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मुंबई में धारावी, बांद्रा के बाद अब गोरेगांव का प्रोजेक्ट भी अडानी को मिला, सरकार की मेहरबानी या...

यह परियोजना महाराष्ट्र के आवास इतिहास की सबसे बड़ी एकल पुनर्विकास परियोजनाओं में से एक है जहां लगभग 17 लाख वर्ग मीटर का क्षेत्र बिक्री के लिए विकसित किया जाएगा और इसका सीधा लाभ अडानी ग्रुप को मिलेगा जो इसे खुले बाजार में बेचेगा।

मुंबई में धारावी, बांद्रा के बाद अब गोरेगांव का प्रोजेक्ट भी अडानी को मिला, सरकार की मेहरबानी या...
मुंबई में धारावी, बांद्रा के बाद अब गोरेगांव का प्रोजेक्ट भी अडानी को मिला, सरकार की मेहरबानी या... फोटोः सोशल मीडिया

देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में सोना उगलने वाली जमीनों से जुड़ी झोपड़पट्टी और क्लस्टर पुनर्विकास परियोजनाओं पर अडानी ग्रूप का कब्जा लगातार बढ़ता जा रहा है। पहले एशिया की सबसे बड़ी झोपड़पट्टी धारावी (625 एकड़), उसके बाद बांद्रा रिक्लेमेशन (24 एकड़) और अब गोरेगांव स्थित मोतीलाल नगर (143 एकड़) के विकास का ठेका भी अडानी ग्रुप को मिल गया है।

धारावी के लिए डीएलएफ को पछाड़ने के बाद बांद्रा रिक्लेमेशन और मोतीलाल नगर की परियोजनाओं की ऊंची बोली लगाकर अडानी ग्रुप ने लार्सन एंड टूब्रो को भी पीछे कर दिया। इस तरह से अडानी ग्रुप ने मुंबई में हाल के वर्षों में पुनर्विकास की परियोजनाओं के माध्यम से बड़ी मात्रा में जमीन और विकास का अधिकार ले लिया है। पिछले साल अडानी ग्रुप की एक सहायक कंपनी ने दक्षिण मुंबई के कारमाइकल रोड पर 1.1 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया जो एक निजी संपत्ति है।

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विपक्ष इन तीनों परियोजनाओं को लेकर केंद्र और राज्य की महायुति सरकार पर अडानी ग्रुप पर मेहरबान होने का आरोप लगाता रहा है। दूसरी ओर अडानी ग्रुप कानूनी अड़चनों को सुप्रीम कोर्ट से दूर कराने में सफल रहा है। लेकिन धारावी और मोतीलाल नगर के रहवासी भी पारदर्शिता को लेकर आरोप लगा रहे हैं। धारावी में तो अब भी लोगों का आंदोलन जारी है।

सरकार का दावा है कि मोतीलाल नगर परियोजना की जमीन पर मालिकाना हक महाराष्ट्र हाउसिंग एंड एरिया डेवल्पमेंट अथॉरिटी (म्हाडा) का रहेगा। शुक्रवार को म्हाडा के उपाध्यक्ष और सीईओ संजीव जायसवाल ने मीडिया को बताया कि इस परियोजना के लिए लागत पहले 36000 करोड़ रुपये आंकी गई थी लेकिन अब इसमें निवेश एक लाख करोड़ रुपये तक हो सकता है। यह निवेश अडानी ग्रूप करेगा।

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मोतीलाल नगर देश की पहली आधुनिक टाउनशिप परियोजना है जहां 230 वर्ग फुट में रहने वाले परिवारों को रीडेवेलपमेंट प्रोजेक्ट के तहत 1600 वर्ग फुट का घर मुहैया कराया जाएगा। इस परियोजना के तहत नागरिकों के लिए सिर्फ घर नहीं बल्कि बेहतर खेल के मैदान, सामाजिक-सांस्कृतिक केंद्र, आधुनिक बिजनेस सेंटर समेत अन्य सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। इस परियोजना का निर्माण सी एंड डीए मॉडल के तहत किया जाएगा।

जायसवाल ने स्पष्ट किया है कि निवासियों के पुनर्वास को प्राथमिकता दी जाएगी। अडानी ग्रुप को परियोजना के तहत लगभग 10.5 लाख वर्ग मीटर का पुनर्वास कार्य करना है जिसे बाद में म्हाडा को सौंपा जाएगा। यहां 35,000 से अधिक परिवारों का पुनर्वास किया जाएगा।

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यह परियोजना महाराष्ट्र के आवास इतिहास की सबसे बड़ी एकल पुनर्विकास परियोजनाओं में से एक है जहां लगभग 17 लाख वर्ग मीटर का क्षेत्र बिक्री के लिए विकसित किया जाएगा और इसका सीधा लाभ अडानी ग्रुप को मिलेगा जो इसे खुले बाजार में बेचेगा।

विपक्ष ने धारावी की तरह बांद्रा रिक्लेमेशन और मोतीलाल नगर की निविदा प्रक्रिया में नियमों को तोड़ कर अडानी ग्रुप को अनुचित लाभ पहुंचाने का आरोप लगाया है। विपक्ष का दावा है कि धारावी के निवासियों के पुनर्वास और उनके अधिकारों को लेकर ठोस जानकारी नहीं दी गई जिससे स्थानीय लोगों में असंतोष फैला। इसी तरह का असंतोष मोतीलाल नगर में भी दिख रहा है।

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धारावी के अनुभव को देखते हुए मोतीलाल नगर की जनता और विपक्ष का सरकार पर भरोसा कम होता दिख रहा है। मोतीलाल नगर परियोजना में भी स्थानीय निवासियों ने पारदर्शिता की मांग की है। लेकिन अभी तक कोई ठोस जवाब नहीं मिला। विपक्ष का कहना है कि सरकार इन परियोजनाओं में मुंबई की जनता के हितों के बजाय कॉरपोरेट हितों को प्राथमिकता दे रही है।

सरकार के पास इन तीन परियोजनाओं के अलावा इसी तरह की म्हाडा की पांच और परियोजनाएं हैं जिस पर बिल्डिंग व्यवसाय से जुड़े कॉरपोरेट जगत की नजर टिकी है। इन परियोजनाओं में पहाड़ी गोरेगांव (140 एकड़), कमाठीपुरा (34 एकड़), जीटीबी नगर (74 एकड़), अभ्युदय नगर (26 एकड़) के अलावा चारकोप और गोराई सहित 200 एकड़ की क्लस्टर शामिल हैं। इसके लिए भी निविदा और मंजूरी की प्रक्रिया पर काम चल रहा है।

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