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दुनिया की खबरें: अमेरिका ने नौसैन्य पोत पर ईरानी हमले के दावों को खारिज किया और UAE में बजा मिसाइल हमले का अलर्ट

ईरानी समाचार एजेंसियों ने दावा किया कि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य के दक्षिण-पूर्व में अमेरिकी नौसेना के एक पोत पर हमला किया, और उस पर ‘‘समुद्री सुरक्षा और नौवहन मानदंडों का उल्लंघन’’ करने का आरोप लगाया।

फोटोः सोशल मीडिया
फोटोः सोशल मीडिया 

अमेरिकी सेना ने सोमवार को उन दावों को खारिज कर दिया कि ईरान ने उसके नौसैन्य पोत पर हमला किया है।

अमेरिका फारस की खाड़ी के निकटवर्ती क्षेत्र में सक्रिय है और होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों को रास्ता देने तथा ईरान द्वारा उन जहाजों पर नाकेबंदी को हटाने की पेशकश कर रहा है जिन्हें नौवहन की अनुमति प्राप्त नहीं है।

ईरानी समाचार एजेंसियों ने दावा किया कि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य के दक्षिण-पूर्व में अमेरिकी नौसेना के एक पोत पर हमला किया, और उस पर ‘‘समुद्री सुरक्षा और नौवहन मानदंडों का उल्लंघन’’ करने का आरोप लगाया।

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नेपाल ने लिपुलेख पर अपना क्षेत्रीय दावा दोहराया, भारत से बातचीत का प्रस्ताव रखा

नेपाल ने लिपुलेख पर अपने क्षेत्रीय दावे को सोमवार को दोहराया और इस मुद्दे को सुलझाने के लिए भारत के साथ बातचीत की वकालत की। एक दिन पहले भारत ने इस क्षेत्र पर नेपाल के रुख को दृढ़ता से खारिज कर दिया था।

भारत ने उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे से दशकों से आयोजित होने वाली कैलाश मानसरोवर यात्रा पर नेपाल की आपत्ति को रविवार को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि क्षेत्रीय दावों का ऐसा ‘‘एकतरफा कृत्रिम विस्तार’’ अस्वीकार्य है।

भारत की इस प्रतिक्रिया के पहले नेपाल के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर भारत और चीन द्वारा लिपुलेख दर्रे के रास्ते आगामी कैलाश मानसरोवर यात्रा आयोजित करने की योजना पर आपत्ति जताई और दावा किया कि यह उसका क्षेत्र है।

नेपाल सरकार के प्रवक्ता सस्मित पोखरेल ने मीडिया से बातचीत में कहा, ‘‘नेपाल का अपनी सीमा बढ़ाने का कोई इरादा नहीं है; यह क्षेत्र नेपाल का है, और सरकार का इस बारे में स्पष्ट दृष्टिकोण है और वह अपने रुख के प्रति प्रतिबद्ध है।’’

शिक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री पोखरेल ने कहा, ‘‘इस मुद्दे को दोनों देशों के बीच सहयोग और राजनयिक बातचीत के माध्यम से हल करने की आवश्यकता है।’’

उन्होंने कहा कि विदेश मंत्रालय ने इस मामले की जानकारी भारत को औपचारिक पत्र के माध्यम से पहले ही दे दी है।

चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में स्थित कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील की तीर्थयात्रा हिंदुओं, जैनियों और बौद्धों के लिए धार्मिक महत्व रखती है। भारत और चीन के बीच संबंधों को सामान्य बनाने के प्रयासों के तहत लगभग पांच साल के अंतराल के बाद पिछले साल यह यात्रा फिर से शुरू हुई।

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पाकिस्तान: इमरान खान को झटका, कोर्ट ने की याचिका खारिज

इस्लामाबाद हाई कोर्ट (आईएचसी) ने सोमवार को पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और उनकी बेगम बुशरा बीबी की उन याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिनमें 190 मिलियन पाउंड के भ्रष्टाचार मामले में उनकी सजा सस्पेंड करने की मांग की गई थी। कोर्ट ने कहा कि उनकी मुख्य अपीलों पर सुनवाई पहले ही तय हो चुकी है।

पाकिस्तान के जाने-माने अखबार डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, चीफ जस्टिस सरदार मुहम्मद सरफराज डोगर की अगुवाई वाली दो सदस्यीय बेंच 7 मई को सेंट्रल अपील पर सुनवाई करेगी। कोर्ट ने निलंबन आवेदन को अप्रासंगिक बताया।

पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) संस्थापक इमरान खान तोशखाना मामले में अगस्त 2023 से जेल में हैं, और 190 मिलियन पाउंड (अल-कादिर ट्रस्ट) मामले में रावलपिंडी की अदियाला जेल में 14 साल की सजा काट रहे हैं।

