
हुनूज़ दिल्ली दूर अस्त....फारसी में यह बात निजामुद्दीन औलिया ने गयासुद्दीन तुगलक से कही थी जब उसने दिल्ली सल्तनत पर चढ़ाई के लिए धमकाया था। लेकिन यह बात याद इसलिए आई कि बुधवार को रिजर्व बैंक ने कुछ इसी अंदाज़ में आम लोगों को संदेश दिया कि अच्छे दिन बहुत दूर हैं। रिजर्व बैंक ने अपनी मौद्रिक नीति का ऐलान करते हुए साफ कर दिया कि न तो ब्याज दरें घटेंगी और न ही मंहगाई। बल्कि आने वाले दिनों में मंहगाई बढ़ेगी और देश की तरक्की की रफ्तार भी उतनी नहीं रहेगी जितना कि सरकार ने अनुमान लगा रखा है।
मंगलवार को पेस मौद्रिक नीति में रिजर्व बैंक ने किसी भी ब्याज दर में कोई कटौती नहीं की और उन्हें तथावत रखा। इसके मायने यही हैं कि न तो आपकी ईएमआई यानी मासिक किस्त कम होगी और न ही कुछ सस्ता मिलेगा जिससे आपकी दीवाली अच्छी मन सके, क्योंकि रिजर्व बैंक ने ये भी बताया है कि उपभोक्ता मंहगाई की दर 4.2 से 4.6 फीसदी तक पहुंच सकती है। इसके अलावा देश की अर्थव्यवस्था पर छाए संकट के बादल अभी हाल फिलहाल छंटने वाले नहीं हैं क्योंकि आरबीआई ने विकास दर का अनुमान 7.3 से घटाकर 6.7 फीसदी कर दिया है।
आर्थिक मोर्चे पर संकट की तस्वीर दिखाते ये आंकड़े पेश करने का कारण रिजर्व बैंक ने बताया। आरबीआई के गर्वनर उर्जित पटेल की अध्यक्षता में बनी एमपीसी ने कहा कि महंगाई दर अपने उच्च स्तर पर है, जिसकी वजह से रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। यह वो दरें होती हैं जिन पर रिजर्व बैंक दूसरे बैंकों को पैसे देता या उनसे लेता है। इसके अलावा विकास दर का अमुमान घटाने के पीछे जो कारण दिया गया है उससे देश तो पहले ही परेशान है, अब प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री भी परेशान हो सकते हैं। रिजर्व बैंक ने कहा है कि, “2017-18 की पहली तिमाही में नुकसान की रफ्तार और खरीफ उत्पादन में गिरावट की आहट के चलते ऐसा करना पड़ा है। इतना ही नहीं जीएसटी लागू होने के बाद कारोबार और काम-धंधों पर पड़ा असर अब भी जारी है। इस कारण अर्थव्यवस्था में सुधार होने में अभी और वक्त लग सकता है।”
रिजर्व बैंक ने देश की आर्थिक सेहत की जो हालत पेश की है उसकी सुर्खियां इस तरह हैं:
यानी आर्थिक मोर्चे पर देश के बुरे दिन चल रहे हैं। इस बीच सरकार ने आम लोगों को रिझाने का एक पैंतरा भी चला, और इससे कुछ राहत भी मिली, लेकिन तरीका वही था, कि दस कदम आगे चलकर दो कदम पीछे हटना। सरकार ने चौतरफा निंदा और आलोचना के आगे घुटने टेकते हुए मंगलवार को पेट्रोल-डीज़ल पर प्रति लीटर 2 रुपए एक्साइज़ ड्यूटी घटाने का ऐलान कर दिया। सरकार ने इस बारे में बताते हुए जो ट्वीट किया था, उसमें कहा था कि यह फैसला आम लोगों की दिक्कतों को ध्यान में रखते हुए उन्हें राहत देने के लिए किया गया है।
वह बात अलग है कि बीते तीन सालों में मोदी सरकार ने 11 बार में एक्साइज ड्यूटी बढ़ाकर पेट्रोल पर 9 रुपए 48 पैसे प्रति लीटर से बढ़ाकर 21 रुपए 48 पैसे और डीज़ल पर 3 रुपए 56 पैसे से बढ़ाकर 17 रुपए 33 पैसे कर दी थी। इसी में से दो-दो रुपए की कमी कर दी गयी है, जिससे पेट्रोल-डीज़ल के दामों में थोड़ा असर पड़ा है।
भक्तों ने इसी घोषणा पर छाती पीटना शुरु कर दिया कि देखो सरकार ने अपने खजाने में 13 हजार करोड़ की कटौती करके आम लोगों को फायदा पहुंचाया है। (सरकार ने यह भी कहा था कि यह कदम आम लोगों के हितों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।
लेकिन क्या यह काफी है। सरकार जो पैसा बीते दिनों में आम लोगों से वसूल चुकी है उसका क्या। हमने पिछली बार आपको बताया था कि कैसे सरकार ने पिछले तीन साल में सिर्फ पेट्रोल-डीज़ल पर एक्साइज़ ड्यूटी के नाम पर करीब ढाई लाख करोड़ रुपए आम लोगों से वसूल कर अपना खजाना भरा।
ऐसे में सरकार 2 रुपए घटाकर दो कौड़ी का दावा कर रही है कि उसे 26 हजार करोड़ का नुकसान होगा। इतना ही नहीं जब तेल के दाम चुपके-चुपके बढ़ रहे थे, तो सरकार भी चुप थी, लेकिन जैसे ही इस दो रुपए की कटौती की तो दावे पेश करने का सिलसिला नए सिरे से शुरु हो गया।
इसलिए अच्छे दिन अभी बहुत दूर हैं, वह बात अलग है कि आने वाले दिनों में इसी जुमले को नई पैकेजिंग के साथ फिर से हमारे सामने पेश करने की कवायद जरूर शुरु हो गयी होगी, क्योंकि गुजरात में चुनाव जो होने हैं कुछ दिनों में।
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Published: 04 Oct 2017, 8:06 PM IST