
साल 2018 का दूसरा सूर्य ग्रहण 13 जुलाई को लगेगा, जो कि 2 घंटे 25 मिनट तक रहेगा। भारत में सूर्य ग्रहण का असर दिखाई नहीं देगा। इसे केवल अंटाकर्टिका, तस्मानिया और ऑस्ट्रेलिया के दक्षिणी भाग में देखा जा सकता है। इससे पहले 15 फरवरी को भी सूर्य ग्रहण था जो भारत में नहीं दिखा था। वहीं अगले महीने 11 अगस्त को फिर सूर्यग्रहण पड़ेगा, वो भी भारत में नहीं दिखाई देगा।
इस बार यह ग्रहण 13 तारीख की अशुभ तारीख को पड़ रही है दुनियाभर के तमाम लोग इस तारीख अशुभ मानते हैं। ऐसा संयोग 40 साल के बाद दोबारा बना है। इसके पहले 13 दिसंबर 1974 को सूर्यग्रहण पड़ा था।
सूर्य ग्रहण एशिया के कई हिस्सों सहित भारत में नहीं दिखाई देगा। इसलिए भारत में रहने वाले लोगों को ग्रहण संबंधी किसी भी तरह के नियम और सावधानी रखने की आवश्यकता नहीं है। इस तरह सूर्य ग्रहण के कारण आम लोगों के रोजमर्रा के कामकाज में बदलाव नहीं आएगा।
भारत, श्रीलंका, पकिस्तान, नेपाल, अफगानिस्तान, फिजी, मॉरिशस, संयुक्त अरब अमीरात और अन्य एशियाई देशों में सूर्यग्रहण दिखाई नहीं देगा। सूर्य ग्रहण अफ्रीका, उत्तरी ऑस्ट्रेलिया, यूरोप, दक्षिणी अमेरिका और उत्तरी अमेरिका महाद्वीप के देशों जैसे अमेरिका और कनाडा में भदिखाई नहीं देगा। इसलिए इन देशों में ग्रहण का महत्व नहीं रहेगा।
यह दक्षिण ऑस्ट्रेलिया व उत्तरी अंटार्कटिका के कुछ हिस्सों में तथा न्यूजीलैंड के स्टीवर्ट द्वीप से दिखाई देगा। वहीं एडिलेड, विक्टोरिया में मेलबोर्न और तस्मानिया में होबार्ट कुछ लोकप्रिय शहर हैं, जहां आंशिक सूर्य ग्रहण दिखाई देगा।
विज्ञान के अनुसार सूर्य ग्रहण के दौरान खतरनाक सोलर रेडिएशन निकलता है। यह सोलर रेडिएशन आंखों के नाजुक टिशू को नुकसान पहुंचा सकता है। इससे आंखों में विजन-इशू आ सकता है। ऐसे में सूर्य ग्रहण के दौरान खास सावधानियां बरतने की बात कही जाती है। कहते हैं कि सूर्य ग्रहण का आंखों पर असर उसके प्रभाव क्षेत्र पर निर्भर करता है। सूर्य ग्रहण को देखने के लिए वैज्ञानिक पिन होल का इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं। पिन होल को आसानी से ग्रामीण इलाकों में भी बनाया जा सकता है। इसके अलावा सूर्य ग्रहण देखने के लिए बाजार में कई सर्टिफाइड चश्में उपलब्ध हैं।
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Published: 12 Jul 2018, 6:00 PM IST