
अभिनेता से नेता बने विजय का चुनावी पदार्पण भी उनकी फिल्मों की तरह रोमांच और सस्पेंस से भरा रहा। हालांकि, 27 सितंबर 2025 को करूर में उनकी पार्टी तमिलागा वेत्री कषगम ( टीवीके) की रैली में भगदड़ मचने से 41 लोगों की मौत होने के बाद उनके सियासी मंसूबों को थोड़ा धक्का जरूर लगा था।
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इस दुखद घटना ने कई मुद्दों को उजागर किया, जिसके बाद राज्य सरकार ने राजनीतिक बैठकों और रैलियों के आयोजन के लिए मानक संचालन प्रक्रियाएं (एसओपी) तैयार कीं। वहीं विजय को इस घटना के लगभग पांच महीने बाद केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) जांच का सामना करना पड़ा।
विजय (51) ने अपने पहले चुनावी मुकाबले में ही उल्लेखनीय प्रभाव डाला और यह साबित किया कि चुनावी लड़ाई सीधे तौर पर टीवीके और द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (डीएमके) के बीच थी।
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टीवीके के एक नेता ने कहा, “सत्ता विरोधी लहर और पहली बार वोट देने वाले युवाओं, महिलाओं और युवा मतदाताओं पर उनका प्रभाव पूरे राज्य में एक लहर में बदल गया।”
उन्होंने कहा कि विजय के करिश्मे और बड़ी संख्या में उनके प्रशंसक होने की वजह से टीवीके के पक्ष में माहौल बना।
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विजय ने महिलाओं के लिए “सुपर सिक्स” चुनावी वादे किए, जिनमें छह मुफ्त एलपीजी सिलेंडर और मासिक वित्तीय सहायता शामिल है।
सियासत में नए होने के कारण उनकी आलोचना भी हुई कि वह राजनीतिक भाषण भी फिल्मों के संवाद की तरह देते हैं। उनकी पार्टी का पूरा चुनावी अभियान काफी हद तक विजय के इर्द-गिर्द ही रहा।
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