
अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध-विराम को लेकर हुए अंतरिम समझौते के विफल होने के बाद तेहरान के एक शीर्ष अधिकारी ने मंगलवार को पाकिस्तान में मध्यस्थों के साथ बातचीत शुरू की। वहीं, दोनों देशों के बीच नए सिरे से शुरू हुई लड़ाई के लगातार 10वें दिन भी हमले जारी रहे।
ईरान के गृह मंत्री इस्कंदर मोमेनी का पाकिस्तान का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब पिछले कुछ दिनों से अंतरिम समझौते को फिर से पटरी पर लाने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज हुए हैं। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि युद्ध खत्म करने के लिए कोई नया समझौता हो सकेगा या नहीं।
ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में मंगलवार सुबह एक टैंकर पर हमला किया, जिसके बाद चालक दल ने जहाज को छोड़ दिया। वहीं, इस अहम जलमार्ग पर नियंत्रण को लेकर जारी संघर्ष के बीच अमेरिका ने ईरान को निशाना बनाते हुए एक और हवाई हमला किया।
अमेरिका के लगातार हवाई हमलों के बावजूद जलडमरूमध्य पर ईरान का नियंत्रण कमजोर नहीं हुआ है। युद्ध से पहले, वैश्विक स्तर पर कारोबार होने वाले कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी संकरे जलमार्ग से होकर गुजरता था।
ईरान ने पश्चिम एशिया में अमेरिका के सहयोगी देशों पर भी हमले जारी रखे। मंगलवार दोपहर बहरीन और कुवैत में मिसाइल और अन्य हवाई हमले की चेतावनी वाले सायरन सुनाई दिये।
हाल के हफ्तों में तनाव बढ़ने से तेल की कीमतें बढ़ गई हैं। मंगलवार को ‘बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड’ की कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रही और अमेरिका में नियमित गैसोलीन की कीमत औसतन चार डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई, जिससे इस बार के मध्यावधि चुनाव से पहले अमेरिकी उपभोक्ताओं की जेब पर दबाव बढ़ गया है।
अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी नागरिकों के लिए जारी एक नयी चेतावनी में कहा, ‘‘ईरान और ईरान का समर्थन करने वाले समूह विदेश में अमेरिका के अन्य हितों या दुनिया भर में अमेरिका और अमेरिकियों से जुड़ी जगहों को निशाना बना सकते हैं।’’
दो अधिकारियों ने पहचान गुप्त रखते हुए बताया कि ईरान के गृह मंत्री मोमेनी ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर से मुलाकात की। बाद में मोमेनी ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से भी मुलाकात की।
अधिकारियों ने बैठक के बारे में फिलहाल कोई जानकारी साझा नहीं की। यह मुलाकात ऐसे समय हुई जब ईरान ने अमेरिका के सहयोगी अरब देशों पर अपने हमले जारी रखे।
ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में मंगलवार सुबह एक टैंकर पर हमला किया, जिसके बाद चालक दल ने जहाज को छोड़ दिया। वहीं, इस अहम जलमार्ग पर नियंत्रण को लेकर जारी संघर्ष के बीच अमेरिका ने ईरान को निशाना बनाते हुए एक और हवाई हमला किया।
लगातार 10 रातों से जारी अमेरिका के हवाई हमलों के बावजूद ईरान ने जलडमरूमध्य पर अपनी पकड़ ढीली नहीं की है। शांतिकाल के दौरान वैश्विक स्तर पर कारोबार होने वाले कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी संकरे जलमार्ग से होकर गुजरता था।
अमेरिका और ईरान के बीच फिर से पूर्ण युद्ध का खतरा बढ़ने के बीच ईरान के गृह मंत्री बातचीत के लिए पाकिस्तान पहुंचे। पाकिस्तान इस विवाद में अहम मध्यस्थ माना जाता है। हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि युद्ध खत्म करने के लिए कोई नया समझौता हो सकेगा या नहीं।
दोनों देशों के बीच पिछले महीने हुआ अस्थायी समझौता अब टूट चुका है। वहीं, होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही भी लगभग रुक गई है।
लड़ाई तेज होने के साथ दोनों पक्षों ने ऐसे नागरिक बुनियादी ढांचे को भी निशाना बनाया है, जिस पर लाखों लोगों का जीवन निर्भर है।
अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी नागरिकों के लिए जारी एक नयी चेतावनी में कहा, ‘‘ईरान और ईरान का समर्थन करने वाले समूह विदेश में अमेरिका के अन्य हितों या दुनिया भर में अमेरिका और अमेरिकियों से जुड़ी जगहों को निशाना बना सकते हैं।’’
हाल के हफ्तों में तनाव बढ़ने से तेल की कीमतें बढ़ गई हैं। मंगलवार को ‘बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड’ की कीमत 88 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रही और अमेरिका में नियमित गैसोलीन की कीमत औसतन चार डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई, जिससे इस बार के मध्यावधि चुनाव से पहले अमेरिकी उपभोक्ताओं की जेब पर दबाव बढ़ गया है।
इस बीच, अमेरिकी सेना ने जॉर्डन में हुए हमलों में मारे गए दो सैनिकों की पहचान की है। इस हमले एक अन्य व्यक्ति लापता हो गया था। इसके अलावा, सेना ने शनिवार को इराक में एक ईरानी ड्रोन को मार गिराने के बाद उसे नियंत्रित तरीके से नष्ट करने की प्रक्रिया के दौरान एक और सैनिक की मौत की पुष्टि की।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को सोशल मीडिया पर चेतावनी दी, ‘‘जब भी ईरान किसी अमेरिकी सैनिक की हत्या करेगा, तो उसे इस हत्या की भारी कीमत चुकानी पड़ेगी!’’
