
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने दावा किया है कि अमेरिका ने तेहरान के प्रस्ताव को मान लिया है और इसके साथ ही कुछ और शर्तें जोड़ने का अनुरोध भी किया है।
ईरानी समाचार एजेंसी आईआरएनए की रिपोर्ट के अनुसार, अराघची ने कहा कि ईरान के सात-दिवसीय प्रस्ताव को अमेरिका मानने के लिए तैयार हो गया है, लेकिन उसने इसमें कुछ और शर्तें जोड़ने का अनुरोध किया है।
'अल-एखबरिया' टेलीविजन नेटवर्क को दिए एक इंटरव्यू के हवाले से एजेंसी ने इसकी जानकारी दी। अराघची ने पुष्टि की कि दोनों पक्षों के बीच राजनयिक बातचीत अभी भी जारी है।
उन्होंने कहा, "हमने पहले अमेरिकी पक्ष के सामने 'सात-दिवसीय योजना' प्रस्ताव रखा था, जिसमें हमने अपनी शर्तें स्पष्ट रूप से बता दी थीं। इस योजना की शर्त के मुताबिक छठे दिन 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (होर्मुज जलडमरूमध्य) को पूरी तरह से फिर से खोल दिया जाना था। अमेरिकियों ने हमें बताया कि वे इन शर्तों को मानने के लिए तैयार हैं, लेकिन वे इसमें कुछ और शर्तें भी जोड़ना चाहते हैं।"
अराघची ने दोहराया कि जब तक कोई समझौता या सहमति नहीं बन जाती, तब तक होर्मुज को सभी के लिए पूरी तरह से नहीं खोला जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा, "जहाजों और पोतों की आवाजाही के लिए वाशिंगटन को ईरान की शर्तें माननी होंगी।"
उन्होंने चेतावनी दी कि तब तक, इस स्ट्रेट और इसके मौजूदा रास्तों से होने वाले समुद्री यातायात में मुश्किलें बनी रहेंगी।
लाल सागर की घटनाओं में ईरान की संलिप्तता के आरोपों को विदेश मंत्री ने सिरे से खारिज किया। उन्होंने तेहरान और लाल सागर (हूती) मामले के बीच किसी भी तरह के संबंध से इनकार कर दिया।
यूनान की राजधानी एथेंस की सड़कों पर छात्रों के लिए किफायती आवास और शिक्षा के क्षेत्र में सरकारी निवेश बढ़ाने की मांग को लेकर बुधवार को हजारों छात्रों व शिक्षकों ने मार्च निकाला।
इसके साथ ही यूरोप भर में जारी विरोध-प्रदर्शनों के सिलसिले का अब और भी विस्तार हो गया है।
यूनान के कई शहरों में इसी तरह के विरोध-प्रदर्शन हो रहे थे, जिनमें उत्तर में स्थित थेसालोनिकी और पश्चिमी बंदरगाह शहर पात्रास शामिल हैं।
जीवन-यापन की बढ़ती लागत (जिसमें ईंधन की बढ़ती कीमतें भी शामिल हैं), स्कूलों की खराब स्थिति और छात्रों के लिए किफायती आवास की कमी को लेकर लोगों में गुस्सा है। इसी वजह से पूरे यूरोप में विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। फ्रांस, इटली और अल्बानिया में होने वाले प्रदर्शनों के दौरान तो हिंसा की घटनाएं भी सामने आई हैं।
एथेंस के विरोध-प्रदर्शन के दौरान एक बैनर पर लिखा था, “यूनान से लेकर फ्रांस तक, शिक्षा के लिए पैसे दें”।
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन में युद्ध खत्म करने के लिए अमेरिका और यूक्रेन के साथ बातचीत फिर से शुरू करने पर बुधवार को सहमति जताई। क्रेमलिन के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।
पुतिन के विदेश मामलों के सलाहकार यूरी उशाकोव ने रूस के राष्ट्रपति और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूत स्टीव विटकॉफ के बीच हुई बैठक के बाद पत्रकारों को बताया कि पुतिन 10 नवंबर के बाद तीनों देशों के बीच बातचीत फिर से शुरू करने के लिए सैद्धांतिक रूप से सहमत हुए हैं।
अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ ने बुधवार को कहा कि यूक्रेन में भाड़े के सैनिक के रूप में लड़ने के आरोप में जेल में बंद किये गये एक सेवानिवृत्त अमेरिकी शिक्षक को रूस ने रिहा कर दिया है।
विटकॉफ ने सेंट पीटर्सबर्ग में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बैठक के दौरान यह जानकारी दी।
मिशिगन के रहने वाले स्टीफन हबर्ड को 2024 में हुई सुनवाई के बाद लगभग सात साल जेल की सजा सुनाई गई थी।
अभियोजन पक्ष ने कहा कि फरवरी 2022 में रूस द्वारा यूक्रेन में सैनिक भेजे जाने के बाद हबर्ड ने यूक्रेनी सेना के साथ एक अनुबंध किया था। इसके बाद वह उनके साथ मिलकर लड़ा, लेकिन दो महीने बाद उसे पकड़ लिया गया।
बाइडन प्रशासन के दौरान अमेरिकी सरकार ने हबर्ड को गलत तरीके से हिरासत में लिया गया व्यक्ति घोषित किया था।
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने लोगों से भ्रष्टाचार, कुशासन, सरकारी कामकाज में देरी, असमानता और राजनीतिक अव्यवस्था के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान करते हुए बुधवार को कहा कि देश में सार्थक बदलाव लाने के लिए सामूहिक प्रयासों के साथ-साथ सोच और व्यवहार में बदलाव भी जरूरी है।
शाह ने नेपाल के सबसे महत्वपूर्ण त्योहार बड़ा दशैं या विजयादशमी के अवसर पर शुभकामनाएं देते हुए ऐसा माहौल बनाने का आह्वान किया, जिसमें हर नागरिक को यह महसूस हो कि सरकार उसकी सेवा के लिए है।
प्रधानमंत्री ने नेपाल के लोगों से बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक विजयादशमी से प्रेरणा लेकर भ्रष्टाचार, कुशासन, सरकारी कामकाज में देरी, असमानता और राजनीतिक विकृतियों के खिलाफ लड़ने की अपील की।
शाह ने कहा, ‘‘हमें इन बुराइयों को खत्म करने के लिए एकजुट होना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हर नागरिक को महसूस हो कि सरकार उसके लिए है। हम इन समस्याओं पर ईमानदार प्रयासों, दृढ़ संकल्प और मिलकर की गई मेहनत से काबू पा सकते हैं। बदलाव लाने के लिए हमें न केवल अपनी सोच, बल्कि अपना व्यवहार भी बदलना होगा।’’
उन्होंने लोगों से हिंसा और भेदभाव से दूर रहने की अपील करते हुए कहा कि देश के सामने मौजूद चुनौतियों से निपटने के लिए सद्भावना, आपसी सम्मान और सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।
शाह ने कहा कि दशैं का त्योहार विभिन्न वर्गों, समुदायों और क्षेत्रों के लोगों को एक साथ लाता है तथा भौगोलिक, सांस्कृतिक और भाषाई विविधताओं वाले नेपाल में एकता एवं सद्भाव को मजबूत करता है।
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