
अमेरिका और ईरान इस्लामाबाद में युद्धविराम को लेकर अहम बातचीत करने की तैयारी में हैं। दोनों पक्षों के बीच गहरे अविश्वास, परस्पर विरोधी मांगों और संघर्ष से बाहर निकलने के बढ़ते दबाव के बीच यह वार्ता होने जा रही है।
द वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच “युद्ध से निकलने का रास्ता खोजने की जरूरत” के अलावा ज्यादा कुछ कॉमन नहीं लगता। बातचीत से पहले, दोनों देशों ने एक-दूसरे पर गलत नीयत से काम करने का आरोप लगाया।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के सार्वजनिक प्रस्ताव को धोखा करार दिया और कहा कि तेहरान होर्मुज स्ट्रेट से शिप ट्रांजिट पर रोक लगाकर बेईमानी कर रहा है।
इस बीच ईरान ने पक्की शर्तें रखी हैं। द वॉशिंगटन पोस्ट और द न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, ईरान संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबफ ने कहा कि बातचीत शुरू होने से पहले प्रतिबंधित और ब्लॉक किए गए एसेट्स को रिलीज करने जैसे मुद्दों को सुलझाना होगा।
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अमेरिकी डेलिगेशन को उपराष्ट्रपति जेडी वेंस लीड कर रहे हैं। द वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक, उन्होंने मीडिया से कहा, "मुझे लगता है कि यह सकारात्मक होगा। अगर ईरान अच्छी नीयत से बातचीत करता है तो हम निश्चित रूप से खुले हाथ बढ़ाने को तैयार हैं।"
पाकिस्तान ने खुद को एक अहम मध्यस्थ के तौर पर पेश किया है। द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बातचीत को 'करो या मरो' वाला पल बताया।
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यह बातचीत ऐसे समय में हो रही है जब बड़े पैमाने पर इलाके के हालात अस्थिर बने हुए हैं। द वॉशिंगटन पोस्ट और द न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, वैसे तो तकनीकी सीजफायर लागू है, लेकिन लेबनान में इजरायली ऑपरेशन जारी है, इससे डिप्लोमैटिक कोशिशें मुश्किल हो रही हैं।
द वॉशिंगटन पोस्ट के अनुसार, एक बड़ी रुकावट होर्मुज स्ट्रेट है, जो एक जरूरी ग्लोबल एनर्जी रूट है। ईरान ने ऐसे कंट्रोल लगाए हैं जिनके तहत टैंकरों को परमिशन लेनी होगी और टोल वसूलना शुरू कर दिया है। इस कदम को अमेरिकी अधिकारियों ने "गैर-कानूनी" करार कर स्वीकार करने से मना कर दिया।
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होर्मुज संकट का असर वैश्विक बाजार पर देखने को मिला है। इसकी वजह से तेल की कीमतों में भी उछाल देखने को मिला है। अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह से फिर से खोलना चाहता है, जबकि ईरान इस समुद्री मार्ग पर अपना दबदबा बनाए रखने पर तुला हुआ है।
बातचीत की स्थिति अभी भी बहुत अलग है। द वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक, ईरान ने यूरेनियम संवर्धन रोकने और अपने मिसाइल प्रोग्राम पर रोक लगाने की अमेरिका की मांगों को खारिज कर दिया है। वहीं अमेरिका ने संकेत दिया है कि बैन में राहत डील के बाद ही मिलेगी।
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यह अभी साफ नहीं है कि बातचीत डायरेक्ट होगी या मध्यस्थता होगी। द वॉशिंगटन पोस्ट ने बताया, दोनों पक्ष अलग-अलग बैठ सकते हैं। वेंस के ऊपर इस वक्त एक बड़ी जिम्मेदारी है। द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने रिपोर्ट किया कि ट्रंप ने उन्हें बातचीत को लीड करने के लिए भेजा है। ऐसे में इस बातचीत का नतीजा उपराष्ट्रपति की राजनीतिक समझ से काफी हद तक जुड़ा हुआ है।
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पाकिस्तान की भूमिका को लेकर द न्यूयॉर्क टाइम्स ने रिपोर्ट किया कि पाक ने शुरुआती सीजफायर में मदद की और अंदरूनी आर्थिक और सुरक्षा चुनौतियों के बावजूद वॉशिंगटन और तेहरान दोनों के साथ संबंधों का फायदा उठा रहा है।
मौजूदा लड़ाई इस साल की शुरुआत में बढ़ गई, जिससे दुनियाभर में एनर्जी सप्लाई को खतरा पैदा हो गया। इस हफ्ते कुछ समय के लिए सीजफायर हुआ, लेकिन यह कितना चलेगा, यह पक्का नहीं है क्योंकि दोनों पक्ष एक-दूसरे के इरादे को परख रहे हैं।
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