2025 में, इस्लामाबाद की एक अकाउंटेबिलिटी कोर्ट ने इस केस में इमरान खान और बुशरा बीबी को क्रम से 14 और सात साल जेल की सजा सुनाई थी। कपल ने इस्लामाबाद हाई कोर्ट में इसे चुनौती दी है। उन पर आरोप है कि उन्होंने एक रियल एस्टेट फर्म से अवैध लाभ के बदले में जमीन हासिल की और ट्रस्ट बनाकर 50 अरब पाकिस्तानी रुपये को वैध बनाने की कोशिश की।

पीटीआई लगातार इमरान की सजा का विरोध करती आई है और उनकी हिरासत का पुरजोर विरोध किया है। पूर्व पीएम जेल में 1,000 दिन गुजार चुके हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार पार्टी उनकी सजा को राजनीति से प्रेरित, संवैधानिक और कानूनी रूप से कमजोर बताती आई है।

यूएई के गल्फ टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, पीटीआई के सेंट्रल इन्फॉर्मेशन सेक्रेटरी वकास अकरम ने एक बयान में कहा कि खान को राजनीतिक रूप से परेशान किया जा रहा है क्योंकि मौजूदा सरकार, उनकी लोकप्रियता और स्वतंत्र रुख से डरकर, उन्हें साइडलाइन करने की कोशिश कर रही है।

अकरम ने कहा कि इमरान खान और उनकी पत्नी बुशरा बीबी के साथ अमानवीय व्यवहार किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पीटीआई संस्थापक को अकेले कैद में रखा गया है, जबकि उनके परिवार, वकीलों और पार्टी नेतृत्व को उनसे मिलने नहीं दिया जा रहा है। ये बुनियादी इंसानी और कानूनी अधिकारों का साफ उल्लंघन है।

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ईरान के साथ युद्धविराम के बाद पहली बार यूएई में मिसाइल हमले का सायरन बजा

संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में अधिकारियों ने संभावित मिसाइल हमले का आपातकालीन सायरन बजाकर लोगों से तुरंत सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने का आग्रह किया है।

यह चेतावनी उस समय जारी की गयी, जब कुछ समय पहले अमेरिकी सेना द्वारा यह घोषणा की गयी कि दो व्यापारिक जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरे थे।

हालांकि, तत्काल किसी भी तरह के जान-माल के नुकसान की कोई सूचना नहीं मिली है और बाद में स्थिति को सामान्य घोषित कर दिया गया।

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यूएई में बजा मिसाइल हमले का अलर्ट, थोड़ी देर बाद हालात हुए सामान्य

ईरान-अमेरिका के बीच जारी अस्थायी संघर्ष के बीच अचानक ही यूएई में कुछ ऐसा हुआ जिसने उन दिनों की याद दिला दी जब आसमान से बम बरसते थे। होर्मुज में जारी तनाव के बीच यूएई में मिसाइल अलर्ट सुनाई दिया। अस्थायी संघर्ष विराम के बाद पहली बार ऐसा हुआ।

हालांकि इसके थोड़ी देर बाद फोन अलर्ट ने राहत की खबर सुनाई। इसमें लिखा था कि हालात अब सामान्य हैं, सब सुरक्षित हैं। आम जनता से कहा गया कि अब वो सामान्य गतिविधि शुरू कर सकते हैं।

दरअसल, इससे कुछ देर पहले ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में यूएई के एक तेल टैंकर पर ड्रोन हमले की खबर आई थी। जिसकी सख्त शब्दों में निंदा करते हुए यूएई विदेश मंत्रालय ने कहा ये समुद्री डकैती समान है।

यूएई की सरकारी तेल कंपनी एडीएनओसी के अनुसार, ओमान तट के पास एमवी बाराकाह नामक टैंकर पर दो ड्रोन से हमला किया गया। इसमें कोई जनहानि नहीं हुई क्योंकि जहाज उस समय खाली था।

यूएई के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाना और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का इस्तेमाल आर्थिक दबाव या ब्लैकमेल के रूप में करना “समुद्री डकैती” के समान है। मंत्रालय ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) द्वारा की गई।

इस हमले की गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (जीसीसी) ने भी निंदा की। जीसीसी के महासचिव जसीम मोहम्मद अल-बदावी ने होर्मुज स्ट्रेट में एक अमीराती तेल टैंकर पर ईरानी हमले की “कड़े शब्दों में” निंदा की। कथित तौर पर जब जहाज समुद्र में था, तो उस पर दो सुसाइड ड्रोन ने हमला किया।

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