हालात

मोदी सरकार से कांग्रेस का सवाल, राफेल डील और रूस के साथ एके-103 रायफल सौदे में अलग-अलग मापदंड क्यों?

कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने रूस के साथ एके-103 रायफल सौदे का जिक्र करते हुए सवाल किया कि राफेल डील के विपरित मोदी सरकार ने रूस की मांग के बावजूद निजी कंपनी को ऑफसेट का ठेका देने से मना कर दिया, आखिर क्यों इन सौदों में अलग-अलग मापदंड अपनाए गए?

फोटो: सोशल मीडिया 
फोटो: सोशल मीडिया  कांग्रेस ने एके-103 रायफल डील का जिक्र करते हुए मोदी सरकार पर राफेल सौदे को लेकर निशाना साधा

राफेल डील को लेकर कांग्रेस ने एक बार फिर मोदी सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने रूस के साथ हाल में हुए एके-103 असॉल्ट रायफल सौदे का जिक्र करते हुए कहा कि राफेल घोटाले में एक नया और दिलचस्प आयाम सामने आया है। पीएम और रक्षा मंत्री की तरफ से लगातार ये दावा किया जाता रहा है कि राफेल डील दो सरकारों के बीच का सौदा है और ऑफसेट का मामला दो कंपनियों के बीच का है।

अभिषेक मनु सिंघवी ने पूछा, “तो ऐसे में रूस के साथ एके 103 असॉल्ट रायफल सौदे में अलग प्रक्रिया क्यों अपनाई गई। उन्होंने कहा, “रूस के साथ हुए एके 103 असॉल्ट रायफल सौदे में भारत सरकार और रक्षा मंत्री ने रुस की मांग पर निजी कंपनी को ऑफसेट कॉन्ट्रैक्ट देने से मना कर दिया और कहा कि ऑफसेट ठेका सिर्फ सरकारी कंपनी को दे सकते हैं। आखिर ये अलग-अलग दोहरे मापदंड क्यों अपनाए गए?”

Published: 05 Sep 2018, 7:42 PM IST

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि जहां सरकारों के बीच कान्ट्रैक्ट होता है, वहां हस्तक्षेप सरकार का होता है। ऐसे में राफेल के मामले में क्या हुआ था ? उन्होंने कहा, “हम ये जानना चाहते हैं कि राफेल डील और एके 103 असॉल्ट रायफल सौदे में अंतर क्या है?”

Published: 05 Sep 2018, 7:42 PM IST

बता दें कि राफेल विमान सौदे को लेकर मचे बवाल के बाद मोदी सरकार ने हाल ही में रूस के साथ एके-103 रायफल के सौदे में रूस की उस मांग को ठुकरा दिया था, जिसमें अडानी समूह की कंपनी को साझीदार बनाने का आग्रह किया गया था।

इसे भी पढ़ें: राफेल सौदे पर विपक्षी दबाव से घबराई सरकार: राइफल सौदे में अडानी समूह को साझीदार बनाने की रूस की मांग ठुकराई

दरअसल, रूस को 3,000 करोड़ रुपये में भारतीय सेना के लिए एके-103 असॉल्‍ट रायफल बनाने का ठेका मिला है। रूस ने केंद्र की मोदी सरकार से इन रायफलों के उत्‍पादन के लिए अडानी समूह को अपना डील पार्टनर बनाने का आग्रह किया था। ऐसी साझीदारी को ऑफसेट कॉंट्रेक्ट कहा जाता है जो राफेल सौदे में फ्रांस की डसाल्ट कंपनी ने अनिल अंबानी समूह की रिलायंस डिफेंस के साथ किया है। रूस की तरफ से ऐसा ही प्रस्ताव मिलने पर मोदी सरकार ने मॉस्‍को के इस प्रस्‍ताव को ठुकरा दिया।

Published: 05 Sep 2018, 7:42 PM IST

Google न्यूज़नवजीवन फेसबुक पेज और नवजीवन ट्विटर हैंडल पर जुड़ें

प्रिय पाठकों हमारे टेलीग्राम (Telegram) चैनल से जुड़िए और पल-पल की ताज़ा खबरें पाइए, यहां क्लिक करें @navjivanindia

Published: 05 Sep 2018, 7:42 PM IST