
सोने की कीमतों में गिरावट का सिलसिला गुरुवार, 2 जुलाई को भी जारी रहा। देश में 24 कैरेट सोना घटकर 1,44,550 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया, जो पिछले कारोबारी दिन के मुकाबले 1.3 प्रतिशत की गिरावट दर्शाता है। बुधवार को 24 कैरेट सोना 1,46,454 रुपये प्रति 10 ग्राम था और एक दिन में इसकी कीमत 1,904 रुपये कम हुई है। वहीं, 18 कैरेट सोना भी सस्ता होकर 1,08,412.5 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया, जिसमें 1,428 रुपये प्रति 10 ग्राम की गिरावट दर्ज की गई। कीमतों में आई इस कमी का असर छोटे और बड़े दोनों स्तरों पर दिखा है। आज 24 कैरेट सोने का 1 ग्राम 190 रुपये सस्ता हुआ है, जबकि 100 ग्राम सोने की कीमत में सीधे 19,000 रुपये की कमी दर्ज की गई।
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जहां सोने में कमजोरी बनी हुई है, वहीं चांदी के बाजार में सुधार देखने को मिला है। हाजिर बाजार (स्पॉट मार्केट) में निचले स्तरों पर खरीदारी बढ़ने से चांदी की कीमतों में 0.64 प्रतिशत की रिकवरी दर्ज की गई। इसके चलते चांदी का भाव पिछले बंद स्तर की तुलना में प्रति किलोग्राम 1,400 से 1,500 रुपये तक बढ़ गया। सुधार के बाद देश के खुदरा बाजारों में चांदी की कीमत फिर से 2,40,100 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गई है। वहीं, कुछ चुनिंदा बाजारों में स्थानीय टैक्स और अन्य शुल्कों के कारण इसका भाव 2,45,000 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया है। ग्राम के हिसाब से देखें तो चांदी का भाव बढ़कर 240.10 रुपये से 245 रुपये प्रति ग्राम के बीच पहुंच गया है।
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सोने की लगातार गिरती कीमतों ने बाजार की धारणा भी बदल दी है। लोगों को आशंका है कि आने वाले समय में कीमतें और नीचे जा सकती हैं। यही वजह है कि खरीदारी बढ़ने के बजाय लोग अपना पुराना सोना बेच रहे हैं। चालू तिमाही में भारतीयों ने करीब 50 टन पुराना सोना बाजार में बेचा है। इससे स्थानीय बाजारों में सोने की सप्लाई अचानक बढ़ गई, जिसका असर कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है।
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सोने की कीमतों में कमजोरी के पीछे अंतरराष्ट्रीय संकेत भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। निवेशकों को आशंका है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में जल्द कटौती करने के बजाय उन्हें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनाए रख सकता है। चूंकि सोने पर ब्याज या डिविडेंड नहीं मिलता, इसलिए निवेशक सरकारी बॉन्ड्स की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे सोने की मांग कमजोर हुई है। इसके साथ ही अमेरिकी डॉलर इंडेक्स लगातार मजबूत हो रहा है। डॉलर के मजबूत होने से दूसरी मुद्राओं वाले देशों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना खरीदना महंगा पड़ता है, जिससे वैश्विक मांग पर भी दबाव बना हुआ है।
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