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ब्राजील में लूला दा सिल्वा ने जीता राष्ट्रपति चुनाव, ट्रंप समर्थक बोल्सोनारो को 44 लाख वोटों से हराया, कहा- हम अमेरिका के पिछलग्गू नहीं

ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा ने राष्ट्रपति चुनाव में अपने प्रतिद्वंद्वी फ्लावियो बोल्सोनारो को करीब 44 लाख वोटों से हराकर जीत हासिल की। उनका नया कार्यकाल 5 जनवरी 2027 से शुरू होगा।

फोटो: सोशल मीडिया
फोटो: सोशल मीडिया 

ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा ने एक बार फिर राष्ट्रपति चुनाव जीत लिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों के आलोचक लूला अब चौथी बार देश की कमान संभालेंगे। उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी फ्लावियो बोल्सोनारो को करीब 44 लाख वोटों से हराया। उनका नया कार्यकाल 5 जनवरी 2027 से शुरू होगा।

लूला की जीत ऐसे समय में हुई है, जब लैटिन अमेरिका के कई देशों में ट्रंप के करीबी दक्षिणपंथी नेताओं का प्रभाव बढ़ रहा है। चुनाव में जीत के बाद लूला ने कहा कि जनता ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए मतदान किया है। उन्होंने डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए विदेशी हस्तक्षेप को रोकने की बात भी कही।

'ब्राजील किसी दूसरे देश के पीछे चलने वाला राष्ट्र नहीं है'

लूला ने अमेरिका को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि ब्राजील किसी दूसरे देश के पीछे चलने वाला राष्ट्र नहीं है। देश अपने फैसले स्वतंत्र रूप से लेगा और सरकार की नीतियां तय करने में जनता की भागीदारी बढ़ाई जाएगी।

इस जीत को अमेरिका के बढ़ते प्रभाव का विरोध करने वाले नेताओं के लिए राहत के तौर पर देखा जा रहा है। लैटिन अमेरिका के दो सबसे अधिक आबादी वाले देशों ब्राजील और मेक्सिको में अब वामपंथी विचारधारा वाली सरकारें बनी रहेंगी। करीब 2.6 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था वाले ब्राजील में चुनाव प्रचार के दौरान लूला ने बार-बार कहा था कि देश को अपने फैसले खुद लेने चाहिए और अमेरिकी दबाव में नहीं आना चाहिए। ट्रंप की ओर से ब्राजील पर लगाए गए भारी टैरिफ भी दोनों देशों के बीच तनाव की प्रमुख वजह रहे हैं।

मतदान का समय बढ़ाने पर उठा विवाद

ब्राजील में मतदान समाप्त होने से महज तीन मिनट पहले सुप्रीम कोर्ट के जज क्रिस्टियानो जानिन ने वोटिंग का समय दो घंटे बढ़ाने का आदेश दिया। यह फैसला दोनों उम्मीदवारों की मांग के बाद लिया गया था।

लूला ने साओ पाउलो और साल्वाडोर में मतदाताओं को मतदान केंद्रों तक पहुंचाने वाली बसों में आई परेशानियों का हवाला दिया था। वहीं, बोल्सोनारो ने दक्षिणी ब्राजील में भारी बारिश के कारण मतदान प्रभावित होने की बात कही। हालांकि, बाद में उन्होंने मतदान का समय बढ़ाने के फैसले को अस्वीकार्य बताया और दूसरे चरण के चुनाव परिणाम रद्द कराने की मांग करने की बात कही।

समय बढ़ाए जाने के कारण मतगणना दो घंटे की देरी से शुरू हुई। कुछ मतदान केंद्रों पर वोटिंग मशीनें बंद हो चुकी थीं और उन्हें दोबारा चालू नहीं किया जा सका। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि कितने केंद्रों पर अतिरिक्त समय के दौरान मतदान हुआ।

बोल्सोनारो के सहयोगी निकोलस फरेरा ने भी इस फैसले पर सवाल उठाए। उनकी आपत्ति थी कि जज जानिन पहले लूला के वकील रह चुके हैं। ऐसे में बोल्सोनारो इस मामले को लेकर कानूनी कार्रवाई का रास्ता अपना सकते हैं।

महंगाई और अपराध बने चुनाव के अहम मुद्दे

चुनाव के पहले दौर में बोल्सोनारो को 47 प्रतिशत, जबकि लूला को 45 प्रतिशत वोट मिले थे। इसके बाद लूला ने युवा मतदाताओं तक अपनी पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया। पूरे चुनाव अभियान के दौरान महंगाई, खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतें और अपराध प्रमुख मुद्दे बने रहे।

दोनों नेताओं के परिवारों और सहयोगियों पर भी भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं। बोल्सोनारो भ्रष्टाचार से जुड़े एक बड़े विवाद में घिरे रहे, जबकि लूला को भी पहले भ्रष्टाचार के मामलों में जेल जाना पड़ा था। हालांकि, बाद में उनकी सजा रद्द कर दी गई।

मजदूर नेता से राष्ट्रपति तक का सफर

लूला ने 1970 के दशक में मजदूर संगठन के नेता के रूप में अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी। उन्होंने वर्कर्स पार्टी के गठन में अहम भूमिका निभाई। इसके बाद वह 2002 और 2006 में राष्ट्रपति चुने गए।

2010 में उनकी सहयोगी दिल्मा रूसेफ राष्ट्रपति बनीं, लेकिन 2016 में महाभियोग के जरिए उन्हें पद से हटा दिया गया। साल 2018 में लूला फिर से राष्ट्रपति चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन जेल में होने के कारण ऐसा नहीं कर सके। वह करीब 580 दिन जेल में रहे, जिसके बाद रिहा हुए। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी सजा रद्द कर दी।

साल 2022 में लूला ने तत्कालीन राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो को हराकर सत्ता में वापसी की थी। अब एक बार फिर जीत दर्ज कर उन्होंने ब्राजील की राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ साबित की है।

करीब 81 वर्ष की उम्र में लूला अमेरिका महाद्वीप के सबसे उम्रदराज राष्ट्रपतियों में शामिल होंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और निकारागुआ के राष्ट्रपति डैनियल ओर्टेगा की उम्र भी करीब 80 वर्ष है।

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