
कर्नाटक सरकार ने दीपावली से पहले किसानों को राहत देते हुए गुरुवार को सूखा सहायता राशि की पहली किस्त जारी कर दी। सरकार ने यह भी घोषणा की कि अगले कुछ दिनों में 2,500 रुपए की दूसरी किस्त भी जारी की जाएगी। इसके साथ ही प्रत्येक किसान को कुल 5,000 रुपए की सहायता मिलेगी।
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और उपमुख्यमंत्री एवं राजस्व मंत्री जी. परमेश्वर ने बेंगलुरु के विधान सौधा में पहली किस्त जारी करने की शुरुआत की। सरकार ने इनपुट सब्सिडी के पहले चरण के तहत 1,260 करोड़ रुपए जारी किए हैं, जो पात्र किसानों के खातों में सीधे डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के जरिए भेजे जाएंगे।
मुख्यमंत्री शिवकुमार ने कहा कि सरकार ने प्रति एकड़ 2,500 रुपए की सहायता देने का फैसला किया है। यह सहायता अधिकतम दो एकड़ तक मिलेगी और एक किसान को कुल 5,000 रुपए तक दिए जाएंगे। सीएम शिवकुमार ने कहा, "आज हम 2,500 रुपए की पहली किस्त जारी कर रहे हैं। अगले 15 दिनों में धन की व्यवस्था कर दूसरी किस्त के रूप में 2,500 रुपए और दिए जाएंगे।"
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह राशि किसानों की जिंदगी पूरी तरह नहीं बदल सकती, लेकिन सरकार इस कठिन समय में उनके साथ खड़ी रहना चाहती है, खासकर जब दीपावली नजदीक है।उन्होंने कहा, "दशहरा बीत चुका है और दीपावली आने वाली है, लेकिन किसान मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। ऐसे समय में सरकार किसानों का सहारा बनना चाहती है।"
सीएम शिवकुमार ने बताया कि कर्नाटक इस समय गंभीर सूखे से जूझ रहा है। वैज्ञानिक आकलन और सरकारी मानकों के आधार पर राज्य के 226 तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने किसी राजनीतिक दबाव में आकर नहीं, बल्कि तय नियमों और रिपोर्टों के आधार पर सूखा घोषित किया है। सूखे की स्थिति का आकलन करने के लिए केंद्र सरकार की तीन टीमें भी राज्य का दौरा कर चुकी हैं।
मुख्यमंत्री के अनुसार, राज्य में करीब 57 लाख हेक्टेयर कृषि क्षेत्र प्रभावित हुआ है और किसानों को लगभग 62,000 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा, "हमने सूखे से जुड़ी पूरी जानकारी केंद्र सरकार को भेज दी है और 22,400 करोड़ रुपए की सहायता मांगी है।" शिवकुमार ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने का समय भी मांगा है ताकि सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के साथ सूखे की स्थिति पर चर्चा की जा सके।
उन्होंने कहा कि राजस्थान के बाद कर्नाटक उन राज्यों में है, जहां कृषि पर सबसे अधिक निर्भरता है और कम बारिश के कारण राज्य गंभीर संकट का सामना कर रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सूखे के कारण किसानों को बिजली और पीने का पानी उपलब्ध कराना भी बड़ी चुनौती बन गया है। सरकार अभी किसानों को मुफ्त बिजली देने पर करीब 20,000 करोड़ रुपए खर्च कर रही है, लेकिन सूखे के कारण यह खर्च बढ़कर लगभग 30,000 करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि पड़ोसी राज्यों में भी बिजली की कमी होने के कारण बिजली खरीदना मुश्किल हो गया है। शिवकुमार ने दोहराया कि राज्य सरकार अपने संसाधनों से किसानों को 5,000 रुपए की सहायता दे रही है और साथ ही केंद्र से सूखा राहत पैकेज की मांग भी जारी रखेगी। उन्होंने कहा कि विधानसभा में किए गए वादे के अनुसार अब किसानों के खातों में सीधे सहायता राशि भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
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