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दुनिया की खबरें: मक्का क्षेत्र में ड्रोन भेजने के सऊदी गठबंधन के दावे को हूती ने किया खारिज, हमले से किया इनकार

हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरीया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में मक्का के ऊपर ड्रोन को रोके जाने के सऊदी दावे को 'झूठा' बताया। उन्होंने कहा कि समूह ने शुक्रवार को सऊदी अरब के क्षेत्र की ओर कोई सैन्य अभियान नहीं चलाया।

फोटो: IANS
फोटो: IANS 

यमन के हूती विद्रोही समूह ने शुक्रवार को सऊदी अरब पर किसी भी तरह का हमला करने से इनकार किया। यह बयान सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन की ओर से मक्का क्षेत्र में हूतियों के एक ड्रोन को रोककर नष्ट करने का दावा किए जाने के बाद आया है।

समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक, हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरीया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में मक्का के ऊपर ड्रोन को रोके जाने के सऊदी दावे को 'झूठा' बताया। उन्होंने कहा कि समूह ने शुक्रवार को सऊदी अरब के क्षेत्र की ओर कोई सैन्य अभियान नहीं चलाया।

इससे पहले सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के प्रवक्ता तुर्की अल-मलिकी ने एक्स पर जानकारी दी थी कि हूती समूह की ओर से भेजे गए एक ड्रोन को मक्का क्षेत्र में रोककर नष्ट कर दिया गया। मक्का में इस्लाम का सबसे पवित्र शहर स्थित है। पिछले कुछ हफ्तों में सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच सीमा पार हमलों में तेजी आई है। सऊदी अरब ने यमन के हूती नियंत्रित क्षेत्रों में हवाई हमले किए हैं, जबकि हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब की ओर मिसाइलें और ड्रोन दागे हैं।

यमन में दिसंबर 2014 से संघर्ष जारी है। उस समय हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना और उत्तरी यमन के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद यमन की सरकार के समर्थन में सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने 2015 में सैन्य हस्तक्षेप किया था।

इससे पहले सितंबर में भी हूती नेता अब्दुल-मलिक अल-हूती ने अपने संगठन पर मक्का को निशाना बनाने की कोशिश के आरोपों को खारिज किया था। उन्होंने सऊदी अरब के साथ बढ़ते तनाव के बीच इन आरोपों को 'मनगढ़ंत और भ्रामक जानकारी' करार दिया था।

हूती संचालित अल-मसीरा टीवी पर प्रसारित एक संबोधन में अल-हूती ने कहा था कि हूती बलों द्वारा मक्का को निशाना बनाए जाने का दावा झूठ है। उन्होंने आरोप लगाया था कि यमन पर सैन्य कार्रवाई के लिए व्यापक समर्थन जुटाने के उद्देश्य से इस तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं।

अल-हूती ने सऊदी अरब पर अपेक्षाकृत शांति के दौर में राजनीतिक समाधान की दिशा में आगे नहीं बढ़ने का भी आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि इसके बजाय हूती नियंत्रित क्षेत्रों पर प्रतिबंध और सख्त किए गए हैं। हवाई अड्डों के संचालन और आयात पर लगी पाबंदियां अब भी प्रमुख अनसुलझे मुद्दे हैं।

नेतन्याहू के बहुमत गंवाने के बाद इजराइल में सरकार गठन के लिए कठिन चुनौतियां

इजराइल के चुनाव के अंतिम नतीजों में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के गठबंधन को संसद में बहुमत नहीं मिलने के कारण अब अति-रूढ़िवादी यहूदी दलों से लेकर धर्मनिरपेक्ष और अरब नेतृत्व वाली पार्टियों तक के बीच मुश्किल बातचीत का दौर शुरू होगा।

शुक्रवार तड़के जारी नतीजों के अनुसार, मंगलवार को हुए चुनाव में नेतन्याहू के गठबंधन को 53 सीट मिलीं, जबकि मुख्य विपक्षी गठबंधन को 48 सीट हासिल हुईं। अरब-नेतृत्व वाली पार्टियों ने 19 सीट हासिल कीं, जो एक ऐतिहासिक प्रदर्शन है।

अब पार्टियों को आपस में बातचीत करनी होगी और 120 सीट वाली 'नेसेट' (संसद) में कम से कम 61 सीट का आंकड़ा जुटाने के लिए गठबंधन का रास्ता खोजना होगा। इजराइल के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहे नेतन्याहू अब भी सत्ता में बने हुए हैं।

मध्यमार्गी नेता यायर लैपिड ने ‘एक्स’ पर कहा, ‘‘अब असल मुश्किल दौर शुरू होता है।’’ उन्होंने धैर्य रखने की अपील करते हुए कहा, “अगर आप जानना चाहते हैं कि इस समय जो खामोशी है, उसके पीछे कुछ हो रहा है या नहीं, तो इसका जवाब हां है।” राष्ट्रपति किसी एक नेता को नयी सरकार बनाने की जिम्मेदारी सौंपेंगे।

अमेरिका में कोविड राहत राशि धोखाधड़ी के दोषी भारतीय मूल के अकाउंटेंट को 41 महीने की सजा

अमेरिका में भारतीय मूल के एक व्यक्ति को कोविड महामारी के दौरान धोखाधड़ी से राहत राशि हासिल करने और मादक पदार्थों की तस्करी से प्राप्त नकदी का धनशोधन करने के मामले में 41 महीने की सजा सुनाई गई है।

अकाउंटेंट अरुण मागो को अमेरिकी जिला न्यायाधीश रॉबर्ट पिटमैन ने बुधवार को ऑस्टिन में धोखाधड़ी और धनशोधन के आरोपों में दोषी ठहराए जाने के बाद सजा सुनाई।

अदालत ने मागो को नौ लाख अमेरिकी डॉलर से अधिक की राशि क्षतिपूर्ति के रूप में देने का आदेश भी दिया और उस पर ढाई लाख अमेरिकी डॉलर का जुर्माना लगाया।

अदालती दस्तावेजों के अनुसार, मागो ने अक्टूबर 2023 से जुलाई 2024 के बीच कोकीन तस्करी से प्राप्त 1.5 लाख अमेरिकी डॉलर की नकदी का धनशोधन किया।

इन अवैध लेनदेन के साथ-साथ मागो ने कोविड-19 महामारी के दौरान ऋण धोखाधड़ी को भी अंजाम दिया। इसके तहत उसने कई व्यावसायिक इकाइयों के माध्यम से ‘पेचेक प्रोटेक्शन प्रोग्राम’ (पीपीपी) और आर्थिक क्षति आपदा ऋण (ईआईडीएल) के तहत करीब 10 लाख अमेरिकी डॉलर हासिल किए।

आपातकालीन सहायता राशि का इस्तेमाल कर्मचारियों के वेतन या कारोबार के वैध परिचालन खर्चों को पूरा करने के बजाय मागो ने यह रकम अपने निजी बैंक खातों में स्थानांतरित कर दी और इसका इस्तेमाल संपत्ति खरीदने में किया।

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