
फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया फार्मर एसोसिएशंस (एफएआईएफए) ने शुक्रवार को कहा कि सरकार के तंबाकू उत्पादों पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगाने से किसानों की आय को नुकसान होगा तथा अवैध व्यापार से पहले से ही जूझ रहे बाजार में तस्करी और बढ़ जाएगी।
वित्त मंत्रालय ने चबाने वाले तंबाकू, जर्दा सुगंधित तंबाकू एवं गुटखा पैकिंग मशीन (क्षमता निर्धारण व शुल्क संग्रह) नियम, 2026 के तहत लंबाई के आधार पर प्रति 1,000 सिगरेट ‘स्टिक’ पर 2,050-8,500 रुपये का उत्पाद शुल्क एक फरवरी से लगाने की घोषणा की है।
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आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और गुजरात के उत्पादकों का प्रतिनिधित्व करने वाले किसानों के संगठन एफएआईएफए ने कहा कि शुल्क में वृद्धि राजस्व-तटस्थ कर सुधार के संबंध में सरकार के आश्वासनों के विपरीत है।
एफएआईएफए के अध्यक्ष मुरली बाबू ने बयान में कहा, ‘‘ हमें यह देखकर गहरा सदमा लगा है कि वादा पूरा नहीं किया गया बल्कि किसानों की आजीविका की कीमत पर करों में भारी वृद्धि से जुड़ी अधिसूचना जारी की गई है।’’
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किसानों के संगठन ने आगाह किया कि खुदरा कीमतों में वृद्धि से सिगरेट की कानूनी खपत कम हो जाएगी जिससे घरेलू स्तर पर उगाए गए तंबाकू की मांग प्रभावित होगी तथा संभावित रूप से फसल बाजार में अधिकता उत्पन्न हो जाएगी।
एफएआईएफए ने साथ ही कहा कि भारत की कर प्रणाली सिगरेट में इस्तेमाल होने वाले ‘फ्लू-क्योर वर्जीनिया’ (एफसीवी) तंबाकू के साथ भेदभाव करती है जहां प्रति किलोग्राम कर ‘बीड़ी’ (कम आय वाले उपभोक्ताओं के बीच लोकप्रिय हाथ से बनी सिगरेट) की तुलना में 50 गुना से अधिक तथा चबाने वाले तंबाकू की तुलना में 30 गुना से अधिक है।
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संगठन ने बताया कि तैयार उत्पादों में एफसीवी तंबाकू पर प्रति खुराक छह रुपये से अधिक का कर लगता है जबकि बीड़ी तथा चबाने वाले उत्पादों पर प्रति इकाई एक पैसे से भी कम कर लगता है।
एफएआईएफए द्वारा उद्धृत उद्योग अनुमानों के अनुसार भारत, दुनिया का चौथा सबसे बड़ा अवैध सिगरेट बाजार बनकर उभरा है जिसमें अवैध उत्पादों का कुल खपत में करीब 26 प्रतिशत हिस्सा है।
संगठन ने आगाह किया कि करों के कारण कीमतों में वृद्धि से वैध तथा तस्करी वाले उत्पादों के बीच का अंतर बढ़ेगा जिससे प्रवर्तन प्रयासों में बाधा आएगी एवं सरकारी राजस्व में कमी आएगी।
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एफएआईएफए के आंकड़ों के अनुसार, पिछले दशक में एफसीवी तंबाकू का उत्पादन लगभग स्थिर रहा है। 2023-24 में नीलाम की गई मात्रा 30.421 करोड़ किलोग्राम थी जबकि 2013-14 में यह 31.595 करोड़ किलोग्राम थी।
खेती का क्षेत्रफल 2013-14 में 2,21,385 हेक्टेयर से घटकर 2020-21 में 1,22,257 हेक्टेयर हो गया है जिसके परिणामस्वरूप कृषि एवं नीलामी तंत्र में करीब 3.5 करोड़ मानव श्रम दिवस के रोजगार का नुकसान हुआ है।
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बढ़ती लागतों ने किसानों की परेशानी को और बढ़ा दिया है। विश्व बैंक के उर्वरक मूल्य सूचकांक में 2025 की शुरुआत से 15 प्रतिशत की वृद्धि हुई है जिसमें ‘डाई-अमोनियम फॉस्फेट’ की कीमतों में 23 प्रतिशत की वृद्धि हुई है जबकि अधिसूचित कृषि मजदूरी दरें वित्त वर्ष 2024-25 में सात प्रतिशत बढ़ी हैं।
एफएआईएफए ने सरकार से उत्पाद शुल्क वापस लेने और राजस्व-तटस्थ शुल्क लागू करने का आग्रह किया है जो तस्करी को हतोत्साहित करते हुए घरेलू कृषि का समर्थन करे।
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