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दुनिया की खबरें: यूक्रेन ने खोया फ्रांस का मिराज 2000 लड़ाकू विमान और ओबामा पर लगा देश से 'विश्वासघात' का आरोप

जेलेंस्की ने कहा, "दुर्भाग्य से, आज हमने अपना लड़ाकू विमान खो दिया, एक फ्रांसीसी विमान, एक बेहद प्रभावी विमान- हमारा एक मिराज जेट।"

फोटो: IANS
फोटो: IANS 

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने बुधवार को पुष्टि की कि यूक्रेन ने फ्रांस द्वारा आपूर्ति किया गया एक मिराज 2000 लड़ाकू विमान खो दिया।

जेलेंस्की ने कहा, "दुर्भाग्य से, आज हमने अपना लड़ाकू विमान खो दिया, एक फ्रांसीसी विमान, एक बेहद प्रभावी विमान- हमारा एक मिराज जेट।"

जेलेंस्की ने कहा कि पायलट सफलतापूर्वक विमान से बाहर निकल गया और उन्होंने यह भी बताया कि दुर्घटना रूसी हमले के कारण नहीं हुई थी।

समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, यूक्रेनी वायु सेना के अनुसार, विमान एक उड़ान मिशन के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिससे जमीन पर कोई हताहत नहीं हुआ।

यूक्रेन को फ्रांस से मिराज 2000 लड़ाकू विमानों का पहला जत्था फरवरी में मिला था। यह पहली बार था जब यूक्रेन में फ्रांस से मिले मिराज विमान से जुड़ा कोई हादसा हुआ है। इन लड़ाकू विमानों को यूक्रेनी पायलट उड़ा रहे थे, जिन्हें फ्रांस में कई महीनों तक प्रशिक्षण दिया गया था।

6 जून, 2024 को, फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने घोषणा की कि फ्रांस यूक्रेन को मिराज 2000-5 लड़ाकू विमान प्रदान करेगा।

फ्रांसीसी नेता ने फ्रांस 4,500 सैनिकों की एक पूरी यूक्रेनी बटालियन को प्रशिक्षित करेगा, जिसे युद्ध के मैदान में तैनात किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि फ्रांसीसी लड़ाकू विमानों की आपूर्ति "तनाव बढ़ाने वाला कारक नहीं है" और वादा किया कि "इन हथियारों का इस्तेमाल नागरिकों पर बमबारी करने के लिए नहीं किया जाएगा।" इसके अलावा, मैक्रों ने यूक्रेन में सैन्य प्रशिक्षकों को भेजने की संभावना से भी इनकार नहीं किया।

उन्होंने एक साक्षात्कार में कहा, "इस विषय पर कोई प्रतिबंध नहीं होना चाहिए।"

मिराज 2000 एक फ्रांसीसी लड़ाकू विमान है। इसमें सिंगल-इंजन है और यह चौथी पीढ़ी का जेट है, जिसका निर्माण डसॉल्ट एविएशन द्वारा किया गया है। यह एससीएएलपी मिसाइलों सहित सटीक-निर्देशित हथियारों को ले जाने में सक्षम है।

हालांकि, कीव ने यह नहीं बताया है कि फ्रांस ने कितने विमान दिए हैं या कुल कितने विमान देने की योजना है।

फ्रांसीसी दैनिक ले मोंडे के अनुसार, फ्रांसीसी वायु सेना के पास केवल सीमित संख्या में लड़ाकू विमान हैं। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि ये लड़ाकू विमान फ्रांस के लिए अपनी सभी दैनिक जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए मुश्किल से पर्याप्त हैं।

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एपस्टीन विवाद के बीच ट्रंप ने ओबामा पर लगाया देश से 'विश्वासघात' का आरोप

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2016 के राष्ट्रपति चुनाव को लेकर पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा पर देश से 'विश्वासघात' का आरोप लगाया, जिसके बाद ओबामा के प्रवक्ता की प्रतिक्रिया सामने आई। प्रवक्ता ने इन आरोपों को 'बेतुका' और 'ध्यान भटकाने की एक कमजोर कोशिश' बताया।

'सिन्हुआ' समाचार एजेंसी के मुताबिक, जब मीडिया ने ट्रंप से दिवंगत अमेरिकी फाइनेंसर जेफरी एपस्टीन से जुड़े मामले पर सवाल किया, तो उन्होंने ओबामा को टारगेट करना शुरू कर दिया।

