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ट्रंप की चुनावी हार के बाद भारतीय दंपत्ति-कंपनियों पर अमेरिका का एक्शन, ईरान को तेल कारोबार में मदद का आरोप

अमेरिका ने ईरान को तेल प्रतिबंधों से बचाने के आरोप में चंडीगढ़ के दंपत्ति, दो अन्य भारतीय नागरिकों और उनसे जुड़ी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए हैं।

फोटो: सोशल मीडिया
फोटो: सोशल मीडिया 

  • अमेरिका ने ईरान को तेल प्रतिबंधों से बचने में मदद करने के आरोप में चंडीगढ़ के एक दंपत्ति और उनसे जुड़ी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए हैं।

  • दो अन्य भारतीय नागरिकों पर भी कार्रवाई हुई है, जिन पर दंपत्ति की कंपनियों में निदेशक होने का आरोप है।

  • अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, यह नेटवर्क फर्जी समुद्री दस्तावेजों के जरिए ईरानी तेल ले जाने वाले जहाजों की पहचान छिपाने में मदद करता था।

  • अमेरिका ने तुर्की की एक कंपनी पर भी प्रतिबंध लगाए हैं, जिस पर छह प्रतिबंधित ईरानी एयरलाइनों को सेवाएं देने का आरोप है।

अमेरिका ने ईरान के तेल कारोबार पर शिकंजा कसते हुए भारत से जुड़े एक कथित नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। अमेरिकी वित्त विभाग ने चंडीगढ़ के सुनील कुमार शर्मा और उनकी पत्नी जसप्रीत प्रीति शाहिद पर प्रतिबंध लगाने का ऐलान किया है। अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि यह दंपत्ति फर्जी समुद्री पंजीकरण और प्रमाण-पत्रों के जरिए ईरान को अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचने और अपना तेल निर्यात जारी रखने में मदद कर रहा था। इस कार्रवाई में दो अन्य भारतीय नागरिकों अश्वनी कुमार धीमान और इश्विंदर सिंह को भी प्रतिबंधित किया गया है।

अमेरिकी वित्त विभाग ने बुधवार (4 नवंबर) को इन प्रतिबंधों की घोषणा की। विभाग के मुताबिक, धीमान और सिंह सुनील शर्मा से जुड़ी कंपनियों में निदेशक के तौर पर शामिल थे। इस कार्रवाई में भारत में पंजीकृत आठ और सिंगापुर में पंजीकृत एक संस्था को भी प्रतिबंधित किया गया है। इसके अलावा तुर्की की एक कंपनी पर अलग से कार्रवाई की गई है।

फर्जी समुद्री दस्तावेजों से ईरान के 'शैडो फ्लीट' को मदद पहुंचाने का आरोप

अमेरिकी वित्त विभाग के मुताबिक, सुनील शर्मा और उनकी पत्नी चंडीगढ़ से अपना नेटवर्क संचालित कर रहे थे। इस नेटवर्क पर अलग-अलग देशों के समुद्री नियामक संस्थानों को धोखा देकर फर्जी जहाज पंजीकरण और समुद्री वर्गीकरण सेवाएं तैयार करने का आरोप है। इन दस्तावेजों के जरिए ईरानी तेल ले जाने वाले जहाजों को दूसरे देशों के झंडे और प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराए जाते थे, ताकि उनकी असली पहचान और मालिकाना हक छिपाया जा सके।

अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि दंपत्ति की ये गतिविधियां वर्ष 2014 से चल रही थीं। उस समय उन्होंने कैरेबियाई देश डोमिनिका के जहाज पंजीकरण प्राधिकरण की नकल करने की कोशिश की थी। इसके बाद वर्ष 2023 में सुनील शर्मा ने सिंगापुर में 'एस्वातिनी मैरीटाइम अफेयर्स एंड इंटरनेशनल शिप रजिस्ट्री' नाम से एक कंपनी स्थापित की। अमेरिकी वित्त विभाग के अनुसार, एस्वातिनी सरकार द्वारा सार्वजनिक रूप से इस कंपनी से अपना संबंध खारिज किए जाने के बावजूद यह ईरानी तेल ले जाने वाले जहाजों को पंजीकरण सेवाएं देती रही। इनमें प्रतिबंधित जहाज 'पिंग शुन' भी शामिल है।

अमेरिकी विभाग के अनुसार, सुनील शर्मा भारत स्थित कंपनी 'ओशनीक टेक्नोलॉजीज इंडिया' के प्रबंध निदेशक हैं। इस कंपनी के जरिए कथित तौर पर अरूबा, निकारागुआ और सिंट मार्टेन के नाम पर फर्जी जहाज पंजीकरण सेवाएं चलाई गईं। इन फर्जी रजिस्ट्रियों के माध्यम से ईरानी पेट्रोलियम उत्पाद ले जाने वाले कई प्रतिबंधित जहाजों को दूसरे देशों के झंडे उपलब्ध कराए गए। इनमें लत्ताफा, बाइनरी स्टार और वेरा नाम के जहाज शामिल हैं।

वहीं, अमेरिकी वित्त विभाग का आरोप है कि सुनील शर्मा की गतिविधियों पर सवाल उठने के बाद उनकी पत्नी जसप्रीत प्रीति शाहिद ने कारोबारी नेटवर्क से जुड़ी कई कंपनियों का प्रबंधन संभाल लिया। प्रतिबंधित संस्थाओं में सिंगापुर की एस्वातिनी मैरीटाइम अफेयर्स एंड इंटरनेशनल शिप रजिस्ट्री के अलावा भारत की ओशनीक टेक्नोलॉजीज इंडिया, आर्यावर्त शिप मैनेजमेंट, प्रीसेप्ट ट्रेंड्स, पॉलीनेशिया मैरीटाइम, एलेक्सार्या फिनसर्व, एलेक्सार्या मीडिया एंड एंटरटेनमेंट, विहाराबोटिंग और आर्यावर्त मैरीटाइम एंड एजुकेशनल ट्रस्ट शामिल हैं।

तुर्की की कंपनी और 6 ईरानी एयरलाइंस भी अमेरिकी निशाने पर

अमेरिका ने इस कार्रवाई में तुर्की की कंपनी 'फ्यूगो ग्राउंड सर्विसेज' को भी प्रतिबंधित किया है। अमेरिकी वित्त विभाग का आरोप है कि यह कंपनी अमेरिका के प्रतिबंधों का सामना कर रही छह ईरानी एयरलाइंस को ग्राउंड-हैंडलिंग और अन्य सेवाएं उपलब्ध करा रही थी। इन एयरलाइंस में ईरान एयर टूर, साहा एयरलाइंस, सेपेहरान एयरलाइंस, वारेश एयरलाइंस, तबान एयरलाइंस और अता एयरलाइंस शामिल हैं।

यह कार्रवाई अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' का हिस्सा है। इस अभियान का मकसद ईरान की तेल से होने वाली कमाई रोकना और प्रतिबंधों से बचने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे नेटवर्क को निशाना बनाना है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने प्रतिबंधों की घोषणा करते हुए ईरान का समर्थन करने वाले लोगों और कंपनियों को कड़ी चेतावनी दी।

बेसेंट ने कहा, "जैसा कि हमने कई बार कहा है, ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट के तहत आप या तो हमारे साथ हैं या हमारे खिलाफ।" उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका को पता है कि ऐसे लोग कहां हैं और ईरानी शासन का समर्थन जारी रखने वालों पर कार्रवाई की जाएगी, चाहे वे जमीन, समुद्र या हवा के रास्ते ऐसा कर रहे हों।

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