
बांग्लादेश में आम चुनाव से कुछ ही दिन पहले, कट्टरपंथी इस्लामी पार्टी जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले गठबंधन में फूट पड़ गई है। स्थानीय मीडिया के अनुसार, गठबंधन के घटक दल इस्लामी आंदोलन बांग्लादेश (आईएबी) ने ब्लॉक से अलग होने का ऐलान किया।
आईएबी ने शुक्रवार को कहा कि वह दूसरों के एहसान पर निर्भर रहकर राजनीति में शामिल नहीं होना चाहती। वह अगले आम चुनाव में 300 में से 268 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की योजना बना रही है।
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आईएबी का यह फैसला तब सामने आया है, जब जमात के नेतृत्व वाले गठबंधन ने ढाका में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान 253 सीटों के बंटवारे का ऐलान किया। बता दें, आईएबी ने इस प्रेस कॉन्फ्रेंस का विरोध किया था।
बांग्लादेश के अखबार द डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक, ढाका में पार्टी के सेंट्रल ऑफिस में मीडिया से बातचीत के दौरान आईएबी के प्रवक्ता गाजी अताउर रहमान ने कहा कि सीट-शेयरिंग के दौरान पार्टी को इंसाफ नहीं मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि गठबंधन इस्लामिक विचारधारा से भटक गया है।
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मीडिया ने बाद में पार्टी प्रवक्ता से सवाल पूछा कि क्या आईएबी ने सीट बंटवारे को लेकर खुद को इस गठबंधन से बाहर किया है? इसपर उन्होंने कहा, "सीटों की संख्या कम या ज्यादा हो सकती है। लेकिन यहां, सीट शेयरिंग की प्रक्रिया में, हमारे आत्मसम्मान को ठेस पहुंचा है। यह भी एक बड़ा कारण है।"
अताउर ने बातचीत के दौरान जमात पर मनमाने बर्ताव का आरोप लगाया और कहा कि इससे उनकी पार्टी की बेइज्जती हुई है। द डेली स्टार ने आईएबी लीडर के हवाले से कहा, "हम आज (शुक्रवार) आपके सामने यह बताने के लिए मजबूर हैं कि इस्लामी आंदोलन बांग्लादेश ने जिन 270 सीटों पर नामांकन पेपर जमा किए थे, उनमें से दो उम्मीदवारों को रिजेक्ट कर दिया गया। बाकी 268 उम्मीदवार वैध हैं। हमने उन्हें चुनाव लड़ने का निर्देश दिया है। उनमें से कोई भी नाम वापस नहीं लेगा।"
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बता दें, जमात और आईएबी बांग्लादेश के दो सबसे बड़े इस्लामी समूह हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जमात 11 पार्टी गठबंधन के तहत इस्लामी वोटों को मजबूत करने के लिए तीन महीने से ज्यादा समय से बातचीत कर रहे थे। आईएबी भी जमात के नेतृत्व वाले 11-पार्टी गठबंधन का हिस्सा था। हालांकि, पिछले कई दिनों से सीट-शेयरिंग को लेकर दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ गया था।
इससे पहले 29 दिसंबर 2025 को नॉमिनेशन की डेडलाइन से ठीक पहले पार्टी के साथ गठबंधन की बातचीत फेल हो गई। इसकी वजह से दोनों पार्टियों को सैकड़ों सीटों पर नॉमिनेशन जमा करना पड़ा, जिससे गठबंधन के अंदर ही उथल-पुथल मच गई।
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चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, जमात ने आखिरी दिन 276 सीटों पर नॉमिनेशन फाइल किया, जबकि इस्लामी आंदोलन ने 268 सीटों पर नामांकन पेपर जमा किए। बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले चुनाव में अब महीने भर का भी समय नहीं रह गया है। ऐसे में राजनीतिक दलों के बीच तनाव काफी बढ़ता जा रहा है।
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