
तृणमूल कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल की सदस्य और पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार में वित्त मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने उनके साथ बातचीत के दौरान दुर्व्यवहार किया। भट्टाचार्य उस बैठक में शामिल थीं जिसमें चुनाव आयोग की पूर्ण बेंच ने विभिन्न दलों के प्रतिनिधिमंडलों से मुलाकात की थी। उन्होंने कहा कि बातचीत के दौरान उनके साथ अपमानजनक व्यवहार किया गया।
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चंद्रिमा भट्टाचार्य ने मीडिया को बताया “मैं एक महिला हूं। इसके बावजूद, बातचीत के दौरान उन्होंने मुझसे कहा ‘चिल्लाओ मत’। सीईसी के पास महिलाओं के प्रति सम्मान की बुनियादी भावना नहीं है। यही कारण है कि उन्होंने कई महिला मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए। उन्होंने कहा कि यद आपका नाम मतदाता सूची से हटाया गया है, तो यह साबित करना आपका जिम्मा है कि आप वास्तविक मतदाता हैं। आपको लाइन में खड़ा होना होगा। सीईसी को याद रखना चाहिए कि महिलाओं पर चिल्लाना या उनके साथ दुर्व्यवहार करना उनके काम का हिस्सा नहीं है।”
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उन्होंने कहा कि बैठक के दौरान सीईसी ने पश्चिम बंगाल में चल रहे एसआईआर से संबंधित किसी भी विषय पर चर्चा करने से मना कर दिया। उन्होंने कहा कि चूंकि एसआईआर मामला सुप्रीम कोर्ट में है, इसलिए बैठक में नहीं चर्चा किया जा सकता। उन्होंने हमें बैठक के लिए क्यों बुलाया, जब हम एसआईआर मुद्दे पर बात नहीं कर सकते। क्या सामान्य मतदाताओं की खातिर सुप्रीम कोर्ट का रुख करना हमारा अपराध है।”
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इसके साथ ही, राज्य के शहरी विकास मंत्री और कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम ने कहा कि बीजेपी यह भ्रम फैला रही थी कि पश्चिम बंगाल में अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठिए बढ़ गए हैं। आयोग को रिवीजन अभ्यास के पिछले दो महीनों में बीजेपी के दावे का कोई सबूत मिला? बल्कि, निर्दोष लोगों को एसआईआर के नाम पर परेशान किया गया। आयोग ने बीजेपी की मांगों के अनुसार रिवीजन नियम तय करने में गलती की। हमारी अपील है कि कोई भी वास्तविक मतदाता मतदाता सूची से बाहर न हो।
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वहीं, चुनाव आयोग (ईसीआई) ने दिनभर विभिन्न राजनीतिक दलों से बातचीत की प्रक्रिया की जानकारी दी और कहा कि सभी दलों ने आगामी चुनाव में मतदाताओं को धमकाने और असामाजिक तत्वों की हिंसा को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने की मांग की। आयोग ने यह भी कहा कि अधिकांश राजनीतिक दल इस बार पश्चिम बंगाल में एक या दो चरण में मतदान कराने की सलाह दे रहे हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ने राजनीतिक दलों को आश्वस्त किया कि भारत में चुनाव कानून के अनुसार आयोजित किए जाते हैं और ईसीआई पश्चिम बंगाल में निष्पक्ष, पारदर्शी और स्वतंत्र चुनाव सुनिश्चित करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेगा।
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