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राम मंदिर में चढ़ावे की रकम की चोरी पर खुलासा, गिनती के दौरान कर्मचारी निकाल लेते थे पैसे, SC में UP सरकार ने बताया

अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी पर यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि गिनती के दौरान कर्मचारी पैसे निकालकर बैंक में जमा करते थे।

फोटोः IANS
फोटोः IANS 

  • अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की रकम की कथित चोरी को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अहम जानकारी दी है।

  • सरकार की ओर से बताया गया कि दान की रकम की गिनती के दौरान कुछ कर्मचारी पैसे निकालकर कहीं निवेश कर देते थे या बैंक खातों में जमा कराते थे।

  • सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि मामले में आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है।

  • सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को मामले में आगे की कार्यवाही करने को कहा है और स्पष्ट किया है कि उसने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की है।

अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं की ओर से चढ़ाए गए दान की रकम में कथित हेराफेरी का मामला एक बार फिर चर्चा में है। उत्तर प्रदेश सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की रकम की चोरी गिनती के दौरान ही हुई थी। इस काम में कुछ ऐसे अधिकारी और कर्मचारी शामिल थे, जिन्हें दान में मिली रकम की गिनती की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि गिनती करने वाले लोग रकम निकालकर कहीं निवेश कर देते थे या उसे अपने बैंक खातों में जमा करा देते थे।

यह मामला मंदिर में श्रद्धालुओं की ओर से दिए गए चढ़ावे और नकदी के कथित दुरुपयोग से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सरकार ने जांच की स्थिति और अब तक हुई कार्रवाई की जानकारी दी। अदालत को बताया गया कि मामले की जांच पूरी होने के बाद आरोपपत्र भी दाखिल किया जा चुका है।

105 बार हुई नकदी निकालने की घटनाएं

इस मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) ने मंदिर परिसर में लगे CCTV कैमरों की फुटेज और दूसरे डिजिटल सबूतों की पड़ताल की थी। जांच में दान की रकम की गिनती वाले कमरे से कथित तौर पर नकदी निकालने या छिपाने की 105 घटनाएं सामने आई थीं। SIT ने इस मामले में आठ आरोपियों की पहचान की थी। जांच के दौरान 173 लोगों के बयान भी दर्ज किए गए थे।

जांच एजेंसी ने दान में मिली कीमती वस्तुओं की भी पड़ताल की थी। मंदिर के रिकॉर्ड में दर्ज 803 मूल्यवान वस्तुओं का भौतिक सत्यापन किया गया, जिनमें कोई गड़बड़ी नहीं मिली। इसके अलावा बिना रसीद वाली 86 कीमती वस्तुओं की भी अलग से जांच की गई थी। नकदी की कथित हेराफेरी और आरोपियों के वित्तीय लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों को आरोपपत्र में शामिल किया गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को दी आगे की कार्रवाई की छूट

सोमवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह मामले के गुण-दोष यानी आरोपों की सच्चाई या आरोपियों के दोषी होने पर कोई टिप्पणी नहीं कर रहा है। अदालत ने ट्रायल कोर्ट (न्यायिक मजिस्ट्रेट) को कानून के मुताबिक, मामले में आगे की कार्यवाही करने को कहा है। साथ ही याचिकाकर्ताओं को भी सुनवाई के दौरान अपनी बात रखने और ट्रायल में सहायता करने की अनुमति दी गई है।

इस आदेश के बाद अब मामले की आगे की सुनवाई निचली अदालत में होगी। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल जांच और आरोपपत्र के आधार पर मुकदमे की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का रास्ता साफ किया है। हालांकि, आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम फैसला ट्रायल कोर्ट को ही करना है।

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