व्हाइट हाउस के 'ओवल ऑफिस' में पत्रकारों से बात करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, "उन्होंने चुनाव में गड़बड़ी करने की कोशिश की और पकड़े गए। इसके लिए सख्त सजा होनी चाहिए। यह देश से विश्वासघात था।"

ट्रंप ने पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा को 'गिरोह का मुखिया' बताते हुए आरोप लगाया कि डेमोक्रेट्स ने 2016 से लेकर 2020 तक चुनावों में कथित तौर पर हेराफेरी की। इस पार्टी में जो बाइडेन और हिलेरी क्लिंटन भी शामिल हैं।

अभी तक डेमोक्रेट्स की ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन ओबामा के प्रवक्ता ने पहले ही ट्रंप के आरोपों को 'बेतुका' और 'ध्यान भटकाने का प्रयास' बताया है।

पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के प्रवक्ता पैट्रिक रोडनबश ने कहा, "राष्ट्रपति पद के सम्मान में, हमारा कार्यालय आमतौर पर व्हाइट हाउस से निरंतर आने वाले झूठ और गलत जानकारी पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देता, लेकिन यह दावे इतने अपमानजनक हैं कि इन पर प्रतिक्रिया देना जरूरी है। यह अजीबो-गरीब आरोप पूरी तरह से बेतुके हैं। यह ध्यान भटकाने की एक कमजोर कोशिश है।"

उल्लेखनीय है कि अमेरिकी राजनीतिक और व्यावसायिक दिग्गजों से व्यापक संबंध रखने वाले जेफरी एपस्टीन पर यौन अपराधों के आरोप लगे थे। उन्हें गिरफ्तार किया गया था। अगस्त 2019 में जेल में उनकी मौत हो गई, जिसे आधिकारिक तौर पर आत्महत्या करार दिया गया। एपस्टीन के अमेरिका की राजनीतिक और कारोबारी हस्तियों से गहरे संबंध थे।

2024 के राष्ट्रपति चुनाव अभियान के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने वादा किया था कि अगर वह दोबारा चुने जाते हैं, तो जेफरी एपस्टीन से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक करेंगे।

हालांकि, इसी महीने की शुरुआत में अमेरिकी न्याय विभाग और एफबीआई ने एक संयुक्त ज्ञापन जारी करते हुए बताया कि कोई भी आपत्तिजनक 'क्लाइंट लिस्ट' मौजूद नहीं है। इसके साथ ही कहा कि "आगे कोई भी खुलासा उचित या वारंटेड नहीं होगा।"

इस मुद्दे पर ट्रंप प्रशासन की बदलती स्थिति को लेकर काफी आलोचना हो रही है। कुछ नाराज समर्थकों ने अटॉर्नी जनरल पैम बॉन्डी के इस्तीफे तक की मांग कर दी।

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अमेरिका ने यूनेस्को से अपनी वापसी की घोषणा की

अमेरिका ने यूनेस्को से अपनी वापसी की घोषणा कर दी है। मंगलवार को विदेश विभाग की प्रवक्ता टैमी ब्रूस ने इसकी घोषणा करते हुए कहा कि यूनेस्को "विभाजनकारी सामाजिक और सांस्कृतिक मुद्दों" को बढ़ावा दे रहा है और सतत विकास पर बहुत ज्यादा ध्यान दे रहा है।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में यह दूसरी बार है जब अमेरिका पेरिस स्थित यूनेस्को से अलग हो रहा है। वाशिंगटन दो साल पहले अपने पूर्ववर्ती जो बाइडेन के कार्यकाल में इसमें फिर से शामिल हुआ था।

नोटिस जारी करने के बाद, ब्रूस ने कहा कि यह वापसी अगले साल के अंत में प्रभावी होगी।

उन्होंने कहा कि यूनेस्को का अंतर्राष्ट्रीय विकास के लिए वैश्विक, वैचारिक एजेंडा हमारी अमेरिका प्रथम विदेश नीति के विपरीत है और यूनेस्को में निरंतर भागीदारी संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रीय हित में नहीं है।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा, 'यूनेस्को की स्थापना के बाद से अमेरिका ने इसमें जो प्रमुख भूमिका निभाई है, उसे देखते हुए, उन्हें इस वापसी पर गहरा खेद है।'

