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सऊदी अरब में हूतियों के बड़े हमले का दावा, तेल पाइपलाइन और एयरपोर्ट निशाने पर, मक्का-मदीना पर हमले से इनकार

यमन के हूतियों ने सऊदी अरब में तेल ठिकानों, रिफाइनरी और हवाई अड्डों पर हमले का दावा किया है। सऊदी अरब ने दो बैलिस्टिक मिसाइलें रोकने की जानकारी दी है।

फोटो: सोशल मीडिया
फोटो: सोशल मीडिया 

हूतियों ने सऊदी अरब में तेल ठिकानों और एयरपोर्ट पर हमले का दावा किया।

सऊदी अरब ने मक्का-मदीना की ओर दागी गईं दो मिसाइलें रोकने की जानकारी दी।

हूतियों ने मक्का और मदीना पर हमले से इनकार किया।

अक्टूबर में सऊदी अरब के ऊर्जा ठिकानों पर पहले भी हमलों के दावे हुए थे।

यमन के हूती विद्रोहियों ने शनिवार, 24 अक्टूबर 2026 को सऊदी अरब में तेल सुविधाओं, हवाई अड्डों और एक सैन्य एयरबेस पर हमले करने का दावा किया। हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी के मुताबिक, इन अभियानों में तेल आपूर्ति से जुड़े अहम ठिकानों और कई हवाई अड्डों को निशाना बनाया गया। हालांकि, सऊदी अधिकारियों ने हूतियों के दावों की पुष्टि नहीं की है और यह भी स्पष्ट नहीं है कि बताए गए ठिकानों को कितना नुकसान पहुंचा।

याह्या सरी ने कहा कि हमलों में सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन, कच्चे तेल के पंपिंग स्टेशन, यानबू में सऊदी अरामको की एक सुविधा और राबिघ तेल रिफाइनरी को निशाना बनाया गया। इसके अलावा, हूतियों ने रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, दम्मम के किंग फहद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, नज्रान हवाई अड्डे और खमीस मुशैत स्थित एक एयरबेस पर भी हमले करने का दावा किया।

मक्का-मदीना की ओर मिसाइलें दागे जाने पर क्या बोला सऊदी अरब?

सऊदी अरब की नागरिक सुरक्षा एजेंसी ने बताया कि मक्का और मदीना क्षेत्रों की ओर दागी गई दो बैलिस्टिक मिसाइलों को बीच में ही रोक दिया गया। इसके बाद मिसाइलों के हिस्से और मलबा कई इलाकों में गिरे। एजेंसी के अनुसार, मक्का के वादी अल-मुघम्मस में मिसाइल के टुकड़े मिले, जबकि जेद्दा के अल-नुज्हा इलाके, ताइफ के वादी जलील और राबिघ के मस्तूरा क्षेत्र में भी मलबा गिरा।

हालांकि, हूती प्रवक्ता याह्या सरी ने मक्का और मदीना पर हमला करने से साफ इनकार किया। इस तरह हूतियों के दावे और सऊदी नागरिक सुरक्षा की ओर से दी गई जानकारी के बीच अंतर सामने आया है। सऊदी अधिकारियों ने मिसाइलों को रोकने और मलबा गिरने की जानकारी दी, लेकिन हूतियों के बताए सभी तेल ठिकानों और हवाई अड्डों पर हमले के नतीजों की पुष्टि नहीं की।

अक्टूबर में पहले भी सामने आए थे हमलों के दावे

सऊदी अरब में अक्टूबर के दौरान तेल सुविधाओं और हवाई अड्डों को निशाना बनाए जाने की खबरें पहले भी सामने आई थीं। 13 अक्टूबर को दहरान स्थित सऊदी अरामको के मुख्यालय परिसर में आग लगने की खबर आई थी। उस समय सऊदी ऊर्जा मंत्रालय ने घटना को सीमित बताते हुए कहा था कि किसी की मौत या घायल होने की सूचना नहीं है। दहरान परिसर अरामको के उन प्रमुख ऑपरेटिंग केंद्रों में शामिल है, जहां से तेल के कुओं, रिफाइनरियों, आयात केंद्रों और पाइपलाइनों की निगरानी की जाती है।

इसके अगले दिन, 14 अक्टूबर को हूतियों ने दहरान में अरामको की सुविधाओं और रियाद की एक रिफाइनरी पर हमले करने का दावा किया था। इससे पहले 10 अक्टूबर को रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हमले की खबर आई थी। उस घटना में 13 लोगों की मौत और 300 से अधिक लोगों के घायल होने की सूचना दी गई थी।

दम्मम के किंग फहद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर भी हमले की खबर सामने आई थी, जिसमें अधिकारियों के हवाले से एक सऊदी नागरिक और एक भारतीय नागरिक की मौत की जानकारी दी गई थी। कई लोगों के घायल होने की भी खबर थी। हूतियों ने इससे पहले एयरलाइंस को सऊदी हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल नहीं करने की चेतावनी दी थी। ताजा घटनाक्रम से सऊदी अरब के तेल ढांचे और विमानन सेवाओं की सुरक्षा को लेकर तनाव और बढ़ गया है।

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