अर्थतंत्र

मोदी सरकार का ‘स्टैंड अप इंडिया’ भी ‘जुमला’: एससी-एसटी को नहीं मिल रहा कर्ज

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल ‘स्टैंड अप इंडिया’ योजना का शुभारंभ किया था। लेकिन योजना की शुरुआत के लगभग डेढ़ साल बाद इसका हाल भी सरकार की बाकी अन्य योजनाओं जैसा ही हो गया है।

फोटोः सोशल मीडिया 
फोटोः सोशल मीडिया   स्टैंड अप इंडिया के लॉंच पर पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल एक भव्य कार्यक्रम में ‘स्टैंड अप इंडिया’ योजना का शुभारंभ किया था। लेकिन योजना की शुरुआत के लगभग डेढ़ साल बाद इसका हाल भी सरकार की बाकी अन्य योजनाओं जैसा ही हो गया है।

सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत मिली जानकारी के अनुसार, इस योजना में शामिल 42 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों ने अब तक 536 लोगों को ही स्टैंड अप इंडिया योजना के तहत कर्ज जारी किया है। इसमें भी एससी (अनुसूचित जाति) वर्ग में सिर्फ 97 और एसटी (अनुसूचित जनजाति) वर्ग में 32 लोगों को ही कर्ज मिला है जबकि बाकी सामान्य महिला वर्ग में 407 लोगों को कर्ज जारी किया गया है।

आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार पिछले 17 महीने में बैंकों की 1.3 लाख शाखाओं में से बमुश्किल 6 प्रतिशत ने एससी-एसटी वर्ग के युवाओं को कर्ज दिया है। इन बैंकों की 25 प्रतिशत से भी कम शाखाओं ने सामान्य वर्ग की महिलाओं को कर्ज दिया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 अप्रैल, 2016 को नोएडा में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में स्टैंड अप इंडिया योजना की शुरुआत की थी। यह एक कर्ज योजना है, जिसे अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और सामान्य वर्ग की महिलाओं को नया उद्यम या व्यापार शुरू करने के लिए वित्तीय देने के लिए शुरु किया गया था। सभी बैंकों से कहा गया था कि जहां भी उनकी शाखाएं हैं वहां के एक दलित या आदिवासी युवा और एक सामान्य महिला को कर्ज देने की जिम्मेदारी उनकी है।

एक अंग्रेजी समाचार पत्र को आरटीआई के तहत वित्त्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, 21 सार्वजनिक क्षेत्र के वाणिज्यिक बैंकों, 42 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और निजी क्षेत्र के 9 बैंकों ने एससी वर्ग के 5,852 एसटी वर्ग के 1762 और सामान्य महिला वर्ग की 33,321 आवेदकों को कुल 8,803 करोड़ रुपये का स्टैंड अप इंडिया लोन मंजूर किया है। जिसमें से अब तक केवल 4,852 करोड़ रुपये का ही भुगतान हुआ है।

आंकड़ों से पता चलता है कि सार्वजनिक क्षेत्र के 21 वाणिज्यिक बैंकों ने 38,111 लोगों को स्टैंड अप इंडिया लोन दिया। इनमें से एससी वर्ग के 5,559, एसटी वर्ग के 1,653 और सामान्य महिला वर्ग की 30,899 आवेदकों को यह लोन दिया गया। आंकड़ों के अनुसार एससी-एसटी आवेदकों को औसतन 10 लाख रुपये तक का कर्ज दिया गया, जबकि सामान्य महिला वर्ग में औसतन 12.27 लाख रुपये का। सभी 21 में से 6 सार्वजनिक बैंकों द्वारा मिलाकर भी एससी वर्ग के 100 से कम लोगों को लोन दिया गया। यही नहीं सार्वजनिक क्षेत्र के 16 बैंकों ने एसटी वर्ग में किसी को भी कर्ज नहीं दिया।

वहीं निजी क्षेत्र के बैंकों की बात करें तो इंडसइंड बैंक ने एससी वर्ग में 184 लोगों को स्टैंड अप इंडिया लोन जारी किया है, जबकि बाकियों ने इस वर्ग में सिर्फ 12 लोगों को ही कर्ज दिया। आंकड़ों से पता चलता है कि इन 9 निजी क्षेत्र के बैंकों ने कुल मिलाकर एससी वर्ग में 196, एसटी वर्ग में 76 और सामान्य महिला वर्ग में 2,015 लोगों को स्टैंड अप इंडिया योजना के तहत उधार दिया है। एक्सिस बैंक, एचडीएफसी बैंक, साउथ इंडियन बैंक और द नैनीताल बैंक जैसे 4 निजी और अन्य 15 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों ने एक भी एससी वर्ग के व्यक्ति को स्टैंड अप इंडिया लोन नहीं दिया। वहीं एक्सिस बैंक, फेडरल बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, द नैनीताल बैंक और यस बैंक ने एसटी वर्ग में किसी भी व्यक्ति को यह कर्ज नहीं दिया है।

क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की बात करें तो इन 42 बैंकों में से 33 ने एसटी वर्ग के किसी भी व्यक्ति को स्टैंड अप लोन नहीं दिया। वहीं इनमें से 15 बैंकों ने एससी वर्ग में एक भी कर्ज जारी नहीं किया। सभी 42 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों द्वारा कुल मिलाकर 536 लोगों को स्टैंड अप इंडिया लोन दिया गया है। इनमें से एससी वर्ग के तहत 97, एसटी वर्ग में 32 और सामान्य महिला वर्ग में 407 लोगों को यह लोन दिया गया। तीन क्षेत्रीय बैंकों ने सामान्य महिला वर्ग में एक भी कर्ज नहीं जारी किया।

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