
नीतिगत ब्याज दर (रेपो) में करीब चार साल बाद पहली बार बढ़ोतरी होने और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से निवेशक धारणा प्रभावित होने के कारण स्थानीय शेयर बाजार लगातार दो दिन की तेजी के बाद बुधवार को गिरकर बंद हुए। सेंसेक्स में 429 अंक की गिरावट आई जबकि निफ्टी 173 अंक टूट गया।
विश्लेषकों के मुताबिक, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के रेपो दर में 0.25 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी करने के फैसले से बाजार में गिरावट आई। इसके अलावा कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी पूंजी की लगातार निकासी ने भी दबाव डाला।
बीएसई का 30 शेयरों वाला मानक सूचकांक सेंसेक्स 429.11 अंक यानी 0.59 प्रतिशत गिरकर 72,638.70 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान एक समय सेंसेक्स 599.09 अंक गिरकर 72,468.72 अंक पर आ गया था।
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का 50 शेयरों वाला सूचकांक निफ्टी भी 173.05 अंक यानी 0.76 प्रतिशत की गिरावट के साथ 22,603.05 अंक पर बंद हुआ।
सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से 26 के शेयर नुकसान में रहे। टाइटन, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, एशियन पेंट्स, इन्फोसिस, लार्सन एंड टुब्रो और अदाणी पोर्ट्स के शेयरों में प्रमुख रूप से गिरावट दर्ज की गई।
दूसरी तरफ, कोटक महिंद्रा बैंक, भारती एयरटेल, आईसीआईसीआई बैंक और बजाज फाइनेंस के शेयर लाभ में रहे।
आरबीआई ने बुधवार को रेपो दर को 0.25 प्रतिशत अंक बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत कर दिया जो करीब चार साल में पहली बढ़ोतरी है। साथ ही केंद्रीय बैंक ने अपनी मौद्रिक नीति का रुख बदलकर ‘सोच-समझकर सख्ती’ वाला कर दिया, जिससे निकट अवधि में दरों में कटौती की संभावना खत्म हो गई है। वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 1.41 प्रतिशत बढ़कर 102 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
अगर खाड़ी क्षेत्र में युद्ध जल्द खत्म भी हो जाता है, तो ऊर्जा की ऊंची कीमतें 2027 तक बनी रह सकती हैं। यह चेतावनी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की ओर से बुधवार को दी गई।
आईएमएफ ने कहा कि तेल की कीमत करीब 100 डॉलर प्रति बैरल बनी हुई है, जबकि रिफाइनिंग क्षमता और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति पर दबाव महंगाई बढ़ा रहा है और वैश्विक आर्थिक वृद्धि पर असर डाल रहा है।
आईएमएफ की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने कहा कि अब तक अधिक दक्षता, ईंधन के विविध स्रोतों, आपातकालीन योजनाओं, रणनीतिक भंडार से आपूर्ति जारी करने और मांग-आपूर्ति में बदलाव के कारण ऊर्जा संकट का असर सीमित रहा है। हालांकि, महत्वपूर्ण जोखिम अभी भी बने हुए हैं।
थाईलैंड में अगले सप्ताह होने वाली आईएमएफ-विश्व बैंक की वार्षिक बैठकों से पहले सिंगापुर में जॉर्जीवा ने कहा, “खाड़ी क्षेत्र से आपूर्ति बहाल होने की अनिश्चितता के बीच तेल की कीमतें करीब 100 डॉलर प्रति बैरल बनी हुई हैं। इसमें जोखिम, परिवहन की ऊंची लागत और अन्य कारक भूमिका निभा रहे हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि दबाव सिर्फ कच्चे तेल तक सीमित नहीं है। वैश्विक स्तर पर रिफाइनिंग क्षमता की संरचनात्मक कमी के कारण क्रैक स्प्रेड यानी कच्चे तेल की कीमत और उससे बनने वाले रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों के मूल्य के बीच का अंतर लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है।
उन्होंने कहा कि इसका परिणाम डीजल और अन्य रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों की रिकॉर्ड खुदरा कीमतों के रूप में सामने आया है।
खाड़ी क्षेत्र से प्राकृतिक गैस की आपूर्ति भी बुरी तरह प्रभावित है, क्योंकि जब तक होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही पर खतरा बना हुआ है, तब तक एलएनजी (एलएनजी) के परिवहन के विकल्प सीमित रहेंगे।
