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वाराणसी से नामांकन रद्द होने के बाद तेज बहादुर ने निर्वाचन आयोग के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती

निर्वाचन आयोग के सामने पेश किये गए दो हलफनामों में तेज बहादुर ने बीएसएफ से बर्खास्त किये जाने के दो अलग-अलग कारण बताए थे, जिसकी वजह से निर्वाचन अधिकारी ने उनका नामांकन रद्द कर दिया था। यादव ने निर्वाचन आयोग के इसी फैलसे को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

फोटो: सोशल मीडिया
फोटो: सोशल मीडिया 

बर्खास्त बीएसएफ जवान तेज बहादुर यादव ने पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार के रूप में नामांकन खारिज करने के चुनाव आयोग के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। तेज बहादुर की तरफ से अधिवक्ता प्रशांत भूषण उनका पक्ष रखेंगे।

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उत्तर प्रदेश के वाराणसी लोकसभा क्षेत्र से पीएम मोदी के खिलाफ समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे बर्खास्त जवान तेज बहादुर यादव का नामांकन निर्वाचन आयोग ने रद्द कर दिया था।आयोग के मुताबिक तेज बहादुर ने चुनाव आयोग के सामने दो हलाफनामे पेश किये थे, जिनमें उन्होंने बीएसएफ से बर्खास्त किये जाने के दो अलग-अलग कारण बताए थे। निर्वाचन आयोग के इसी फैसले को चुनौती देने के लिए तेजबहादुर ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी लगाई है।

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गौरतलब है कि तेज बहादुर यादव ने सीमा सुरक्षा बल में अपने ड्यूटी पर तैनाती के दौरान जवानों को मिलने वाले खाने की एक वीडियो अपने सोशल मीडिया पर जारी करते हुए खाने की मात्रा और गुणवत्ता पर कई सवाल उठाए थे। तेज बहादुर का यह वीडियोे सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसके बाद ये खुलासा पूरे देश में चर्चा का विषय बना और मामला कोर्ट तक पहुंचा।

अपने नामांकन में बर्खास्तगी को लेकर दो अलग-अलग कारणों के वजह से तेज बहादुर को अपनी उम्मीदवारी गंवानी पड़ी थी। इससे पहले तेज बहादुर ने वाराणसी सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर पीएम मोदी के खिलाफ नामांकन किया था और हलफनामे में बताया था कि उन पर भ्रष्टाचार के आरोप के चलते बीएसएफ से निकाला गया। जबकि समाजवादी पार्टी से टिकट मिलने पर दोबारा नामांकन में तेज बहादुर ने जो हलफनामा वाराणसी निर्वाचन अधिकारी को दिया उसमें बीएसएफ से निकाले जाने की जानकारी नहीं दी।

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इसके बाद निर्वाचन आयोग अधिकारी ने तेज बहादुर यादव को नोटिस भेजकर एक तय समयसीमा के अंदर जवाब देने के लिए कहा और जवाब न मिलने पर उनका नामांकन रद्द कर दिया गया। हालांकि, तेजबहादुर ने सबूत मुहैया कराने का दावा करते हुए आयोग पर तानाशाही रवैये का आरोप लगया। तेज बहादुर यादव के वकील ने भी यही बताया कि हमने सभी सबूत दिए, लेकिन बावजूद इसके हमारा नामांकन रद्द कर दिया गया। इस मामले में राहत न मिलने पर तेज बहादुर ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।

बता दें कि वाराणसी लोकसभा सीट पर 19 मई को चुनाव के अंतिम (7वें) चरण में मतदान होगा।चुनाव के नतीजे 23 मई को घोषित किये जाएंगे।

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