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दुनिया की खबरें: ट्रंप की चेतावनी, कनाडा और ईयू के बीच अमेरिकी ह‍ितों के ख‍िलाफ समझौते की कीमत भारी टैर‍िफ होगी

16 सितंबर को नॉर्थ कैरोलिना के शार्लेट हवाई अड्डे पर पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि उनकी प्रतिक्रिया इस बात पर निर्भर करेगी कि ऐसी किसी व्यवस्था के पीछे मंशा क्या है।

फोटोः IANS
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर कनाडा और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच कोई संभावित व्यवस्था अमेरिका के हितों के खिलाफ हुई, तो अमेरिका यूरोप पर भारी टैरिफ (आयात शुल्क) लगा सकता है या कई क्षेत्रों में व्यापार पर रोक भी लगा सकता है। साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि ईरान के साथ चल रहा संघर्ष जल्द खत्म हो सकता है।

16 सितंबर को नॉर्थ कैरोलिना के शार्लेट हवाई अड्डे पर पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि उनकी प्रतिक्रिया इस बात पर निर्भर करेगी कि ऐसी किसी व्यवस्था के पीछे मंशा क्या है।

जब उनसे पूछा गया कि क्या कनाडा यूरोपीय संघ का सहयोगी सदस्य बन सकता है, तो उन्होंने कनाडा को व्यापार के मामले में खराब साझेदार बताते हुए कहा कि उन्हें ऐसा होने की संभावना नहीं दिखती।

ट्रंप ने कहा, "कनाडा व्यापार के मामले में एक बहुत खराब साझेदार रहा है। मुझे ऐसा होता नहीं दिखता। अगर वे ऐसा करते हैं और मुझे लगता है कि यह अमेरिका के खिलाफ कोई कदम है, तो मैं यूरोप पर बहुत गंभीर टैरिफ लगा दूंगा या कई चीजों में यूरोप के साथ व्यापार बंद कर दूंगा।"

हालांकि, ट्रंप ने किसी नए टैरिफ की घोषणा नहीं की, न ही यह बताया कि किन यूरोपीय उत्पादों पर प्रतिबंध या शुल्क लगाया जा सकता है। उन्होंने कोई समयसीमा भी नहीं दी। उनका बयान सिर्फ एक संभावित प्रतिक्रिया के रूप में था।

उन्होंने कहा कि उनकी प्रतिक्रिया इस बात पर निर्भर करेगी कि यूरोप की मंशा अच्छी है या बुरी। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि वह इस बात का फैसला कैसे करेंगे।

ट्रंप ने कहा, "अगर यूरोप ऐसा करता है और उसकी मंशा गलत होती है, तो हम यूरोप पर बहुत भारी टैरिफ लगा सकते हैं। अगर मंशा अच्छी है, तो कोई समस्या नहीं है।"

ट्रंप के ‘हंसी का विषय’ वाला तंज और ईयू में एसोसिएट सदस्यता का नया प्रयोग, कनाडा पहला दावेदार

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा को यूरोपीय संघ (ईयू) का एसोसिएट सदस्य बनाने के प्रस्ताव पर तंज कसा है। उन्होंने इसे ‘हंसी का विषय’ बताया। ट्रंप की इस टिप्पणी के पीछे ऐसा प्रयोग है जो यूरोपीय संघ के लिए भी नया है। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कनाडा को ईयू का पहला ‘एसोसिएट सदस्य’ बनाने की दिशा में काम करने का प्रस्ताव दिया है। हालांकि, ईयू की संधियों में फिलहाल एसोसिएट सदस्यता नाम की कोई औपचारिक श्रेणी मौजूद नहीं है।

ट्रंप ने बुधवार को उत्तरी कैरोलिना में पत्रकारों से बातचीत के दौरान इस प्रस्ताव पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उन्हें कनाडा के ईयू से इस तरह जुड़ने का विचार ‘लाफेबल’ यानी हंसी का विषय लगता है। ट्रंप ने यह भी कहा कि अगर उन्हें लगा कि कनाडा को ईयू से जोड़ने की कोशिश अमेरिका के खिलाफ किसी शत्रुतापूर्ण मंशा के साथ की जा रही है, तो वह यूरोपीय संघ पर ‘बहुत बड़ा टैरिफ’ लगा सकते हैं या उसके साथ कुछ क्षेत्रों में व्यापार रोक सकते हैं।

ट्रंप की प्रतिक्रिया के बीच सवाल यह है कि आखिर ‘एसोसिएट सदस्य’ का मतलब क्या है और कनाडा के लिए ऐसी व्यवस्था क्यों बनाई जा रही है।

दरअसल, ईयू में अभी पूर्ण सदस्यता और गैर-सदस्य देशों के साथ अलग-अलग तरह के समझौते मौजूद हैं, लेकिन ‘एसोसिएट सदस्य’ की कोई स्थापित कानूनी श्रेणी नहीं है। वॉन डेर लेयेन ने बुधवार को यूरोपीय संसद में अपने वार्षिक ‘स्टेट ऑफ द यूनियन’ संबोधन के दौरान पहली बार सार्वजनिक रूप से कनाडा के लिए इस नए दर्जे की दिशा में आगे बढ़ने का प्रस्ताव रखा। उस समय कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी भी संसद में मौजूद थे।

वॉन डेर लेयेन ने कहा कि यूरोप और कनाडा लोकतंत्र तथा कई साझा मूल्यों में विश्वास करते हैं और दोनों पक्षों को बदलती वैश्विक परिस्थितियों में अपने संबंधों को नए सिरे से परिभाषित करना चाहिए। उन्होंने कनाडा के साथ तकनीक, रक्षा, ऊर्जा और आर्कटिक क्षेत्र में सहयोग को और गहरा करने की बात कही।

