
नेपाल में भीषण बाढ़ की तबाही के बीच एक बार फिर बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। नेपाल के रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी में दोबारा बाढ़ आने का अलर्ट है। स्थानीय अधिकारियों ने लोगों को सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है। नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद रसुवा से चितवन तक नदी किनारे के इलाकों में राहत और बचाव टीमों को भी अलर्ट किया गया है। ताजा बाढ़ और भूस्खलन के कारण चितवन से गुजरने वाले नारायणगढ़-मुग्लिन, पोखरा और काठमांडू जाने वाले प्रमुख मार्ग भी बंद कर दिए गए हैं।
इस बीच, नेपाल में पहले आई विनाशकारी बाढ़ से अब तक 675 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि 2,498 लोग अभी भी लापता हैं। नेपाल की नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) के अनुसार, प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है।
26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद से भोटेकोशी नदी और उसके आसपास के इलाकों पर लगातार नजर रखी जा रही है। नेपाल न्यूज़ के अनुसार, रसुवा में भोटेकोशी नदी में एक और बाढ़ आई है और स्थानीय अधिकारियों ने लोगों को सावधानी बरतने को कहा है। नदी किनारे रहने वाले लोगों को सुरक्षित इलाकों में रहने की सलाह दी गई है।
इससे पहले भी नेपाल के अधिकारियों ने भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने को कहा था। चीन की तरफ नदी के अवरुद्ध होने और वहां झील बनने की सूचना के बाद दोबारा बाढ़ की आशंका को लेकर चिंता बढ़ी थी।
ताजा बाढ़ और भूस्खलन का असर यातायात पर भी पड़ा है। नेपाल न्यूज़ के मुताबिक, चितवन से गुजरने वाले नारायणगढ़-मुग्लिन, पोखरा और काठमांडू जाने वाले प्रमुख राजमार्ग पूरी तरह बंद कर दिए गए हैं। इससे राहत एवं बचाव अभियान के साथ सामान्य आवाजाही भी प्रभावित हुई है।
रसुवा से चितवन तक नदी के किनारे के इलाकों में बचाव दलों को अलर्ट किया गया है। भोटेकोशी के जलस्तर में दोबारा बढ़ोतरी ने पहले से तबाह इलाकों में नई चिंता पैदा कर दी है।
नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के बाद अब तक 675 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं। वहीं, 2,498 लोग अभी भी लापता हैं। बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने के कारण प्रभावित इलाकों में खोज एवं बचाव अभियान लगातार चलाया जा रहा है।
भोटेकोशी नदी में अचानक जलस्तर बढ़ने से आई बाढ़ ने रसुवा, नुवाकोट, धादिंग और आसपास के इलाकों में भारी तबाही मचाई। बाढ़ की चपेट में आने से जलविद्युत परियोजनाओं, सड़कों, पुलों और अन्य बुनियादी ढांचे को भी गंभीर नुकसान पहुंचा है।
753 पर्यटकों से संपर्क नहीं
नेपाल के संस्कृति, पर्यटन और नागरिक उड्डयन मंत्रालय के तहत आने वाले पर्यटन विभाग के मुताबिक, शनिवार को स्थानीय समयानुसार शाम 5:30 बजे तक 753 पर्यटकों से संपर्क नहीं हो पाया था। इनमें 589 विदेशी नागरिक शामिल हैं।
इस बीच राहत और बचाव एजेंसियां प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने और लापता लोगों की तलाश में जुटी हैं।
सिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, काठमांडू जिला प्रशासन कार्यालय ने शनिवार को एक आपात सूचना जारी की। इसमें विभिन्न संगठनों, संस्थानों, कंपनियों और आम नागरिकों से रसुवा, नुवाकोट और धादिंग जिलों के प्रभावित लोगों के लिए राहत सामग्री दान करने की अपील की गई है।
नेपाल में बाढ़ की नई आशंका के बीच भारत ने भी राहत और बचाव सहायता जारी रखी है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शनिवार को बताया कि भारत ने नेपाल के लिए राहत सहायता की चौथी उड़ान रवाना कर दी है।
भारतीय वायुसेना के सी-130 विमान से 11 टन अतिरिक्त राहत सामग्री भेजी गई है। इसमें खोज एवं बचाव कार्यों के लिए सुरंग विशेषज्ञों की तकनीकी टीम और आवश्यक उपकरण शामिल हैं।
इसके अलावा डीएनए जांच के लिए फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम और फोरेंसिक उपकरण भी भेजे गए हैं। राहत सामग्री में कंबल, स्लीपिंग बैग, तिरपाल, प्लास्टिक शीट और स्वच्छता किट भी शामिल हैं।
जयशंकर के अनुसार, 230 फुट लंबे सिंगल लेन मॉड्यूलर स्टील ब्रिज के निर्माण के लिए आवश्यक उपकरण लेकर 16 ट्रक नेपाल पहुंच चुके हैं। इसके अलावा सात और बेली ब्रिज लगाने के लिए जरूरी उपकरण भी जल्द भेजे जाएंगे।
इन पुलों को स्थापित करने वाली तकनीकी टीमें भी जल्द नेपाल पहुंचेंगी। बाढ़ में कई सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त होने के कारण प्रभावित इलाकों तक राहत पहुंचाना बड़ी चुनौती बना हुआ है।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बताया कि भारत की ओर से अब तक 68.5 टन राहत सामग्री हवाई मार्ग से काठमांडू पहुंचाई जा चुकी है। इसमें जरूरी दवाइयां, पोर्टेबल जनरेटर, खाद्य पैकेट, पानी शुद्ध करने की गोलियां और अन्य तकनीकी उपकरण शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि नेपाल के राहत और बचाव प्रयासों में भारत का सहयोग लगातार जारी रहेगा।
विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, बुधवार को भारतीय वायुसेना का सी-130जे हरक्यूलिस विमान भी 10 टन आपात राहत सामग्री लेकर नेपाल पहुंचा था। इसमें अस्थायी आश्रय, कंबल, स्वच्छता किट, सोलर लैंप और दवाइयां शामिल थीं।
नेपाल में बाढ़ से हुई भारी तबाही के बाद राहत और बचाव अभियान अभी जारी ही था कि भोटेकोशी नदी में दोबारा बाढ़ आने से प्रभावित इलाकों में नई चिंता पैदा हो गई है। प्रशासन नदी किनारे के इलाकों पर नजर बनाए हुए है और लोगों से सतर्क रहने की अपील की जा रही है।
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