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बिरला ने पक्षपात किया, माइक को भी एक ‘अस्त्र’ की तरह इस्तेमाल किया गया, गोगोई बोले- सदन की मर्यादा बचाने के लिए लाए संकल्प

गौरव गोगोई ने कहा, ‘‘बिरला जी का व्यक्तिगत रूप से सभी के साथ रिश्ता अच्छा है। हमें यह संकल्प लाना पड़ रहा है। इस सदन की मर्यादा को बचाने और सदन में जनता का विश्वास कायम रखने के लिए धर्म का पालन करते हुए हम यह अविश्वास प्रस्ताव ला रहे हैं।’’

गौरव गोगोई ने मंगलवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला पर पक्षपात का आरोप लगाया
गौरव गोगोई ने मंगलवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला पर पक्षपात का आरोप लगाया 

लोकसभा में कांग्रेस के उप नेता गौरव गोगोई ने मंगलवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला पर पक्षपात का आरोप लगाया और कहा कि विपक्ष को सदन एवं संविधान की मर्यादा की रक्षा के लिए बिरला के खिलाफ संकल्प लाना पड़ा है।

बिरला को हटाने के लिए सदन में लाए गए संकल्प पर चर्चा की शुरुआत करते हुए गोगोई ने यह आरोप भी लगाया कि वर्तमान समय में लोकसभा में माइक को भी एक ‘अस्त्र’ की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है तथा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं को बोलने नहीं दिया जा रहा है।

उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी को वर्तमान बजट सत्र के पहले चरण में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान बोलने से 20 से अधिक बार रोका गया।

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इससे पहले कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने यह संकल्प सदन में प्रस्तुत किया।

गोगोई ने कहा, ‘‘देश को पता होना चाहिए कि किस तरह से संविधान और सदन की मर्यादा का उल्लंघन हो रहा है।’’

उन्होंने कहा कि इस संकल्प को लाने में विपक्ष को कोई खुशी नहीं है।

उन्होंने कहा, ‘‘बिरला जी का व्यक्तिगत रूप से सभी के साथ रिश्ता अच्छा है। हमें यह संकल्प लाना पड़ रहा है। इस सदन की मर्यादा को बचाने और सदन में जनता का विश्वास कायम रखने के लिए धर्म का पालन करते हुए हम यह अविश्वास प्रस्ताव ला रहे हैं।’’

गोगोई ने कहा कि विपक्ष बिरला पर व्यक्तिगत रूप से हमला नहीं कर रहा है।

उनका कहना था, ‘‘इस मंदिर (संसद) का दरवाजा सबके लिए खुला हुआ है और इसके संचालन में अध्यक्ष की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है।’’

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कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘फरवरी में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर जब नेता प्रतिपक्ष बोलने के लिए खड़े हुए, तब 20 से अधिक बार व्यवधान पैदा किया गया। यह सिर्फ इसलिए किया गया क्योंकि वह कुछ महत्वपूर्ण मुद्दे उठाना चाहते थे।’’

नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बजट सत्र के पहले चरण में अपने भाषण में एक पूर्व सेना प्रमुख की अप्रकाशित पुस्तक का उल्लेख करने का प्रयास करते हुए सरकार पर निशाना साधने का प्रयास किया था और आसन से उन्हें इसकी अनुमति नहीं दी गई थी।

गोगोई ने इसी परिप्रेक्ष्य में कहा, ‘‘जब भारत की सीमा पर पड़ोसी देश के टैंक आ रहे थे तो सेना राजनीतिक नेतृत्व की तरफ देख रही थी, लेकिन उस समय देश के मुखिया कहते हैं कि जो उचित लगे वो कर लो।’’

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उन्होंने आरोप लगाया कि आज देश का नेतृत्व कमजोर है।

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने उनकी बात पर आपत्ति जताई।

इस पर गोगोई ने कहा कि जब भविष्य में संसदीय रिकॉर्ड देखा जाएगा तो यह आंकड़ा दिखेगा कि सबसे ज्यादा व्यवधान पैदा करने वाले संसदीय कार्य मंत्री रीजीजू रहे हैं।

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गोगोई ने इस बात का उल्लेख किया कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने यह विषय भी सदन में उठाया था कि ‘एप्सटीन फाइल’ और एक उद्योगपति के खिलाफ अमेरिका में दर्ज मुकदमे के चलते प्रधानमंत्री ने दबाव में आकर अमेरिका के साथ व्यापार समझौता किया।

उनके मुताबिक, नेता प्रतिपक्ष ने कुछ महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए तो लोकसभा अध्यक्ष ने तथ्यों को सत्यापित करने के लिए कहा और नेता प्रतिपक्ष सत्यापित करने के लिए तैयार हुए, लेकिन सत्तापक्ष के लोग नहीं चाहते थे कि विषय उठाया जाए।

उनका कहना था, ‘‘राहुल गांधी को बार-बार यह गुहार लगनी पड़ती है कि उनको बोलने दिया जाए। माइक बंद कर दिया जाता है। लोकसभा अध्यक्ष की ओर से कहा जाता है कि आप विषय पर केंद्रित रहिए।’’

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कांग्रेस नेता ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष के इस आचरण से लोकतांत्रिक भावना और सदन में उनकी निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं।

उन्होंने कहा कि बीते नौ फरवरी को कांग्रेस सांसद शशि थरूर का माइक बंद कर दिया गया था।

गोगोई ने दावा किया कि आज देश के राजनीतिक नेतृत्व को सवाल पसंद नहीं है और वह सिर्फ ‘मन की बात’ सुनाते हैं।

उनके मुताबिक, लोकसभा अध्यक्ष ने विपक्ष की महिला सांसदों का हवाला देते हुए कहा था कि उन्होंने खुद प्रधानमंत्री मोदी से कहा कि वह राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा का जवाब देने के लिए सदन में नहीं आए क्योंकि कुछ अप्रत्याशित घटित हो सकता है।

गोगोई ने कहा, ‘‘यह शर्मनाक है।’’

उन्होंने सवाल किया कि किस आधार पर विपक्ष की महिला सांसदों पर इस तरह का आरोप लगाया गया है?

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कांग्रेस सांसद ने दावा किया, ‘‘महिला सांसद जब सत्ता से सवाल करती हैं तो उन्हें यह याद दिलाया जाता है कि वह एक महिला है। यह इस सदन की परंपरा बन गई है।’’

गोगोई ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष के भाषणों के कई अंश कार्यवाही से हटा दिए जाते हैं, लेकिन सत्तापक्ष के सदस्य पूर्व प्रधानमंत्रियों पर अनर्गल आरोप लगाते हैं तो उन्हें कार्यवाही से नहीं हटाया जाता।

उन्होंने कहा कि यह ‘‘पक्षपात सदन की मर्यादा के लिए उचित नहीं है’’।

कांग्रेस नेता ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच संवाद जरूरी है।

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पीटीआई के इनपुट के साथ

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