जॉर्जीवा ने कहा, “इसका दुनिया के अलग-अलग हिस्सों पर अलग-अलग असर पड़ रहा है, जिसमें एशिया और यूरोप विशेष रूप से प्रभावित हैं।”
यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था पहले से ही महंगाई के दबाव और कमजोर आर्थिक वृद्धि का सामना कर रही है।
जॉर्जीवा के मुताबिक, ऊर्जा की ऊंची लागत का असर उर्वरकों, खाद्य पदार्थों और प्रमुख औद्योगिक कच्चे माल की कीमतों पर पड़ता है। वहीं, अल नीनो खाद्य सुरक्षा पर अतिरिक्त दबाव डाल रहा है। इस स्थिति से महंगाई बढ़ने के साथ आर्थिक वृद्धि पर भी दबाव पड़ता है।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को कहा कि वित्तीय बाजार अल्पावधि में अक्सर तर्कसंगत तरीके से व्यवहार नहीं करते और कई संकेतक यह दर्शाते हैं कि भारतीय रुपया ओवरवैल्यूड नहीं बल्कि अंडरवैल्यूड हो सकता है।
मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि बाजार की धारणा और मुद्रा के बारे में निवेशकों की स्थिति हमेशा किसी मुद्रा के वास्तविक मूल्य को नहीं दर्शाती।
उन्होंने कहा, "केवल लंबी अवधि में बाजार किसी मुद्रा का सही मूल्य निर्धारित कर पाते हैं।" यह टिप्पणी उन्होंने रुपए में लगातार कमजोरी की उम्मीदों और मुद्रा हेजिंग गतिविधियों को लेकर पूछे गए प्रश्न के जवाब में की।
आरबीआई गवर्नर के अनुसार, मुद्रा मूल्यांकन के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले कई मानक, विशेष रूप से रियल इफेक्टिव एक्सचेंज रेट (आरईईआर), यह संकेत देते हैं कि भारतीय रुपया अत्यधिक मूल्यांकित नहीं है।
मल्होत्रा ने कहा, "कई अनुमानों के अनुसार, जिनमें आरईईआर भी शामिल है, रुपया ओवरवैल्यूड नहीं है, बल्कि संभव है कि यह अंडरवैल्यूड हो।"
उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब बाजार में यह सवाल उठाया जा रहा था कि भारत की मजबूत पूंजी आकर्षित करने की क्षमता के बावजूद निवेशक रुपए में और कमजोरी की संभावना क्यों देख रहे हैं। कई विश्लेषक हेजिंग पैटर्न और मुद्रा अनुमानों के आधार पर आगे भी रुपए के दबाव में रहने की संभावना जता रहे हैं।
यह बयान आरबीआई की उस मौद्रिक नीति समीक्षा के बाद आया है, जिसमें केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट में 25 आधार अंकों की वृद्धि कर उसे 5.50 प्रतिशत कर दिया है।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के प्रमुख नीतिगत दर रेपो में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर इसे 5.5 प्रतिशत किए जाने के बाद रुपया बुधवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 43 पैसे टूटकर 96.78 (अस्थायी) के स्तर पर रहा।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 96.37 प्रति डॉलर पर खुला। यह 96.34 से 96.84 प्रति डॉलर के दायरे में कारोबार करने के बाद अंत में 96.78 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर रहा, जो पिछले बंद भाव के मुकाबले 43 पैसे की गिरावट है। रुपया मंगलवार को 96.35 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ शोध विश्लेषक दिलीप परमार ने कहा, ‘‘आरबीआई के सख्त रुख वाले बयान के बाद महंगाई को लेकर नई चिंता से बाजार धारणा प्रभावित हुई। रुपया टूटा और उसका बंद भाव अब तक का दूसरा सबसे कमजोर स्तर रहा। साथ ही, यह ज्यादातर एशियाई मुद्राओं की तुलना में कमजोर रहा।’’
उन्होंने कहा, ‘‘कच्चे तेल की कीमतों में फिर तेजी तथा जोखिम से बचने की धारणा की एक नई लहर ने रुपये पर और दबाव डाला। निकट अवधि में डॉलर के मुकाबले रुपये के 96.97 से 96.30 के बीच रहने का अनुमान है।’’
भारतीय रिजर्व बैंक ने बुधवार को लगातार जारी पश्चिम एशिया संकट के बीच बढ़ती महंगाई पर काबू पाने के लिए प्रमुख नीतिगत दर रेपो में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर इसे 5.5 प्रतिशत कर दिया। आरबीआई ने आखिरी बार फरवरी, 2023 में रेपो दर बढ़ाई थी।
आरबीआई द्वारा अल्पावधि की ऋण दर (रेपो) में बढ़ोतरी उसके पिछले नीतिगत कदम से बदलाव को दर्शाती है। इस बीच, दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.45 प्रतिशत बढ़कर 102.28 पर रहा।
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