ईरान ने अमेरिका के नवीनतम युद्धविराम प्रस्ताव को खारिज कर दिया है और कहा कि वह युद्ध का स्थायी अंत चाहता है। यह जानकारी ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए ने दी।यह खबर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा तेहरान को होर्मुज जलडमरुमध्य खोलने के लिए ईरान को दी गई समयसीमा नजदीक आने से ठीक पहले आयी है। ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि वह या तो निर्धारित समयसीमा के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य खोले या बिजली संयंत्रों और पुलों पर हमले का सामना करने के लिए तैयार रहे।
समाचार एजेंसी ने बताया कि ईरान ने पाकिस्तान के माध्यम से अमेरिका को अपना जवाब दे दिया है। काहिरा स्थित ईरानी राजनयिक मिशन के प्रमुख मोजतबा फरदौसी पोर ने सोमवार को ‘एसोसिएटेड प्रेस’ को बताया, “हम केवल युद्धविराम स्वीकार नहीं करेंगे। हम युद्ध की समाप्ति तभी स्वीकार करेंगे जब हमें यह गारंटी दी जाए कि हम पर दोबारा हमला नहीं किया जाएगा।” फरदौसी पोर ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरानी और ओमानी अधिकारी जहाजरानी के इस महत्वपूर्ण मार्ग के प्रशासन हेतु एक तंत्र विकसित करने पर काम कर रहे हैं।
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इजरायल ने युद्धविराम की चर्चाओं के बीच सोमवार को ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड पर एक बार फिर हमला किया। साउथ पार्स दुनिया की सबसे बड़ी गैस फील्ड है और ये ईरान-कतर के बीच फैली हुई है। इजरायल ने हमले की पुष्टि की, जिसके बाद ईरान ने कहा कि प्लांट में लगी आग को बुझाकर नुकसान का जायजा लिया जा रहा है। फार्स मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल के हमले का शिकार हुए एक पेट्रोकेमिकल प्लांट में लगी आग पर काबू पा लिया गया है। इससे पहले एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि असलूयेह में साउथ पार्स पेट्रोकेमिकल प्लांट से "कई धमाकों" की आवाजें सुनी गई थीं।
जारी संघर्ष के बीच इस गैस फील्ड पर इजरायल का ये दूसरा हमला है। इससे 20 दिन पहले 18 मार्च को भी इस गैस फील्ड को निशाना बनाया गया था। हमले के बाद इजरायली रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने दावा किया कि आईडीएफ के हमले से ईरान का सबसे बड़ा पेट्रोकेमिकल प्लांट बंद हो गया है। वहीं, इजरायल के सैन्य प्रवक्ता, लेफ्टिनेंट कर्नल नादाव शोशानी ने भी कहा कि शांति वार्ता के बीच भी ईरान को "कोई छूट नहीं" मिलेगी।
शांति वार्ता के बीच हुए हमले पर फिलहाल व्हाइट हाउस की ओर से कोई बयान नहीं आया। हालांकि मार्च में साउथ पार्स पर इजरायल के हमले के बाद, ट्रंप ने कहा था कि इजरायल इस पर दोबारा हमला नहीं करेगा, लेकिन चेतावनी दी थी कि अगर ईरान कतर के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमले जारी रखता है, तो संयुक्त राज्य अमेरिका जवाबी कार्रवाई करेगा और उस पूरे क्षेत्र को "पूरी तरह से उड़ा देगा।"
तेहरान के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने की ट्रंप की डेडलाइन नजदीक है। मध्यस्थ अमेरिका और ईरान को एक नए सीजफायर प्रस्ताव पर राजी करने की कोशिश में लगे हैं। इस बीच तेहरान में रविवार रात से सोमवार तड़के तक बमबारी होती रही। स्टेट मीडिया के अनुसार घंटों तक जेट विमानों की आवाजें सुनाई दीं जो काफी नीचे उड़ रहे थे। एक हवाई हमले में शरीफ यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी के परिसर को भी निशाना बनाया गया। वहीं शहर के आजादी चौक के पास आसमान में काला घना धुआं उठता भी देखा गया।
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ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की खुफिया विंग के प्रमुख मेजर जनरल खदेमी की इजरायल के हमले में मौत हो गई है। ईरानी स्टेट मीडिया ने बयान जारी कर इसकी पुष्टि की। ईरान ने इस हमले के लिए अमेरिका और इजरायल को जिम्मेदार ठहराते हुए इसे देश को अस्थिर करने की साजिश करार दिया है। आईआरजीसी के जनसंपर्क विभाग ने सोमवार को घोषणा की।
