
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता पूरा हो गया है। ट्रंप के मुताबिक, इस समझौते से रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने का रास्ता साफ होगा और दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनावपूर्ण रिश्तों में एक नई शुरुआत होगी। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में इस समझौते की तुलना पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में हुए समझौते से करते हुए कहा कि नया समझौता ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकने के लिए अधिक सख्त व्यवस्था सुनिश्चित करेगा।
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ईरान की मेहर न्यूज एजेंसी के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच बनी सहमति 14 प्रमुख शर्तों पर आधारित है। इन शर्तों में आर्थिक प्रतिबंधों में राहत, अरबों डॉलर की फंडिंग, क्षेत्रीय सैन्य गतिविधियों में कमी और परमाणु मुद्दे पर आगे की बातचीत जैसे कई अहम बिंदु शामिल हैं। ट्रंप का दावा है कि यह समझौता दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों में बुनियादी बदलाव लाने वाला साबित हो सकता है।
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ईरान के तेल, पेट्रोकेमिकल्स और उनसे जुड़े निर्यात पर लगी पाबंदियां हटाई जाएंगी।
ईरान को अपने वित्तीय संसाधनों तक फिर से पूरी पहुंच मिलेगी।
60 दिनों की बातचीत अवधि के दौरान फ्रीज किए गए 24 अरब डॉलर जारी किए जाएंगे, जिनमें से 12 अरब डॉलर पहले ही जारी किए जाएंगे।
अमेरिका और उसके सहयोगियों को ईरान के पुनर्निर्माण के लिए करीब 300 अरब डॉलर की योजनाएं पेश करनी होंगी।
लेबनान सहित सभी मोर्चों पर युद्ध तत्काल और स्थायी रूप से समाप्त किया जाएगा।
अमेरिका ईरान की संप्रभुता का सम्मान करने और उसके मामलों में हस्तक्षेप न करने का वादा करेगा।
अमेरिका द्वारा लगाई गई नौसैनिक नाकाबंदी 30 दिनों के भीतर पूरी तरह हटा ली जाएगी।
अमेरिकी सेनाएं ईरान के आसपास के इलाकों से वापस हटेंगी।
होर्मुज स्ट्रेट को ईरान की व्यवस्था के तहत 30 दिनों के भीतर फिर से खोल दिया जाएगा।
परमाणु मुद्दों और प्रतिबंधों को पूरी तरह हटाने के लिए 60 दिनों की नई बातचीत शुरू होगी।
ईरान परमाणु अप्रसार संधि (NPT) के तहत परमाणु हथियार न बनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराएगा।
अमेरिका बातचीत के दौरान क्षेत्र में अतिरिक्त सैन्य तैनाती नहीं करेगा और कोई नई पाबंदी नहीं लगाएगा।
समझौते के क्रियान्वयन की निगरानी के लिए एक विशेष तंत्र बनाया जाएगा तथा किसी भी अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव के जरिए मंजूरी दी जाएगी।
ईरान का मिसाइल कार्यक्रम और प्रतिरोध समूहों को उसका समर्थन इस समझौते का हिस्सा नहीं होगा।
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रिपोर्ट के मुताबिक, परमाणु मुद्दों और प्रतिबंधों को लेकर अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए 60 दिनों की बातचीत अवधि शुरू की जाएगी। हालांकि अंतिम चरण की वार्ता तब तक शुरू नहीं होगी, जब तक फ्रीज किए गए 12 अरब डॉलर जारी नहीं हो जाते, तेल क्षेत्र पर लगे प्रतिबंध नहीं हट जाते और नौसैनिक नाकाबंदी समाप्त नहीं हो जाती। ऐसे में यह समझौता सिर्फ तत्काल तनाव कम करने का प्रयास नहीं, बल्कि अमेरिका और ईरान के बीच भविष्य के संबंधों की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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