
तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने बारुईपुर में 11 वर्षीय लड़की से दुष्कर्म और हत्या के विरोध में बुधवार को कोलकाता में उनकी पार्टी के प्रदर्शन मार्च को बाधित करने का बीजेपी पर आरोप लगाया। बनर्जी ने आरोप लगाया कि रैली की इजाज़त देने वाले कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश को लागू करने के बजाय पुलिस ने बीजेपी की एक ‘‘शाखा’’ के तौर पर काम किया।
दक्षिण कोलकाता के हाजरा क्रॉसिंग पर प्रदर्शन मार्च के समापन के बाद एक सभा को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि बीजेपी समर्थकों ने रैली को बाधित किया और मार्ग में कई स्थानों पर तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की। उन्होंने इस दौरान पुलिस पर भी गंभीर आरोप लगाए।
उन्होंने कहा, ‘‘उच्च न्यायालय ने हमारी रैली को अनुमति दी थी, लेकिन बीजेपी के गुंडों ने इसे रोक दिया। रैली की अनुमति देने वाले अदालत के आदेश को पुलिस कैसे नजरअंदाज कर सकती है? बीजेपी के गुंडों ने हमारे पार्टी कार्यकर्ताओं को पीटा। कई कार्यकर्ता गंभीर रूप से घायल हुए हैं। क्या यही लोकतंत्र है?’’
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि पुलिस निष्पक्ष तरीके से अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रही और पुलिस बल बीजेपी संगठन का एक शाखा बन गया है। उन्होंने कहा, ‘‘पुलिस आम लोगों को सुरक्षा उपलब्ध नहीं करा पा रही है और हमारे कार्यक्रम को विफल करने के लिए उसका इस्तेमाल किया जा रहा है।’’
तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने यह भी आरोप लगाया कि उन पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे इस तरह पुलिस निगरानी में रखा गया है, जैसे मैं नजरबंद हूं।’’ बीजेपी पर तीखा हमला करते हुए बनर्जी ने आरोप लगाया, ‘‘जिन लोगों ने राम मंदिर के चढ़ावे में लूट की, वे भगवान राम के नाम पर यहां अशांति फैला रहे हैं।’’
ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस के युवा कार्यकर्ताओं द्वारा आयोजित यह रैली कलकत्ता उच्च न्यायालय से अनुमति मिलने के बाद दक्षिण कोलकाता के बालीगंज फाड़ी से शुरू हुई थी। हाजरा रोड पर प्रदर्शन मार्च के रास्ते में बीजेपी कार्यकर्ताओं ने कई बार इसे बाधित किया। उन्होंने ‘‘चोर’’ के नारे लगाए और मानव शृंखला बनाकर रास्ता रोकने का भी प्रयास किया। इस दौरान बीजेपी और टीएमसी युवा इकाई के कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हुई, जिसके बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया।
बारुईपुर में 11 वर्षीय बच्ची के साथ रेप और उसकी हत्या के विरोध में टीएमसी ने कोलकाता में यह विरोध रैली आहूत की थी। कलकत्ता उच्च न्यायालय से अनुमति मिलने के बाद टीएमसी की युवा शाखा के कार्यकर्ताओं की यह रैली दक्षिण कोलकाता के बालीगंज फाड़ी से शुरू हुई। इस रैली को बीजेपी कार्यकर्ताओं ने रास्ते में कई बार रोकने की कोशिश की। बीजेपी कार्यकर्ताओं ने "चोर-चोर" के नारे लगाए और हाजरा रोड पर रैली के मार्ग के बीच में खड़े होकर रास्ता रोकने का प्रयास किया। इस दौरान दोनों पक्षों के उग्र कार्यकर्ताओं के बीच हाथापाई हुई। स्थिति पर काबू पाने के लिए सुरक्षा बलों को हल्का लाठीचार्ज करना पड़ा।
प्रदर्शन कर रहे बीजेपी कार्यकर्ताओं का कहना था कि तृणमूल कांग्रेस को बारुईपुर की घटना पर विरोध रैली निकालने का "कोई अधिकार नहीं है।" उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी सरकार "महिलाओं के खिलाफ अपराध करने वाले अपराधियों को संरक्षण देती आई है" और अक्सर ऐसी घटनाओं को "छोटी घटना" बताकर टाल देती है। हालांकि, प्रदर्शनकारी तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया।
इससे पहले, कलकत्ता उच्च न्यायालय ने मंगलवार को कोलकाता पुलिस के उस आदेश को रद्द कर दिया था जिसमें रैली की अनुमति नहीं दी गई थी। अदालत ने कुछ कड़ी शर्तों के साथ तृणमूल कांग्रेस को इस आयोजन की इजाजत दी थी। आम लोगों को होने वाली असुविधा को कम करने के लिए अदालत ने रैली के मार्ग में थोड़ा बदलाव किया था और इसका समापन बिंदु शरत बोस रोड पर स्थित लैंसडाउन मार्केट के बजाय हाजरा क्रॉसिंग तय किया था।
अदालत ने रैली के समय में भी बदलाव करते हुए इसे दोपहर 2:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक कर दिया था, जबकि पहले यह दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक प्रस्तावित थी। इसके साथ ही लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर रोक लगाते हुए केवल हाथ वाले माइक का उपयोग करने की अनुमति दी गई थी। अदालत ने रास्ते का एक हिस्सा यातायात के लिए खुला रखने और रैली में शामिल लोगों की संख्या 1,000 से अधिक न होने की शर्त भी रखी थी। रैली में शामिल तृणमूल कांग्रेस नेताओं ने अपने समर्थकों से शांति और अनुशासन बनाए रखने की अपील की और बीजेपी पर कार्यक्रम में व्यवधान डालने का आरोप लगाया।
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