प्रस्तावित व्यवस्था का स्वरूप अभी तय नहीं हुआ है। यानी यह स्पष्ट नहीं है कि कनाडा को ईयू के साथ किस स्तर की आर्थिक या राजनीतिक भागीदारी मिलेगी, क्या उसे यूरोपीय सिंगल मार्केट तक पहुंच मिलेगी, और बदले में उसे ईयू के कितने नियमों को स्वीकार करना होगा। यही वजह है कि फिलहाल ‘एसोसिएट सदस्यता’ को एक तैयार व्यवस्था के बजाय एक नए मॉडल के रूप में देखा जा रहा है।

पूर्ण सदस्यता से यह व्यवस्था अलग होगी। ईयू की पूर्ण सदस्यता यूरोपीय देशों के लिए है और इसके साथ मतदान अधिकार, ईयू संस्थाओं में प्रतिनिधित्व और अन्य अधिकार मिलते हैं। इसके विपरीत, यूरोप के बाहर के कुछ देशों के साथ ईयू पहले से ही बेहद गहरे आर्थिक संबंध रखता है। नॉर्वे, आइसलैंड और स्विट्जरलैंड इसके उदाहरण हैं, हालांकि उनके ईयू के साथ संबंध अलग-अलग कानूनी व्यवस्थाओं पर आधारित हैं।

कनाडा और ईयू के बीच पहले से ही व्यापक व्यापारिक संबंध हैं। दोनों के बीच सीईटीए नाम का मुक्त व्यापार समझौता भी है। ऐसे में प्रस्तावित एसोसिएट सदस्यता का उद्देश्य केवल व्यापार बढ़ाना नहीं, बल्कि संबंधों को रक्षा, ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा और आर्कटिक सहयोग जैसे रणनीतिक क्षेत्रों तक ले जाना हो सकता है।

यूक्रेन की जवाबी कार्रवाई, ड्रोन हमले में रूस की ऑयल रिफाइनरी को पहुंचा नुकसान

रूस के आक्रामक हमलों के जवाब में यूक्रेन भी जवाबी कार्रवाई को अंजाम देने में लगा हुआ है। क्षेत्र के गवर्नर मिखाइल येवरायेव के अनुसार, यूक्रेन के ड्रोन हमले में मध्य रूस के यारोस्लाव्ल क्षेत्र में एक ऑयल रिफाइनरी को नुकसान पहुंचा है।

रूसी समाचार एजेंसी 'टास' की र‍िपोर्ट के अनुसार, गवर्नर मिखाइल येवरायेव ने सोशल मीड‍िया प्‍लेटफार्म पर हमले की जानकारी दी। उनके अनुसार, मध्य रूस के यारोस्लाव्ल क्षेत्र में एक ड्रोन हमले के दौरान एक ऑयल रिफाइनरी को नुकसान पहुंचा।

उन्होंने कहा, "दुश्मन के बड़े ड्रोन हमलों को नाकाम कर दिया गया। कुल 65 ड्रोन मार गिराए गए हैं। किसी की मौत या घायल होने की कोई खबर नहीं है।" टास के अनुसार, उन्होंने बताया क‍ि एक तेल रिफाइनरी को नुकसान पहुंचा है। वहां लगी आग को बुझाने का काम जारी है।

गिराए गए ड्रोन के मलबे के गिरने से कई अपार्टमेंट, इमारतों की खिड़कियां भी टूट गईं और कई गाड़ियों को नुकसान पहुंचा। फिलहाल क्षेत्र में किसी तरह की ड्रोन चेतावनी लागू नहीं है। उन्होंने बताया कि स्थिति नियंत्रण में है और राहत एवं मरम्मत का काम जारी है।

वहीं, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने रूस पर क‍िए गए जवाबी ड्रोन हमले की सफलता के ल‍िए अपने सैन‍िकों का आभार जताया।

जेलेंस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, ''मैं हमारे उन योद्धाओं का धन्यवाद करता हूं, जो हर दिन रूस को युद्ध का असर महसूस करा रहे हैं। बीती रात यूक्रेन की सुरक्षा सेवा (एसबीयू), मानवरहित प्रणाली बलों, यूक्रेन की रक्षा खुफिया एजेंसी और विदेशी खुफिया सेवा के संयुक्त अभियान में यारोस्लाव्ल तेल रिफाइनरी को निशाना बनाया गया।''

नेपाल में बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,410 हुई, 6,100 से अधिक लोग अब भी लापता

नेपाल में पिछले महीने अचानक आई विनाशकारी बाढ़ से मरने वालों की संख्या बृहस्पतिवार को बढ़कर 1,410 हो गई, जबकि 6,100 से अधिक लोग अब भी लापता हैं। देश के आपदा प्रबंधन अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

नेपाल-तिब्बत सीमा के पास 26 अगस्त को बर्फीली चट्टान के खिसकने के कारण अचानक आई बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल के कस्बों और गांवों में भारी तबाही मचाई थी।

नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) की ओर से बृहस्पतिवार शाम जारी आंकड़ों के मुताबिक, बाढ़ में अब तक 1,410 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 6,145 लोग लापता हैं।

एनडीआरआरएमए के अनुसार, चितवन जिले से 364 शव, नवलपरासी पूर्व से 232, नवलपरासी पश्चिम से 222, नुवाकोट से 203, रसुवा से 199, गोरखा से 78, धादिंग से 72 और तनहूं से 38 शव बरामद किए गए हैं।

एजेंसी ने बताया कि बाढ़ प्रभावित इलाकों से अब तक 13,756 लोगों को बचाया जा चुका है। उसने कहा कि सुरक्षा बलों की संयुक्त कमान बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में खोज और बचाव अभियान लगातार जारी रखे हुए है।

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