
लेबनान पर इजरायल के ताबड़तोड़ हमले के बाद ईरान ने होर्मुज को लेकर बड़ा फैसला किया है। स्थानीय मीडिया के अनुसार जवाबी कार्रवाई के तहत होर्मुज स्ट्रेट से तेल टैंकरों के गुजरने पर रोक लगा दी है।
दूसरी ओर हिज्बुल्लाह ने भी चेतावनी दी कि अगर सीजफायर में लेबनान को शामिल नहीं किया गया, तो "समझौता टूट सकता है।" संगठन का कहना है कि अगर इजरायल ने हमले जारी रखे, तो जवाब दिया जाएगा।
ब्रिटिश अखबार द गार्डियन के अनुसार, कई शिपिंग सोर्स के मुताबिक, ईरानी नेवी ने तेहरान की इजाजत के बिना होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की कोशिश करने वाले जहाजों को तबाह करने की धमकी दी है, और यह भी कहा है कि पानी के रास्ते से ट्रांजिट बंद रहेगा।
मैसेज में कहा गया, “समुद्र में जाने की कोशिश करने वाले किसी भी जहाज को... टारगेट करके तबाह कर दिया जाएगा।”
ईरान की फार्स न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, लेबनान में इजरायली हमलों के जवाब में ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से तेल टैंकरों के गुजरने पर रोक लगा दी है।
फार्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान और यूएस के बीच सीजफायर लागू होने के बाद आज सुबह दो तेल टैंकरों को स्ट्रेट से गुजरने दिया गया। एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, “लेबनान पर इजरायली हमलों के साथ ही, होर्मुज स्ट्रेट से तेल टैंकरों का गुजरना रोक दिया गया है।”
इस बीच इजरायली रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने एक वीडियो बयान जारी कर लेबनान पर 'सरप्राइज अटैक' की जानकारी दी। काट्ज ने कहा कि मिलिट्री ने बुधवार को लेबनान में सैकड़ों हिज्बुल्लाह सदस्यों को टारगेट किया।
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अमेरिका ने दावा किया है कि ईरान में नेतृत्व में आए बदलाव के बाद उसकी बातचीत की रणनीति में बड़ा परिवर्तन देखने को मिला है। अमेरिकी ‘सेक्रेटरी ऑफ वॉर’ पीट हेगसेथ ने कहा कि लगातार अमेरिकी सैन्य दबाव के चलते तेहरान में “नया नेतृत्व” अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करने को मजबूर हुआ है।
हेगसेथ ने कहा, “यह नया नेतृत्व अब हमारे साथ बातचीत को लेकर नई सोच के साथ आगे बढ़ रहा है।” उन्होंने इस बदलाव को ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के दौरान हुए भारी सैन्य नुकसान से जोड़ा।
उन्होंने बताया कि मौजूदा नेतृत्व ऐसे समय में उभरा है जब ईरान के कई शीर्ष सैन्य और राजनीतिक अधिकारी मारे गए या निष्क्रिय हो गए। उन्होंने कहा, “अब जो लोग नेतृत्व में हैं, उन्होंने अमेरिकी सेना की पूरी ताकत देख ली है।”
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यही कारण है कि ईरान युद्धविराम के लिए तैयार हुआ और बातचीत की मेज पर आया। हेगसेथ ने कहा, “इसी वजह से वे बातचीत के लिए आए, ताकि गोलीबारी रुके।”
पेंटागन की ब्रीफिंग में बताया गया कि इस सैन्य अभियान के दौरान ईरान के सैन्य, खुफिया और रक्षा ढांचे के कई वरिष्ठ अधिकारी या तो मारे गए या अक्षम हो गए, जिससे नेतृत्व में बड़ा बदलाव आया।
हेगसेथ ने कहा कि नए नेतृत्व के पास अब विकल्प सीमित हैं। यह नया नेतृत्व विकल्प और समय- दोनों से वंचित है, इसलिए उन्हें समझौता करना पड़ा।
अमेरिका ने इस बदलाव को औपचारिक राजनीतिक परिवर्तन नहीं, बल्कि युद्ध में हुए नुकसान का परिणाम बताया, जिसने तेहरान की निर्णय प्रक्रिया को प्रभावित किया है।
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अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने बुधवार को कहा कि अगर ईरान संवर्द्धित यूरेनियम नहीं सौंपता है तो अमेरिका फिर से हमला कर सकता है।
हेगसेथ ने इस बारे में कोई विशेष जानकारी नहीं दी कि क्या ईरान ने ट्रंप के उस बयान से सहमति जताई है, जिसमें कहा गया था कि अमेरिका “दफन सामग्री को निकालने” के लिए उनके साथ मिलकर काम करेगा।
हालांकि, हेगसेथ ने कहा कि ईरान "स्वेच्छा से इसे हमें दे देगा," अन्यथा अमेरिका पिछले साल इजराइल के साथ मिलकर किए गए हमलों की तरह ही ईरान के परमाणु स्थलों पर हमला कर सकता है। उन्होंने कहा, ‘‘हम इस मौके का फायदा उठाएंगे।’’
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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा कि लेबनान को युद्धविराम समझौते में "हिज़्बुल्लाह की वजह से" शामिल नहीं किया गया है।
ट्रंप ने ‘पीबीएस न्यूज़ आवर’ के साथ एक संक्षिप्त टेलीफोन साक्षात्कार में कहा, "उन्हें समझौते में शामिल नहीं किया गया है। इसे भी ध्यान रखा जाएगा। सब ठीक है।"
जब उनसे लेबनान में इज़राइल द्वारा लगातार हमले जारी रखने के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, "यह समझौते का हिस्सा है - यह तो सभी जानते हैं। यह एक अलग झड़प है।"
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