
पीएम मोदी ने देशवासियों से अपील की है कि वे कम से कम एक साल तक सोने की खरीदारी से बचें। इसी बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए सोना, चांदी और अन्य कीमती धातुओं पर आयात शुल्क बढ़ा दिया है। नई दरें बुधवार रात से लागू होंगी।
केंद्र सरकार की ओर से 13 मई 2026 को जारी अधिसूचना के अनुसार, सोने और चांदी पर इंपोर्ट ड्यूटी 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दी गई है। सरकार का कहना है कि यह फैसला कीमती धातुओं के आयात को नियंत्रित करने और देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ते दबाव को कम करने के उद्देश्य से लिया गया है।
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आयात शुल्क बढ़ने से भारत में सोना और चांदी महंगे हो सकते हैं, जिससे इनकी मांग में कमी आने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे देश का व्यापार घाटा घटाने में मदद मिल सकती है और रुपये को भी सहारा मिलेगा, जो हाल के समय में एशिया की कमजोर प्रदर्शन करने वाली मुद्राओं में शामिल रहा है।
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भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ता देशों में शामिल है और चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा गोल्ड खरीदार माना जाता है। देश में हर साल लगभग 700 से 800 टन सोने की मांग रहती है, जबकि घरेलू उत्पादन केवल 1 से 2 टन के आसपास है। यानी भारत अपनी जरूरत का करीब 90 प्रतिशत सोना विदेशों से आयात करता है।
सोने के आयात का भुगतान डॉलर में किया जाता है, इसलिए ज्यादा आयात का असर सीधे विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ता है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का गोल्ड इंपोर्ट बढ़कर लगभग 72 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले वित्त वर्ष के 58 अरब डॉलर के मुकाबले करीब 24 प्रतिशत अधिक है।
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