
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भर्ती परीक्षाओं में ‘ओएमआर शीट’ बदले जाने के मुद्दे को लेकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेताओं और राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार गंभीर मुद्दों को केवल राजनीति का माध्यम बना रही है।
गहलोत ने मांग की कि राज्य सरकार 2024 और 2025 में आयोजित सभी भर्ती परीक्षाओं की भी गंभीरता और गहराई से जांच कराए।
विशेष अभियान समूह (एसओजी) ने इस प्रकरण में मंगलवार को राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड के तकनीकी प्रमुख सहित चार अन्य लोगों को गिरफ्तार किया है।
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इस संबंध में गहलोत ने कहा कि राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड में ‘ओएमआर शीट’ बदले जाने के खुलासे ने पूरी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
उन्होंने कहा कि एसओजी की रिपोर्ट के अनुसार यह गड़बड़ी 2018 से पहले की बीजेपी सरकार के समय शुरू हुई और 2026 तक जारी रही जो अत्यंत चिंताजनक है।
गहलोत ने कहा कि जो कर्मचारी इस फर्जीवाड़े में लिप्त थे, वे 2024 और 2025 में भी सक्रिय रहे और राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड में पदस्थ थे।
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उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने प्रश्नपत्र लीक की समस्या से निपटने के लिए देश में सबसे पहले कड़े कानून बनाए, जिनमें उम्रकैद की सजा, दोषियों की संपत्ति जब्त करने और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान शामिल हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में इतिहास में पहली बार राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) के एक सदस्य को गिरफ्तार किया गया।
उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस कार्यकाल के दौरान एसओजी ने 250 से अधिक गिरफ्तारियां कीं और प्रश्नपत्र लीक करने वाले माफिया की संपत्तियों को ध्वस्त किया गया।
गहलोत ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने कभी राजनीति को न्याय के आड़े नहीं आने दिया और जहां भी कमी रही, वहां सुधार किए गए।
उन्होंने कहा, “चाहे कांग्रेस शासन हो या बीजेपी शासन, यदि किसी ने भी बेईमानी की है तो उसे प्रश्नपत्र लीक से जुड़े नए कड़े कानूनों के तहत सजा मिलनी चाहिए, ताकि न्याय सुनिश्चित हो सके।”
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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार प्रश्नपत्र लीक और ओएमआर शीट बदलने जैसे गंभीर मुद्दों पर निष्पक्ष जांच कराने के बजाय इन्हें राजनीतिक हथियार बना रही है और केवल कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुई परीक्षाओं को निशाना बना रही है।
गहलोत ने कहा कि पिछले दो वर्षों में राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा सूचना सहायक, संविदा नर्स (जीएनएम/एएनएम), कृषि पर्यवेक्षक, कनिष्ठ लेखाकार, संगणक, समान पात्रता परीक्षा (सीईटी–स्नातक और वरिष्ठ माध्यमिक), पशु परिचर, कनिष्ठ अनुदेशक, एलडीसी, कनिष्ठ अभियंता (जेईएन), पटवारी, वाहन चालक, ग्राम विकास अधिकारी (वीडीओ) और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी (ग्रेड-4) सहित कई परीक्षाएं आयोजित की गईं, जिनमें 35 लाख से अधिक अभ्यर्थी शामिल हुए।
उन्होंने कहा कि ये सभी परीक्षाएं उसी प्रणाली और स्टाफ की देखरेख में हुईं, जो अब ओएमआर शीट में गड़बड़ी के मामले में पकड़े गए हैं।
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गहलोत ने कहा कि इस कारण इन सभी परीक्षाओं की शुचिता संदेह के घेरे में आ गई है। उन्होंने कहा कि अभ्यर्थी लगातार शिकायत कर रहे हैं कि पिछले दो वर्षों से कट-ऑफ असामान्य रूप से अधिक जा रही है, जिससे संदेह पैदा हो रहा है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, “मैं मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से आग्रह करता हूं कि इन नए खुलासों के बाद 2024 और 2025 की सभी भर्ती परीक्षाओं की गंभीरता और गहराई से जांच कराई जाए। मुझे उम्मीद है कि युवाओं के भविष्य को देखते हुए सरकार तुरंत कदम उठाएगी।”
पीटीआई के इनपुट के साथ
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