगस्त में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित महंगाई जुलाई के 4.45 प्रतिशत से बढ़कर 4.82 प्रतिशत हो गई।

रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय रुपया लगातार गिरावट के दौर में है, डॉलर इंडेक्स मजबूत हो रहा है और पिछले शुक्रवार से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की लगातार बिकवाली के कारण 4.45 अरब डॉलर की निकासी हुई है। ऐसे में सट्टेबाजी वाली ताकतों को रोकने और प्रभावी ढंग से हस्तक्षेप करने की आरबीआई की क्षमता पर भरोसा उसकी आंतरिक मजबूती की बड़ी परीक्षा होगी।

रिपोर्ट में कहा गया, “भले ही ब्याज दर में बढ़ोतरी अब करीब आती दिख रही है, लेकिन मानसून की स्थिति पर भी ध्यान देना जरूरी है। 2026 का मानसून वर्ष 2000 के बाद चौथा सबसे कम बारिश वाला मानसून रहा, जो दीर्घकालिक औसत (एपीए) का केवल 87 प्रतिशत रहा। वहीं, 43 प्रतिशत जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई।”

मजबूत अल नीनो परिस्थितियां और अक्टूबर में सामान्य से कम बारिश रबी फसलों के उत्पादन के लिए और जोखिम पैदा कर सकती हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि कुल मिलाकर तरलता भले ही अधिक है, लेकिन वास्तविक स्तर पर प्रभावी तरलता का सृजन काफी कम है।

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