
महंगाई ने एक बार फिर आम आदमी की कमर तोड़ दी है। इस बार थोक महंगाई दर ने बड़ा झटका दिया है। बता दें, अगस्त के महीने में देश का थोक मूल्य सूचकांक बढ़कर 11.39 फीसदी पर जा पहुंचा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक ईंधन और बिजली की कीमतों में तेज़ी के कारण थोक महंगाई में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके साथ ही महंगाई की इस मार के लिए मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की कीमतों में आया उछाल भी जिम्मेदार हैं।
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आपको बता दें, होलसेल प्राइस इंडेक्स या थोक मूल्य सूचकांक का मतलब उन कीमतों से होता है, जो थोक बाजार में एक कारोबारी दूसरे कारोबारी से वसूलता है। ये कीमतें थोक में किए गए सौदों से जुड़ी होती हैं। इसकी तुलना में कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स या उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आम ग्राहकों द्वारा दी जाने वाली कीमतों पर आधारित होता है। CPI पर आधारित महंगाई की दर को रिटेल इंफ्लेशन या खुदरा महंगाई दर भी कहते हैं।
सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, ईंधन की कीमतों में तेज़ी के कारण थोक महंगाई में बढ़ोतरी हुई है। इस दौरान फ्यूल एंड पावर की महंगाई 26.02 फीसदी से बढ़कर 26.09 फीसदी हो गई है।
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