ट्रंप की मंगलवार शाम को डोवर वायु सेना अड्डे पर एक समारोह में शामिल होने की योजना थी, जहां कम से कम एक सैनिक का अवशेष पहुंचने वाला था।
अमेरिकी सेंट्रल कमान ने मंगलवार को कहा कि उसने ‘‘ईरान के सैन्य कमान केंद्रों , समुद्री क्षमता, मिसाइल और ड्रोन प्रक्षेपण स्थल और वायु रक्षा प्रणाली’’ को निशाना बनाया। उसने ईरान में इन स्थलों को निशाना बनाकर की गई बमबारी के और फुटेज जारी किए।
ईरान ने दारखोविन में निर्माणाधीन परमाणु ऊर्जा संयंत्र पर अमेरिकी हमले की निंदा की। ईरान के स्थायी मिशन ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि सुरक्षा निगरानी (सेफगार्ड) के तहत चल रहे शांतिपूर्ण परमाणु केंद्रों पर होने वाले हमलों के खिलाफ जीरो-टॉलरेंस की नीति अपनाई जाए।
ईरान की समाचार एजेंसी आईआरएनए की रिपोर्ट के अनुसार, "दारखोविन परमाणु ऊर्जा संयंत्र ईरान की बड़ी नागरिक परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं में से एक है, जिसका उद्देश्य देश के बिजली ग्रिड के लिए बिजली पैदा करना है।" ईरान के अनुसार, 19 जुलाई रविवार को इस निर्माण स्थल पर अमेरिकी सेना ने हमला किया।
आईआरएनए की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को बताया कि 19 जुलाई की सुबह अमेरिका ने करुन (दारखोविन) परमाणु ऊर्जा संयंत्र के निर्माण स्थल पर कई मिसाइलें दागीं। ईरान ने कहा कि यह स्थल देश की वैज्ञानिक उपलब्धियों और तकनीकी आत्मनिर्भरता का प्रतीक है।
ईरान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से कहा है कि यह हमला अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है। ईरान का दावा है कि जून 2026 में अमेरिका और इजरायल की ओर से शुरू किए गए संयुक्त हमलों के बाद से उसके शांतिपूर्ण और अंतरराष्ट्रीय निगरानी में चल रहे परमाणु केंद्रों पर यह 18वां हमला है।
ईरान के अनुसार, इन हमलों का मकसद केवल उसकी नागरिक बुनियादी सुविधाओं को नष्ट करना है, क्योंकि उसने दबाव के आगे झुकने और 'बिना शर्त आत्मसमर्पण' करने से इनकार किया है।
आईआरएनए की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान की ओर से कहा गया कि इससे एक बार फिर साबित होता है कि परमाणु प्रसार को लेकर लगाए जाने वाले आरोप सिर्फ झूठ, भ्रामक जानकारी और असली उद्देश्यों को छिपाने का तरीका हैं।
ईरान का कहना है कि इस तरह के हमले अंतरराष्ट्रीय कानून के सबसे अहम सिद्धांतों का गंभीर उल्लंघन हैं और बेहद चिंता की बात यह है कि शांतिपूर्ण परमाणु केंद्रों पर हमले अब धीरे-धीरे सामान्य होते जा रहे हैं। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि संबंधित अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं अपना काम प्रभावी ढंग से नहीं कर पा रही हैं।
आईआरएनए के अनुसार, ईरान ने कहा कि अगर ऐसे हमलों पर चुप्पी साधी जाती है या कोई कार्रवाई नहीं होती, तो इससे हमलावर देशों का हौसला बढ़ता है और वे आगे भी ऐसे कदम उठाने के लिए प्रोत्साहित होते हैं। ईरान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से कहा है कि अगर यह रुझान जारी रहा तो दुनिया भर में आर्थिक विकास पर असर पड़ेगा, क्योंकि देशों का शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए परमाणु विज्ञान और तकनीक के इस्तेमाल पर भरोसा कमजोर होगा।
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