
नाबालिग से रेप के आरोप में जोधपुर की कोर्ट से उम्रकैद की सजा मिलने के 2 दिन बाद आसाराम के सोशल मीडिया पर लाइव आने का गंभीर मामला सामने आया है। 27 अप्रैल की शाम आसाराम के आश्रम के सोशल मीडिया अकाउंट से आसाराम का प्रवचन देता एक ऑडियो मैसेज चलाया गया, जिसमें वह कहता है, “पहले शरद और शिल्पी को बाहर निकलवाएंगे। उसके बाद हम बाहर आ जाएंगे।” ऑडियो में आसाराम आगे कहता है, “जितनी बड़ी गाज गिरती है, उतने ही बड़े रास्ते भी बन जाते हैं। ऊपर एक से बढ़कर एक कोर्ट हैं, पहले तो शिल्पी बेटी को निकालूंगा और फिर शरद बेटे को।” सजा सुनकर खुद के रोने की खबरों पर भी आसाराम ने अपनी बात रखी और कहा, “कुछ लोग झूठ फैलाने में लगे हैं, रोने की बात झूठ है। इनसे सावधान रहना। सिर्फ लक्ष्मी, नारायण सांई और भारती ही मेरा परिवार हैं, ऐसा कहने वाले गलत हैं। पूरी दुनिया ही मेरा परिवार है, जिसमें लाखों-करोड़ों सदस्य हैं।”
मिली जानकारी के अनुसार जोधपुर जेल से आसाराम ने फोन के जरिये ये ऑडियो प्रवचन दिया। आसाराम के फेसबुक पेज पर इसकी सूचना शाम को ही जारी कर दी गई थी। जिसमें कहा गया था कि 27 अप्रैल को जोधपुर जेल से शाम 6:30 बजे ऑडियो लाइव आने की संभावना है, उसे आसाराम के मोबाइल ऐप ‘मंगलमय’ पर जरूर सुनें। हालांकि, इस घटना के तूल पकड़ने पर एक घंटे बाद इस ऑडियो को फेसबुक और मंगलमय ऐप दोनों ही जगहों से हटा दिया गया।
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इस घटना पर जोधपुर जेल प्रशासन ने कहा कि आसाराम ने शुक्रवार की शाम साबरमती आश्रम में 17 मिनट बात की थी, शायद इसी का ऑडियो जारी किया गया है। जेल प्रशासन ने बताया कि जेल के बंदियों को किसी दो नंबर पर एक महीने के दौरान कुल 80 मिनट तक बात करने की अनुमति है। इन दो नंबरों की प्रशासन द्वारा जांच के बाद ही कैदी उस नंबर पर बात कर सकता है। इसी के तहत शुक्रवार शाम साढ़े छह बजे आसाराम ने साबरमती आश्रम के जदवानी निशांत से 17 मिनट तक बात की थी। संभव है इसी बातचीत को आश्रम से सोशल मीडिया पर लाइव प्रसारित किया गया हो।
जेल प्रशासन ने कहा कि आसाराम ने जो भी बात की होगी, वो जेल के एसटीडी बूथ पर लगे सिस्टम में रिकॉर्ड हो गया होगा। हालांकि जेल प्रशासन ने ये भी कहा कि बातचीत को सोशल मीडिया पर लाइव या वायरल करने को लेकर कोई नियम नहीं है। हालांकि प्रशासन ने कहा कि ऐसा करना अनुचित है, और ऐसे में कैदी को दी गई यह सुविधा छीनी जा सकती है।
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