ट्रंप प्रशासन के लिए प्रमुख मुद्दे यूनेस्को की इजरायल विरोधी नीतियों को लेकर हैं, जिनका वह इजराइल के साथ विरोध करता है, और फिलिस्तीन की सदस्यता है।

ब्रूस ने कहा, 'फिलिस्तीन राज्य' को सदस्य राज्य के रूप में स्वीकार करने का यूनेस्को का निर्णय अत्यधिक समस्याग्रस्त है। यह अमेरिकी नीति के विपरीत है, और इसने संगठन के भीतर इजरायल विरोधी बयानबाजी को बढ़ावा दिया है।'

अमेरिका का यूनेस्को से बाहर होना, ट्रंप द्वारा अंतर्राष्ट्रीय संगठनों की तीखी आलोचना और उनसे खुद को अलग करने के अनुरूप है।

कार्यभार संभालने के तुरंत बाद, उन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन से अमेरिका को अलग कर लिया, कोविड महामारी से निपटने के उसके तरीके की आलोचना की और उस पर अपनी भूमिका का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया।

संयुक्त राष्ट्र की सांस्कृतिक शाखा की महानिदेशक ऑड्रे अजोले ने कहा कि अमेरिका का यह निर्णय बहुपक्षवाद के मूलभूत सिद्धांतों के विपरीत है, और सबसे पहले संयुक्त राज्य अमेरिका में हमारे कई साझेदारों को प्रभावित कर सकता है - वे समुदाय जो विश्व धरोहर सूची में स्थान पाने, रचनात्मक शहर का दर्जा पाने और विश्वविद्यालय अध्यक्ष बनने की इच्छा रखते हैं।'

उन्होंने कहा, "हालांकि यह खेदजनक है, लेकिन इस घोषणा की उम्मीद थी, और यूनेस्को ने इसके लिए तैयारी कर ली है।"

2023 में यूनेस्को को अमेरिका का योगदान 28 मिलियन डॉलर था, जो संगठन के बजट का 22 प्रतिशत था।

अजोले ने कहा, "आज, बड़ी संख्या में सदस्य देशों और निजी योगदानकर्ताओं के निरंतर समर्थन से संगठन वित्तीय दृष्टि से बेहतर संरक्षित है, जिससे अमेरिकी योगदान घटकर 8 प्रतिशत रह गया है।

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ढाका विमान हादसा : बांग्लादेश सरकार ने सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारियों पर की कार्रवाई, भड़की अवामी लीग

बांग्लादेश में हाल ही में हुए विमान हादसे के बाद प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया, जिस पर मुहम्मद युनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने कार्रवाई की। हालांकि, अब अवामी लीग ने सरकार की इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है।

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस की कार्रवाई में कम से कम 75 छात्र घायल हुए, जिनका ढाका मेडिकल कॉलेज अस्पताल में इलाज किया गया।

मंगलवार को हादसे की जगह और बांग्लादेश की राजधानी में सचिवालय भवन के बाहर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन शुरू हुए, जिसमें छात्रों ने अंतरिम सरकार के शिक्षा सलाहकार और शिक्षा सचिव के तत्काल इस्तीफे की मांग की। इस विमान हादसे में अब तक 32 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें ज्यादातर बच्चे बताए जा रहे हैं, और 165 से अधिक लोग घायल हुए हैं।

अंतरिम सरकार के कानून और शिक्षा सलाहकारों के साथ-साथ युनुस के प्रेस सचिव को छात्रों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा। वे इस हादसे के बाद निरीक्षण के लिए संस्थान का निरीक्षण करने के लिए गए थे। छात्रों ने उनके इस्तीफे की मांग की और कहा कि सरकार ने हादसे से संबंधित गलत जानकारी दी है।

अवामी लीग ने मंगलवार को जारी एक बयान में कहा, "माइलस्टोन स्कूल और कॉलेज में फाइटर जेट के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद से छात्रों, शिक्षकों, अभिभावकों और कर्मचारियों पर व्यवस्थित रूप से अत्याचार, धोखा और दमन किया जा रहा है। पिछले 24 घंटों में हताहतों की संख्या छिपाने से लेकर कानून प्रवर्तन बलों को तैनात करने, साउंड ग्रेनेड, आंसू गैस और असली गोलियों का इस्तेमाल करने तक, इस शासन ने राष्ट्रीय संकट के समय राष्ट्र के कल्याण में पूरी तरह विफलता दिखाई है।"

