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दुनिया की खबरें: ईरान के तेल व्यापार पर अमेरिका का बड़ा प्रहार! लगे कड़े प्रतिबंध और खाड़ी में फंसे 2000 जहाज

अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि उसने कई कंपनियों पर कार्रवाई की है जो ईरान की 'अवैध तेल अर्थव्यवस्था' से जुड़ी हुई हैं। विभाग के मुताबिक, इन कदमों का मकसद ईरान की उस आमदनी को रोकना है, जिसका इस्तेमाल वह अपनी सैन्य गतिविधियों और 'अस्थिरता फैलाने वाली' गतिविधियों के लिए करता है।

फोटो: सोशल मीडिया
फोटो: सोशल मीडिया 

अमेरिका ने ईरान के तेल और पेट्रोकेमिकल व्यापार पर एक बड़ा नया कदम उठाते हुए कई कंपनियों, व्यक्तियों और जहाजों पर प्रतिबंध लगाए हैं। अमेरिका का आरोप है कि ये लोग ईरान से जुड़े उत्पादों के लेनदेन को आसान बनाने में मदद कर रहे थे।

अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि उसने कई कंपनियों पर कार्रवाई की है जो ईरान की 'अवैध तेल अर्थव्यवस्था' से जुड़ी हुई हैं। विभाग के मुताबिक, इन कदमों का मकसद ईरान की उस आमदनी को रोकना है, जिसका इस्तेमाल वह अपनी सैन्य गतिविधियों और 'अस्थिरता फैलाने वाली' गतिविधियों के लिए करता है।

यह कार्रवाई एक बड़े प्रतिबंध पैकेज का हिस्सा है, जिसमें उन व्यापारियों, शिपिंग कंपनियों और जहाजों को निशाना बनाया गया है जिन पर ईरानी पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल उत्पादों के परिवहन का आरोप है।

विदेश विभाग ने कहा, “आज की यह कार्रवाई उन तीन कंपनियों को भी निशाना बनाती है जो ईरानी पेट्रोकेमिकल उत्पादों का व्यापार कर रही थीं और उनके एक प्रमुख अधिकारी को भी।” विभाग ने कहा कि ऐसी कंपनियां ईरान सरकार को 'महत्वपूर्ण आमदनी' देती हैं।

ये प्रतिबंध कतर, सिंगापुर, हांगकांग, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और मार्शल आइलैंड्स में स्थित कंपनियों पर लगाए गए हैं।

अमेरिकी विदेश विभाग ने आठ जहाज प्रबंधन कंपनियों को भी चिह्नित किया है और आठ जहाजों को प्रतिबंधित संपत्ति घोषित किया है। आरोप है कि ये कंपनियां ईरानी तेल और पेट्रोकेमिकल उत्पादों की खरीद, बिक्री, ढुलाई और मार्केटिंग में शामिल थीं।

विभाग के अनुसार, ईरान का निर्यात कई देशों में फैले शिपिंग नेटवर्क के जरिए भेजा जाता है। कुछ जहाजों पर आरोप है कि वे 'अवैध हुई गतिविधियों' और अन्य चालाक तरीकों का इस्तेमाल करके ईरानी माल को ढो रहे थे।

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खाड़ी से निकलने का इंतजार कर रहे करीब दो हजार जहाज: स्कॉट बेसेंट

अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने बताया क‍ि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास तनाव की वजह से लगभग 2,000 जहाज इस समय खाड़ी से बाहर निकलने का इंतजार कर रहे हैं।

ट्रंप के एक टॉप कैबिनेट मेंबर के इस खुलासे से पहली बार अंदाजा लगा है कि इस अहम समुद्री रास्ते पर कितना बड़ा जाम लग चुका है। दुनिया के तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) का बड़ा हिस्सा आम तौर पर इसी रास्ते से गुजरता है।

व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए बेसेंट ने कहा क‍ि करीब 2,000 जहाज खाड़ी से बाहर आने का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने भरोसा जताया कि जैसे ही शिपिंग दोबारा सामान्य होगी, दुनिया के बाजार इस स्थिति को संभाल लेंगे।

