
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को एक पाकिस्तानी पत्रकार के सवाल पर कड़ा जवाब दिया, जिसने उनसे आतंकवाद से जुड़ा सवाल पूछा था। यहां पाकिस्तानी पत्रकार के सवाल का कड़ा जवाब देते हुए जयशंकर ने कहा, ‘‘एक आतंकवादी देश मुझसे यह सवाल पूछ रहा है। आप तो बोलो ही मत।’’
जयशंकर और लाइबेरिया की विदेश मंत्री सारा बेसोलो न्यंती ने संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में ‘पोत परिवहन और समुद्री कर्मियों की सुरक्षा’ पर बने 'ग्रुप ऑफ़ फ्रेंड्स' के बारे में संवाददाताओं को संबोधित किया।
उनके संबोधन के बाद, पाकिस्तानी पत्रकार ने खड़े होकर जयशंकर से चिल्लाते हुए पूछा, ‘‘आपकी सरकार पाकिस्तान में आतंकवाद को प्रायोजित करना कब बंद करेगी?’’
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश पर्वतनेनी ने पाकिस्तानी पत्रकार से कहा, ‘‘आपने अपना जवाब सुन लिया है। आपने अपना जवाब साफ-साफ सुन लिया है।’’ बृहस्पतिवार को, जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ संयुक्त राष्ट्र भवन में दाखिल हो रहे थे, तो एक भारतीय पत्रकार ने उनसे पूछा था, ‘‘आप आतंकवादियों को पनाह देना कब बंद करेंगे?’’
एक रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान की कार्रवाइयों ने अफगान नागरिकों पर भारी मानवीय क्षति पहुंचाई है। इन कार्रवाइयों में लाखों शरणार्थी विस्थापित हुए, हजारों हिरासत में लिए गए, छात्रों को निष्कासन का सामना करना पड़ा, पत्रकारों पर जबरन वापसी का खतरा मंडरा रहा है, और सैन्य अभियानों में सैकड़ों लोग मारे गए हैं।
रिपोर्ट में कहा गया कि ये घटनाक्रम इस्लामाबाद और काबुल के बीच तात्कालिक सुरक्षा विवाद से कहीं अधिक व्यापक मानवीय संकट की ओर इशारा करते हैं।
अफगानिस्तान की प्रमुख समाचार एजेंसी, खामा प्रेस की एक रिपोर्ट में विस्तार से बताया गया कि किसी शरणार्थी को उसकी राष्ट्रीयता के कारण आतंकवादी नहीं बना दिया जाता। किसी मेडिकल छात्र को काबुल और इस्लामाबाद के बीच संबंधों के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। सुरक्षा की मांग करने वाला पत्रकार केवल इसलिए सुरक्षा के लिए खतरा नहीं है क्योंकि वह अफगान है। और अफगानिस्तान के भीतर रहने वाले नागरिकों का संरक्षित दर्जा इसलिए नहीं छिन जाता क्योंकि सशस्त्र समूह देश में कहीं और सक्रिय हो सकते हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा की परीक्षा न केवल उन खतरों से होती है जिनका सामना कोई राज्य करता है, बल्कि उन सीमाओं से भी होती है जिन्हें वह उनका सामना करते समय पार करने से इनकार करता है।
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान राष्ट्रीय सुरक्षा, आतंकवाद और आत्मरक्षा के नाम पर अफगानिस्तान के साथ अपने टकराव को लगातार उचित ठहरा रहा है और तालिबान अधिकारियों पर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) और अन्य आतंकवादी समूहों को अफगान धरती पर पनाह देने का आरोप लगा रहा है। हालांकि, काबुल ने इन आरोपों का बार-बार खंडन किया है।
लेकिन रिपोर्ट में कहा गया है कि सुरक्षा और आतंकवाद-विरोधी बयानबाजी से परे, शरणार्थियों, बच्चों, छात्रों, पत्रकारों, रोगियों, व्यापारियों और परिवारों सहित आम अफगानों को बार-बार इसके परिणाम भुगतने पड़े हैं।
यूक्रेन की राजधानी कीव में शुक्रवार सुबह एक और रूसी हमला हुआ। रूसी ड्रोन ने एक रिहायशी इमारत को निशाना बनाया। हमले में 14 वर्षीय लड़के की मौत हो गई। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने बताया कि सुबह से अब तक आठ क्षेत्रों पर हमले हो चुके हैं। ओडेसा में भी एक डाक सुविधा पर दोहरे हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई।
यूक्रेन के राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर रूसी हमले की जानकारी साझा की। जेलेंस्की ने पोस्ट किया, ''सुबह रूस ने कीव में एक रिहायशी अपार्टमेंट बिल्डिंग पर ड्रोन से हमला किया। दुख की बात है कि इसमें 14 साल के एक लड़के की मौत हो गई। उसके परिवार और करीबियों के प्रति मेरी संवेदनाएं हैं। सात अन्य लोग घायल हुए हैं। घटनास्थल पर लगी आग बुझा दी गई है और राहत और बचाव दल हमले के बाद के हालात से निपटने में जुटे हैं। यह बेहद बेरहम और दिल दहला देने वाला हमला था, जिसके पीछे कोई सैन्य वजह नजर नहीं आती।''
जेलेंस्की ने कहा कि शुक्रवार सुबह से ही हमारे अलग-अलग इलाकों में लगभग लगातार हमलों का खतरा बना हुआ है। दिन की शुरुआत से अब तक कुल आठ क्षेत्रों पर हमले हुए हैं। ओडेसा में एक डाक केंद्र पर एक के बाद एक किए गए हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई। जापोरिज्जिया में एक मेडिकल क्लिनिक को उस समय निशाना बनाया गया, जब अंदर लोग मौजूद थे। सुमी और मायकोलाइव क्षेत्रों में भी लोग घायल हुए हैं।
उन्होंने बताया कि पिछले कुछ दिनों में अपनी बैठकों के दौरान यूक्रेन ने अपने सहयोगी देशों को साफ तौर पर बताया है कि अगर रूस पर दबाव नहीं बनाया गया तो सर्दियां नजदीक आने के साथ वह हमले और बढ़ाएगा।
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