बयान के अनुसार, मेजर जनरल खादेमी ने खुफिया और सुरक्षा क्षेत्रों में क्रांति, शासन और इस्लामी मातृभूमि की लगभग आधी सदी तक ईमानदारी और साहस के साथ रक्षा करते हुए महत्वपूर्ण, स्थायी और अनुकरणीय योगदान दिया है। तस्नीम न्यूज एजेंसी ने खदेमी की मौत को क्रांति की हत्या बताते हुए एक्स पोस्ट में बताया कि ब्रिगेडियर खदेमी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की खुफिया शाखा के शक्तिशाली और शिक्षित प्रमुख सोमवार सुबह एक अमेरिकी-इजरायली हमले में शहीद हो गए। ईरान ने खदेमी की मौत को बड़ा नुकसान बताते हुए कहा कि उनकी विरासत देश की सुरक्षा नीतियों को आगे भी दिशा देती रहेगी। उनके अंतिम संस्कार को लेकर जल्द ही आधिकारिक घोषणा की जाएगी।
वहीं, इजरायली रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने भी खुफिया प्रमुख खदेमी के मारे जाने की पुष्टि करते हुए अपनी सैन्य बल की तारीफ की। द टाइम्स ऑफ इजरायल ने रक्षा मंत्री का बयान प्रकाशित किया, जिसके मुताबिक आईडीएफ चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल आयल जमीर के साथ "एक समीक्षा बैठक के दौरान इस हमले की जानकारी दी गई थी।"
ईरान के शीर्ष अधिकारियों की मौत की पुष्टि की यह एक नई श्रृंखला है। 28 फरवरी से शुरू हुए संघर्ष के एक महीने से ज्यादा बीत गए हैं। यूएस-इजरायल के पहले हवाई हमले में ही ईरानी सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई की मौत हो गई। उनके साथ कई कमांडर्स भी मारे गए। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रमुख अली लारीजानी, नौसेना कमांडर अलीरेजा तंगसीरी ब्रिगेडियर जनरल और चीफ ऑफ द जनरल स्टाफ के सलाहकार जमशेद इशाकी समेत तमाम बड़े नाम मारे गए दिग्गजों की लिस्ट में शामिल हैं।
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अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ 25वां अमेंडमेंट लागू करने की मांग हो रही है। दरअसल, ये पूरा मामला उस पोस्ट से जुड़ा है, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईस्टर की सुबह ईरान को टारगेट करते हुए अपशब्दों से भरा एक ट्रूथ सोशल पोस्ट किया था। इसके बाद अमेरिकी लॉमेकर्स उनके खिलाफ 25वां अमेंडमेंट लागू करने की मांग कर रहे हैं। अमेरिकी कांग्रेस के लोगों का कहना है कि ट्रंप शायद मानसिक तौर पर ठीक नहीं हैं।
कनेक्टिकट से डेमोक्रेटिक सीनेटर क्रिस मर्फी ने एक्स पर लिखा, “अगर मैं ट्रंप की कैबिनेट में होता, तो मैं ईस्टर पर कॉन्स्टिट्यूशनल वकीलों को 25वें संशोधन के बारे में बताता।” डेमोक्रेटिक रिप्रेजेंटेटिव यासमीन अंसारी ने भी पोस्ट किया, “25वां अमेंडमेंट किसी वजह से है।” उनके एक्स पोस्ट को वेरिफाइड ओवरसाइट डेम्स अकाउंट ने शेयर किया था। एमएसएनबीसी के पूर्व होस्ट मेहदी हसन ने लिखा, “राष्ट्रपति का ईस्टर मैसेज, जिससे वीपी और कैबिनेट को सच में 25वां संशोधन लागू करना चाहिए।”
डेमोक्रेटिक रिप्रेजेंटेटिव मेलानी स्टैंसबरी की एक और अपील में कहा गया, “सम्राट के पास कपड़े नहीं हैं। 25वें संशोधन का समय आ गया है। कांग्रेस और कैबिनेट को कार्रवाई करनी चाहिए।” ट्रंप की पुरानी फैन मार्जोरी टेलर ग्रीन ने एक लंबा पोस्ट शेयर किया जिसमें उन्होंने अमेरिकी सरकार से ट्रंप के पागलपन में दखल देने की अपील की। उन्होंने कहा, "मैं आप सभी को और उन्हें जानती हूं। वो पागल हो चुके हैं और आप सभी इसमें शामिल हैं।" व्हाइट हाउस के रिपोर्टर एसवी डेट ने कहा, "'वह पागल हो चुके हैं।' यह 25वें संशोधन का क्षेत्र होगा।" ट्रंप के विरोधी और पुराने कांग्रेसी जो वॉल्श ने कहा, “उनकी ईस्टर की सुबह की पोस्ट। और सिर्फ 2 दिन पहले, उनके एक ‘धार्मिक सलाहकार’ ने उनकी तुलना ईसा मसीह से की थी। वह हमेशा इस देश और दुनिया पर भी एक दाग रहेंगे। अभी 25वां संशोधन हो।”
