
कांग्रेस ने बिहार के सीवान में प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों के खिलाफ एक पुलिसकर्मी द्वारा कथित तौर पर एके-47 का इस्तेमाल किए जाने को लेकर सोमवार को बीजेपी पर ‘बर्बरता’ का आरोप लगाया और सवाल किया कि क्या अब बीजेपी की सरकारों में विद्यार्थी ‘आतंकवादी’ हो गए हैं।
सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस कांस्टेबल एके-47 राइफल का इस्तेमाल करता दिखाई दे रहा है। हालांकि हम इस वीडियो की प्रामाणिकता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता।
सीवान के पुलिस अधीक्षक (एसपी) पूरण कुमार झा ने कहा, ‘‘वीडियो में दिखाई दे रहा कांस्टेबल जिला आसूचना इकाई (डीआईयू) में तैनात है, जिसे तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है।’’
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने दावा किया कि बिहार में प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों पर एके-47 से गोली चलाए जाने और सैकड़ों विद्यार्थियों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किए जाने की खबरें आ रही हैं।
उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से सवाल किया, ‘‘कहां गया आपका वादा कि विद्यार्थियों पर कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की जाएगी और उन्हें रिहा कर दिया जाएगा?’’ कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि इसके विपरीत विद्यार्थियों पर घातक हमले और ‘‘बर्बरता’’ की जा रही है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में विद्यार्थियों पर ‘पैलेट’ गन का और बिहार में एके-47 का इस्तेमाल किया गया।
राहुल गांधी ने कहा, ‘‘मोदी जी, देश के विद्यार्थियों से माफ़ी मांगिए और जिन्होंने विद्यार्थियों हमला किया है, उन्हें कुचला है, उनपर कार्रवाई कीजिए, न कि विद्यार्थियों पर।’’ एके-47 राइफलों के इस्तेमाल की खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाद्रा ने कहा कि प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थी आतंकवादी नहीं हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘बिहार और पश्चिम बंगाल में अब भी विद्यार्थियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जा रही है। मैंने सुना है कि प्रदर्शन में शामिल लड़कियों के माता-पिता को फोन कर पूछा गया कि उन्होंने अपनी बेटियों को प्रदर्शन में शामिल होने की अनुमति क्यों दी। हालांकि मैं व्यक्तिगत रूप से इसकी पुष्टि नहीं कर सकती।’’
उन्होंने कहा, ‘‘क्या लड़कियां प्रदर्शन नहीं कर सकतीं? पैलेट गन, एके-47 का इस्तेमल किया गया? क्या वे आतंकवादी हैं? इन लोगों (सरकार) को क्या हो गया है?’’
कांग्रेस के संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने इस मुद्दे को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर हमला बोला।
वेणुगोपाल ने संसद भवन परिसर में संवाददाताओं से कहा, ‘‘अमित शाह कहां छिपे हैं? उन्हें बताना चाहिए कि बिहार में एके-47 और दिल्ली में विद्यार्थियों के प्रदर्शनों के दौरान पेलेट गन के इस्तेमाल का आदेश किसने दिया।’’
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने भी कहा कि मूल सवाल यह है कि क्या निहत्थे और अहिंसक प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पैलेट गन या एके-47 राइफलों का इस्तेमाल उचित है।
उन्होंने कहा, ‘‘इसका जवाब है- बिल्कुल नहीं। उच्चतम न्यायालय ने प्रदर्शनों से निपटने के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया तय की है। अधिकारियों को पहले निषेधाज्ञा की घोषणा करनी चाहिए, फिर जरूरत पड़ने पर पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए, उसके बाद लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल होना चाहिए। केवल सबसे गंभीर परिस्थितियों में ही ड्यूटी मजिस्ट्रेट या मौके पर मौजूद सबसे वरिष्ठ पुलिस अधिकारी गोली चलाने का आदेश दे सकता है।’’
तिवारी ने कहा, ‘‘बिहार में निहत्थे विद्यार्थियों के साथ जो हुआ, वह बर्बर, अमानवीय और अत्याचार था। उच्चतम स्तर से स्पष्ट आदेश के बिना अत्यधिक और दमनकारी बल का इस्तेमाल कभी नहीं किया जाना चाहिए।’’
बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए आरोप लगाया था कि ‘बिहार बंद’ के दौरान सीवान में पुलिस ने छात्रों पर एके-47 से सीधे गोलीबारी की। उन्होंने इस घटना के लिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को जिम्मेदार ठहराया था।
तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा था, ‘‘सीवान में प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने विद्यार्थियों पर एके-47 से सीधे गोली चलाई। सात हत्या के मामलों का आरोपी जब मुख्यमंत्री बन जाए, तब लोकतंत्र में पुलिस निर्दोष छात्रों पर इसी तरह गोलियां चलाती है।’’
तेजस्वी यादव का इशारा मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की ओर था, जिन्हें वह अक्सर ‘‘हत्या के सात मामलों के आरोपी’’ बताकर निशाना साधते रहते हैं।
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