उन्होंने कहा क‍ि मुझे लगता है कि इसके बाद तेल की सप्लाई काफी अच्छी रहेगी और कीमतें बहुत जल्दी नीचे आ सकती हैं।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अब ट्रंप प्रशासन और ईरान के बीच चल रही बातचीत का बड़ा मुद्दा बन गया है। बेसेंट ने बार-बार कहा कि समुद्री रास्तों पर फिर से बिना रुकावट आवाजाही शुरू कराना अमेरिका की बड़ी प्राथमिकताओं में से एक है।

उन्होंने कहा क‍ि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही पूरी तरह खुली होनी चाहिए। समुद्र में पहले की तरह खुला और सुरक्षित आवागमन जरूरी है।

यह जहाजों की भीड़ ऐसे समय में बढ़ी है जब दुनिया भर की सरकारें और कंपनियां इस बात पर नजर रखे हुए हैं कि कहीं ऊर्जा सप्लाई और व्यापार पर लंबे समय तक असर न पड़े।

बेसेंट का कहना है कि बाजार अभी भी मजबूत स्थिति में है और जैसे ही हालात सुधरेंगे, बड़ी संख्या में जहाज एक साथ रवाना हो सकते हैं। उन्होंने कहा क‍ि जैसे ही यह रास्ता खुलेगा, हम जहाजों की एक बड़ी लहर बाहर निकलते देखेंगे।

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पाकिस्तान में अफगान पत्रकार ग‍िरफ्तार, शरणार्थियों पर बढ़ती कार्रवाई पर मानवाधिकार संगठन ने जताई चिंता

पाकिस्तान पुलिस ने अफगान पत्रकार सैयद कासिम हाशमी को एबटाबाद-इस्लामाबाद हाईवे पर गिरफ्तार कर लिया है। स्थानीय मीडिया ने शुक्रवार को इस घटना की जानकारी दी।

सूत्रों के मुताबिक, अफगानिस्तान स्थित खामा प्रेस ने बताया कि हाशमी को गुरुवार दोपहर करीब 12:19 बजे पाकिस्तान की पुलिस ने एबटाबाद-इस्लामाबाद हाईवे पर गिरफ्तार किया गया। अभी तक पाकिस्तानी अधिकारियों ने उनकी गिरफ्तारी की वजह या उनकी मौजूदा हालत के बारे में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।

उन्हें कहां रखा गया है, इसकी भी कोई पक्की जानकारी नहीं मिल पाई है। उनके साथी पत्रकार और जानने वाले लोग लगातार जानकारी जुटाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई सफलता नहीं मिली है।

पिछले कुछ महीनों में पाकिस्तान में अफगान शरणार्थियों की गिरफ्तारी और उन्हें देश से बाहर भेजने की घटनाएं बढ़ी हैं। इनमें पत्रकार भी शामिल हैं। यह कार्रवाई अवैध प्रवासियों के खिलाफ चल रहे अभियान का हिस्सा बताई जा रही है। इसको लेकर मानवाधिकार संगठनों ने चिंता जताई है।

खामा प्रेस के अनुसार, 20 मई को भी पाकिस्तानी पुलिस ने अफगान पत्रकार परवेज अमीनजादा को इस्लामाबाद में गिरफ्तार किया था। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, उन्हें फैसल टाउन इलाके से हिरासत में लिया गया था।

मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि 2021 में तालिबान के अफगानिस्तान पर कब्जा करने के बाद वहां के कई पत्रकार डर, सेंसरशिप और मीडिया पर बढ़ती पाबंदियों की वजह से देश छोड़कर भाग गए थे। इनमें से कई लोग पाकिस्तान और ईरान जैसे पड़ोसी देशों में जाकर रहने लगे, जहां वे पश्चिमी देशों में पुनर्वास के अवसर का इंतजार कर रहे हैं।

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आतंकवाद का समर्थन करने वाले और सीमा पार इसे बढ़ावा देने वाले देशों को जवाब देना चाहिए : विदेश मंत्रालय