इसी तरह, ट्रंप के पहले कार्यकाल में ऐतिहासिक 11 दिनों के लिए व्हाइट हाउस कम्युनिकेशंस डायरेक्टर रह चुके एंथनी स्कारामुची ने लिखा, “यही वह समय था जब हमारे फाउंडर्स ने सोचा कि सबसे अच्छा यही होगा कि एक पागल आदमी को हटा दिया जाए जिसके पास एग्जीक्यूटिव ऑफिस है। 25वें संशोधन के साथ यह और ज्यादा औपचारिक हो गया, लेकिन अब ज्यादा लोगों को इस आदमी को हटाने की मांग करनी चाहिए।”
दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति के जिस पोस्ट को लेकर इतना बवाल मचा है, उसमें उन्होंने ईरान के लिए मंगलवार तक की चेतावनी जारी करते हुए ट्रूथ सोशल पर लिखा, "ईरान में मंगलवार का दिन 'पावर प्लांट' और 'ब्रिज डे' के रूप में जाना जाएगा, जो अपनी तरह का अनोखा होगा। मूर्ख लोगों, इस जलमार्ग (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) को तुरंत खोलो, वरना नरक जैसी स्थिति झेलने के लिए तैयार रहो-बस देखते जाओ! खुदा की जय हो।" बता दें, अमेरिका का 25वां संशोधन एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें उपराष्ट्रपति और कैबिनेट के ज्यादातर लोग अपनी ड्यूटी न कर पाने की वजह से राष्ट्रपति को बदलने का विकल्प चुन सकते हैं और फिर उपराष्ट्रपति प्रेसिडेंट की भूमिका निभाते हैं।
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ईरान ने सोमवार को चेतावनी दी कि अगर उसके नागरिक ठिकानों पर और हमला हुआ तो उसकी प्रतिक्रिया 'कहीं अधिक विनाशकारी' और व्यापक होगी। खतम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के एक प्रवक्ता ने कहा, ''अगर नागरिक ठिकानों पर हमले दोहराए जाते हैं, तो हमारे आक्रामक और जवाबी अभियानों के अगले चरण कहीं अधिक विनाशकारी और व्यापक होंगे।'' इससे पहले, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने धमकी दी थी कि अगर होर्मुज स्ट्रेट बंद रहा तो वह ईरान के नागरिक बुनियादी ढांचे को नष्ट कर देंगे।
सिन्हुआ न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, एक अन्य घटनाक्रम में ईरान के सुप्रीम लीडर के सलाहकार अली अकबर वेलयाती ने रविवार को चेतावनी दी कि रेजिस्टेंस फ्रंट बाब-अल-मंडेब स्ट्रेट को निशाना बना सकता है। वेलयाती ने सोशल मीडिया पर कहा, "अगर व्हाइट हाउस अपनी मूर्खतापूर्ण गलतियों को दोहराने के बारे में सोचता है, तो वह जल्द ही समझ जाएगा कि वैश्विक ऊर्जा और व्यापार का प्रवाह एक संकेत भर से बाधित किया जा सकता है।" उन्होंने पानी के रास्ते के संभावित बंद होने का इशारा किया। लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ने वाला बाब अल-मंडेब स्ट्रेट, अटलांटिक, हिंद महासागर और भूमध्य सागर के बीच शिपिंग के लिए एक अहम पॉइंट है।
इससे पहले द वॉल स्ट्रीट जर्नल को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने संकेत दिया कि अगर तेहरान अमेरिका की मांगें नहीं मानता है, तो ईरानी इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़े पैमाने पर हमले हो सकते हैं। ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर ईरान तय समय में कार्रवाई करने में नाकाम रहता है, तो उसके पावर प्लांट और पुलों सहित जरूरी एसेट्स को बड़े पैमाने पर नुकसान हो सकता है। ट्रंप ने कहा, "अगर वे मंगलवार शाम तक कुछ नहीं करते हैं, तो उनके पास कोई पावर प्लांट नहीं होगा, और उनके पास कोई पुल भी नहीं होगा।" उन्होंने कहा कि ईरान पूरे देश में मौजूद हर पावर प्लांट और हर दूसरे प्लांट को खो सकता है, जो संभावित हमलों के पैमाने को दिखाता है। यह टिप्पणी होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ते तनाव के बीच आई है, जो एक जरूरी ग्लोबल ऑयल रूट है।
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