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'ये लोकतंत्र को मिटाने के किसी षड्यंत्र से कम नहीं', SIR को लेकर चुनाव आयोग के भीतर मतभेद पर विपक्ष का बड़ा आरोप

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने निर्वाचन आयोग पर सवाल खड़े किए और सर्वोच्च न्यायालय से मामले में स्वत: संज्ञान लेने की अपील की।

'ये लोकतंत्र को मिटाने के किसी षड्यंत्र से कम नहीं', SIR को लेकर चुनाव आयोग के भीतर मतभेद पर विपक्ष का बड़ा आरोप
'ये लोकतंत्र को मिटाने के किसी षड्यंत्र से कम नहीं', SIR को लेकर चुनाव आयोग के भीतर मतभेद पर विपक्ष का बड़ा आरोप 

  • अखिलेश यादव ने निर्वाचन आयोग पर सवाल खड़े किए और सर्वोच्च न्यायालय से मामले में स्वत: संज्ञान लेने की अपील की।

  • उन्होंने कहा कि इसका सीधा मतलब ये है कि सभी चुनाव आयुक्त अपना सही काम नहीं कर पा रहे हैं।

  • अखिलेश बोले- कुछ लोगों द्वारा सत्ता की कठपुतली बनकर लोकतंत्र को धोखा देना घोर सांविधानिक अपराध है।

  • जॉन ब्रिटास ने कहा कि संसद को ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की प्रक्रिया तत्काल शुरू करनी चाहिए।

चुनावी मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर निर्वाचन आयोग के भीतर सामने आए मतभेद ने अब राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। मीडिया की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के फैसलों और प्रक्रियाओं पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्ति दर्ज कराई। 

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों आयुक्तों ने कुछ फैसलों और आदेशों को अपनी जानकारी के बिना लिए जाने पर सवाल उठाए हैं। इस रिपोर्ट का हवाला देते हुए समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने निर्वाचन आयोग पर सवाल खड़े किए और सर्वोच्च न्यायालय से मामले में स्वत: संज्ञान लेने की अपील की।

सर्वोच्च न्यायालय स्वत: संज्ञान ले- अखिलेश यादव

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ''ये एक बेहद गंभीर समाचार है कि पिछले 10 महीनों में 2 चुनाव आयुक्तों ने निर्वाचन आयोग के गलत निर्णयों पर 14 बार अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। इसका सीधा मतलब ये है कि सभी चुनाव आयुक्त अपना सही काम नहीं कर पा रहे हैं। एक स्वतंत्र निकाय के सदस्यों को अगर न्यायपूर्ण कार्य करने की स्वतंत्रता नहीं है या उनकी कोई सुनवाई नहीं है तो ये लोकतंत्र के लिए बेहद घातक और खतरनाक हालात हैं। कुछ लोगों द्वारा सत्ता की कठपुतली बनकर लोकतंत्र को धोखा देना घोर सांविधानिक अपराध है। ये लोकतंत्र को मिटाने के किसी षड्यंत्र से कम नहीं है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय स्वत: संज्ञान ले।''

जयराम रमेश का CEC पर वार

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इस खबर का उल्लेख करते ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने निर्वाचन आयोग की ‘‘विश्वसनीयता और ईमानदारी’’ को नष्ट कर दिया है।

'तत्काल शुरू हो ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की प्रक्रिया'

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) सांसद जॉन ब्रिटास ने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग अब ‘‘एक व्यक्ति के नियंत्रण’’ में है। उन्होंने 'एक्स' पर पोस्ट कर कहा कि संसद को ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की प्रक्रिया तत्काल शुरू करनी चाहिए।

ब्रिटास ने इस बात का उल्लेख कहा कि विपक्षी सांसदों ने 24 अप्रैल, 2026 को इस संबंध में नोटिस दिया था।

दरअसल, इस साल 24 अप्रैल को विपक्षी दलों के 73 राज्यसभा सदस्यों ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने के लिए नया नोटिस सौंपा था। नोटिस में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नौ आरोप लगाए गए थे और संविधान के अनुच्छेद 324(5) सहित संबंधित प्रावधानों का हवाला दिया गया था।

ब्रिटास ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की। उन्होंने कहा कि जब दो निर्वाचन आयुक्तों ने कथित तौर पर प्रक्रिया पर आपत्तियां दर्ज की हैं, तो एसआईआर की वैधता पर न्यायिक स्तर पर विचार किया जाना चाहिए।

सौरभ भारद्वाज का विपक्षी दलों से अपील

आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज ने विपक्षी दलों से इस मुद्दे पर एकजुट रहने की अपील की। उन्होंने ‘एक्स’ पर कहा कि सभी विपक्षी दलों को पहले निर्वाचन आयोग से जुड़े इस मुद्दे को उठाना चाहिए और आयोग को ‘‘व्यवस्थित’’ करने पर ध्यान देना चाहिए।

सागरिका घोष ने निर्वाचन आयोग के कामकाज पर सवाल उठाए

ममता तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सदस्य सागरिका घोष ने भी निर्वाचन आयोग के कामकाज पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईआर की ‘‘खामियों और अव्यवस्था’’ की जिम्मेदारी मुख्य निर्वाचन आयुक्त की है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि किसके निर्देश पर नागरिकों को कथित तौर पर मताधिकार से वंचित किया जा रहा है।

इंडियन एक्सप्रेस के खुलासे में क्या?

ज्ञात हो कि मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले करीब 10 महीनों के दौरान तीन सदस्यीय निर्वाचन आयोग के भीतर ही एसआईआर से जुड़े कई अहम फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर सवाल उठते रहे। ये आपत्तियां आयोग के दो चुनाव आयुक्तों-सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से दर्ज कराई गईं। मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की देशव्यापी प्रक्रिया तीनों चुनाव आयुक्तों की निगरानी में चल रही है।

 रिपोर्ट के मुताबिक, संधू और जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 मौकों पर आयोग के कुछ फैसलों और आदेशों पर औपचारिक रूप से आपत्ति दर्ज कराई। इनमें एक ही दिन चार बार आपत्ति दर्ज किए जाने का भी उल्लेख है। दोनों चुनाव आयुक्तों का कहना था कि संबंधित फैसले या आदेश उनकी जानकारी अथवा सहमति के बिना लिए या जारी किए गए। इन आपत्तियों का दायरा निर्वाचन आयोग के उन महत्वपूर्ण कार्यों से जुड़ा है, जिनका सीधा संबंध मतदाता के अधिकार और मतदाता सूची की विश्वसनीयता से है।

 इनमें नए मतदाताओं का पंजीकरण, मतदाता सूची से नाम हटाना और हटाए गए नामों को दोबारा बहाल करना, एसआईआर के दौरान नाम बहाल किए जाने के आदेशों के खिलाफ अपील की प्रक्रिया तथा पूरी मतदाता सूची के डेटा की कस्टडी और सुरक्षा जैसे मुद्दे शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इन मामलों में दर्ज आपत्तियों की प्रतियां मुख्य चुनाव आयुक्त को भी भेजी गई थीं।

आईएएनएस और पीटीआई के इनपुट के साथ

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