बयान में आगे कहा गया, "हताहतों की सूची को पारदर्शी रखने के बजाय, शासन ने प्रदर्शनकारियों को दबाने के लिए कानून प्रवर्तन बलों को उतारा, ताकि राष्ट्र को अंधेरे में रखा जाए। हताहतों की सूची बताने की बार-बार की मांग के बावजूद, दुखी छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों पर पुलिस ने हमला किया, मानवाधिकारों की पूरी तरह अनदेखी की, जिससे परिवारों और साथी छात्रों को और भी अधिक आघात पहुंचा है।"

पार्टी ने दावा किया कि सलाहकारों को हटाने की मांग के साथ सड़कों पर लाखों छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों की मौजूदगी इस बात का सबूत है कि युनुस शासन अपनी विश्वसनीयता खो चुका है।

अवामी लीग ने कहा, "जनता का गुस्सा तब साफ दिखाई दिया, जब यूनुस शासन के दो सलाहकारों और प्रेस सचिव को दुर्घटनास्थल के दौरे के दौरान स्कूल के छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों ने मृतकों की संख्या के बारे में गवाहों के बयानों को गलत सूचना बताकर खारिज कर दिया।"

अंतरिम सरकार की आलोचना करते हुए पार्टी ने जोर देकर कहा कि माइलस्टोन कॉलेज सहित कई जगहों पर छात्रों और शिक्षकों पर कानून प्रवर्तन बलों की तैनाती और साउंड ग्रेनेड, असली गोलियों और घातक हथियारों का इस्तेमाल न केवल शासन की मानवाधिकारों को बनाए रखने की जिम्मेदारी को कमजोर करता है, बल्कि राष्ट्रीय संकट के चरम पर भी उसकी ताकत पर निर्भरता को उजागर करता है।

पार्टी ने कहा, "हम इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं, जिसने देशव्यापी प्रदर्शन भड़का दिए। मरीजों को अस्पतालों में प्रवेश करने से रोका गया, जबकि राजनीतिक दलों के नेताओं और सलाहकारों को अस्पताल में जाने और पीड़ितों के साथ फोटो खिंचवाने की अनुमति दी गई, जो चिकित्सा सेवाओं को बाधित करके राजनीतिक अंक हासिल करने का एक बर्बर प्रदर्शन है।"

बांग्लादेश में अराजकता को उजागर करते हुए अवामी लीग ने आगे कहा, "विमान हादसे के पीड़ितों के लिए रक्तदान करने आए स्वयंसेवकों पर पुलिस की मौजूदगी में हमला किया गया, जबकि पत्रकारों पर हमला किया गया, उन्हें डराया गया और दुर्घटना स्थल के प्रभाव के विवरण को कवर करने से रोका गया।"

अवामी लीग ने वैश्विक समुदाय से आग्रह किया कि वे शासन द्वारा शुरू की गई क्रूर दमन की लहर के खिलाफ अपनी आवाज उठाएं और युनुस द्वारा प्रायोजित दमन पर न्याय और जवाबदेही की मांग करने वाले नागरिकों के जीवन को बचाएं।

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ऑस्ट्रेलिया में कथित नस्लीय हमले में भारतीय छात्र घायल

ऑस्ट्रेलिया के एडिलेड शहर में कथित नस्लीय हमले में घायल हुए भारतीय छात्र चरणप्रीत सिंह को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। स्थानीय मीडिया ने यह जानकारी दी।

‘9न्यूज’ की खबर के अनुसार, 23 वर्षीय सिंह पर शनिवार को किंटोर एवेन्यू स्थित एक पार्किंग स्थल में पार्किंग विवाद को लेकर कुछ लोगों ने हमला कर दिया।

खबर के अनुसार सिंह ने आरोप लगाया कि कुछ लोग उनके वाहन के पास आये और नस्लीय गालियां दीं तथा उनके साथ मारपीट की जिससे वह बेहोश हो गये।

‘एसबीएस पंजाबी’ ने सिंह के हवाले से खबर में कहा, ‘‘मेरे सिर में चोट लगी है, मेरी बाईं आंख के आसपास चोट है और जबड़े में भी सूजन है। मेरे सिर की सूजन अब भी कम नहीं हुई है।’’

‘9न्यूज’ की खबर के अनुसार घटना के बाद एनफील्ड निवासी 20 वर्षीय एक व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया गया और उस पर हमला कर नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया गया है।

पुलिस ने फरार अन्य हमलावरों के बारे में जानकारी देने की जनता से अपील की है।

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