आतंकवाद के खिलाफ भारत का रुख हमेशा साफ रहा है और नो टॉलरेंस की नीति पर काम करता रहा है। वहीं, विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को आतंकवाद पर भारत का रुख दोहराते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को उन देशों को बताना चाहिए, जो आतंकवाद का समर्थन करते हैं और सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देते हैं।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को नई दिल्ली में एक साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल के मॉस्को दौरे के दौरान आतंकवाद पर दिए गए कमेंट्स पर एक सवाल का जवाब देते हुए कहा, "हम क्रॉस-बॉर्डर टेररिज्म को कैसे देखते हैं, इस पर मुझे दोहराने की जरूरत नहीं है कि क्रॉस-बॉर्डर टेररिज्म एक खतरा है, जिससे पूरी दुनिया को एक साथ आकर लड़ना चाहिए। हमें उन देशों को बताना चाहिए, जो आतंकवाद का समर्थन करते हैं और जो अपने इलाकों से क्रॉस-बॉर्डर टेररिज्म को बढ़ावा दे रहे हैं।"

गुरुवार को, एनएसए अजीत डोभाल ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में कोई डबल स्टैंडर्ड नहीं हो सकता है और जिम्मेदार देशों को यह तय करने में अपने विकल्प का मूल्यांकन करना होगा कि वे आतंकवाद को फंडिंग करने वालों का समर्थन करते हैं या उन्हें डिसाइसिव एक्शन से काउंटर करते हैं।

उन्होंने ये बातें मॉस्को में पहले अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा फोरम और सुरक्षा मामलों के उच्च प्रतिनिधियों की 14वीं मीटिंग के दौरान कहीं।

एनएसए डोभाल ने पश्चिम एशिया के हालात पर खास ध्यान देने की बात कही और कहा कि होर्मुज स्ट्रेट और लाल सागर समेत अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्ते के जरिए व्यापार की सुरक्षित और बिना रुकावट वाली आवाजाही सुनिश्चित करना जरूरी है।

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यूक्रेन पर दागा गया रूसी ड्रोन रोमानिया में आवासीय इमारत से टकराया, दो लोग घायल

यूक्रेन पर बृहस्पतिवार रात भर किए गए लगातार हमलों के दौरान एक रूसी ड्रोन पूर्वी रोमानिया की एक आवासीय इमारत से टकराया, जिससे दो लोग घायल हो गए। रोमानिया के अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

रोमानिया के रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि देश की हवाई सीमा में रडार पर दिखाई दिया यह ड्रोन गलाती शहर की एक इमारत की छत से टकरा गया, जिसके बाद वहां आग लग गई। घटना में दो लोगों को मामूली चोटें आईं और कई लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।

डेन्यूब नदी के किनारे बसा गलाती शहर मोल्दोवा और यूक्रेन की सीमाओं के पूर्व में स्थित है। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस और अन्य एजेंसियां मौके पर पहुंच गईं।

इस घटना के बाद रोमानिया की सेना ने दो एफ-16 लड़ाकू विमान और एक हेलीकॉप्टर तैनात किया। प्रभावित इलाकों के निवासियों को चेतावनी संदेश भी भेजे गए।

इस घटनाक्रम पर उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) सदस्य रोमानिया ने संगठन से अपनी सेना को जल्द से जल्द ड्रोन-रोधी क्षमताएं उपलब्ध कराने की मांग की है। विदेश मंत्रालय ने इस घटना को अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन बताया।

रोमानिया के राष्ट्रपति निकुसोर डैन ने शुक्रवार को नाटो सदस्य देशों के शीर्ष रक्षा निकाय की बैठक बुलाई। बैठक में उस घटना के प्रभावों पर चर्चा की गई और उन्होंने इसे रूस द्वारा यूक्रेन पर आक्रमण शुरू किए जाने के बाद से ‘‘रोमानिया की जमीन पर हुई सबसे गंभीर घटना’’ बताया। उन्होंने इस घटना के लिए सीधे रूस को जिम्मेदार ठहराया।

डैन ने फेसबुक पर एक पोस्ट में लिखा, ‘‘रूस के संबंध में हम उचित कदम उठाएंगे। ... इस हमले के जिम्मेदार और इसके कारण को लेकर किसी तरह की कोई अस्पष्टता नहीं है।’’

उन्होंने घायलों, उनके परिवारों और इससे प्रभावित लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त की।

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