
लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) का प्रतिनिधित्व करने वाले भारतीय उद्यमी संघ (एआईई) ने केंद्रीय बजट में सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्यमों के लिए विशिष्ट घोषणाओं का अभाव बताते हुए इसे अपेक्षाओं से विपरीत बताया।
एआईई के चेयरमैन (राष्ट्रीय) के. ई. रघुनाथन ने कहा, "यह एक निराशाजनक बजट है जो भविष्य के प्रति चिंता बढ़ाता है। यह ऐसा बजट है जो राहत की बात नहीं करता।’’
उन्होंने कहा, "जीएसटी को मूल्य वर्धित कर मॉडल के अनुरूप पुनर्गठित किया जाना चाहिए था। जिस प्रकार कॉरपोरेट को उत्पादन-संबंधित प्रोत्साहन (पीएलआई) दिए जाते हैं, उसी प्रकार लघु एवं सूक्ष्म उद्यमों को भी 'मूल्य वर्धित प्रोत्साहन' दिया जाना चाहिए था।"
शिवसेना (UBT) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने केंद्रीय बजट 2026 पर कहा, "बजट में खास ये है कि सारे बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के सेक्टर रेड में है और निफ्टी लगातार गिरावट में है। उनसे जो अपेक्षा थी कि सारे भू-राजनीतिक अर्थव्यवस्था पर एक तनाव पड़ा है उस पर दशा और दिशा दिखाएंगे लेकिन उसमें ये फेल हुआ है..इसमें आम आदमी के लिए कोई राहत की सांस नहीं है न कोई कर कटौती है न कोई GST में राहत है ये सब दुर्भाग्यपूर्ण हैं।"
पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2026-27 का बजट पेश किया है, और मेरे पास इस पर एक छोटा सा शुरुआती बयान है। हर बजट से पहले टिप्पणी करने वाला और लेखक, और अर्थशास्त्र का हर छात्र, आज संसद में वित्त मंत्री के भाषण में जो कुछ भी सुना, उससे हैरान होगा। मैं मानता हूं कि बजट सिर्फ सालाना आय और खर्च का बयान नहीं होता। मौजूदा हालात में, बजट भाषण में एक ऐसी कहानी होनी चाहिए जो कुछ दिन पहले जारी किए गए आर्थिक सर्वेक्षण में बताई गई बड़ी चुनौतियों का समाधान करे।
मुझे यकीन नहीं है कि सरकार और वित्त मंत्री ने आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 पढ़ा था या नहीं। अगर उन्होंने पढ़ा था, तो ऐसा लगता है कि उन्होंने इसे पूरी तरह से नज़रअंदाज़ करने का फैसला किया है, और लोगों पर शब्दों का बौछार फेंकने के अपने पसंदीदा काम पर वापस आ गए हैं।
मैं आर्थिक सर्वेक्षण और कई जानकार विशेषज्ञों द्वारा पहचानी गई कम से कम 10 चुनौतियों को गिन सकता हूं।
1. संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ ने निर्माताओं, खासकर निर्यातकों के लिए तनाव पैदा किया है;
2. लंबे समय तक चलने वाले व्यापारिक संघर्ष जो निवेश पर असर डालेंगे;
3. बढ़ता व्यापार घाटा, खासकर चीन के साथ;
4. कम सकल निश्चित पूंजी निर्माण (लगभग 30 प्रतिशत) और निजी क्षेत्र की निवेश करने में अनिच्छा;
5. भारत में FDI (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) के प्रवाह के लिए अनिश्चित दृष्टिकोण और पिछले कई महीनों से FPI का लगातार निकलना
6. FRBM के विपरीत, राजकोषीय समेकन की बहुत धीमी गति और लगातार उच्च राजकोषीय घाटा और राजस्व घाटा;
7. आधिकारिक तौर पर घोषित मुद्रास्फीति के आंकड़ों और घरेलू खर्च, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और परिवहन के बिलों के मामले में जमीनी हकीकत के बीच लगातार अंतर;
8. लाखों MSME का बंद होना और बाकी MSME के अस्तित्व के लिए संघर्ष;
9. खतरनाक रोज़गार की स्थिति, खासकर युवा बेरोज़गारी;
10. बढ़ता शहरीकरण और शहरी क्षेत्रों (नगर पालिकाओं और निगमों) में बिगड़ता बुनियादी ढांचा।इनमें से किसी भी मुद्दे को वित्त मंत्री के भाषण में संबोधित नहीं किया गया। इसलिए यह आश्चर्यजनक नहीं था कि तालियाँ औपचारिक-सी थीं और अधिकांश श्रोता बहुत जल्दी ध्यान हटाकर अलग हो गए। यहाँ तक कि संसद टीवी द्वारा किया गया प्रसारण भी कुछ बार बंद हो गया!
एक अकाउंटेंट के मानकों से भी देखें तो 2025-26 में वित्त प्रबंधन का यह एक बेहद खराब लेखा-जोखा था।
राजस्व प्राप्तियाँ 78,086 करोड़ रुपये कम रहीं, कुल व्यय 1,00,503 करोड़ रुपये कम रहा। राजस्व व्यय 75,168 करोड़ रुपये कम रहा और पूंजीगत व्यय में 1,44,376 करोड़ रुपये की कटौती की गई (केंद्र 25,335 करोड़ रुपये और राज्य 1,19,041 करोड़ रुपये)।
इस दयनीय प्रदर्शन की व्याख्या करने के लिए एक शब्द तक नहीं कहा गया। वास्तव में, केंद्र का पूंजीगत व्यय 2024-25 में GDP के 3.2 प्रतिशत से घटकर 2025-26 में 3.1 प्रतिशत रह गया है।
राजस्व व्यय में की गई कटौतियाँ उन मदों में पड़ी हैं जो आम लोगों से संबंधित हैं। उदाहरण:
• ग्रामीण विकास: Rs 53,067 करोड़
• शहरी विकास: Rs 39,573
• सामाजिक कल्याण: Rs 9,999
• कृषि: Rs 6,985
• शिक्षा: Rs 6,701
• स्वास्थ्य: Rs 3,686
महत्वपूर्ण सेक्टर्स और कार्यक्रमों में धनराशि में कटौती की गई है। बहुप्रचारित जल जीवन मिशन पर किया गया व्यय निर्दयतापूर्वक 67,000 करोड़ रुपये से घटाकर मात्र 17,000 करोड़ रुपये कर दिया गया। (2026-27 में इसे बढ़ाकर 67,670 करोड़ रुपये किया गया है, लेकिन इस आँकड़े की क्या विश्वसनीयता है?)
कई महीनों तक चले अभ्यास के बाद, राजकोषीय घाटे (FD) का संशोधित अनुमान (RE) बजट अनुमान (BE) के अनुरूप 4.4 प्रतिशत पर ही टिका रहा है, और 2026-27 के लिए यह अनुमान है कि FD GDP के मात्र 0.1 प्रतिशत तक ही घटेगा। राजस्व घाटा 1.5 प्रतिशत पर स्थिर रहेगा। यह निश्चित रूप से वित्तीय अनुशासन और समेकन की दिशा में कोई साहसिक अभ्यास नहीं है।
बजट भाषण की सबसे गंभीर आलोचना यह है कि वित्त मंत्री योजनाओं, कार्यक्रमों, मिशनों, संस्थानों, इनिशिएटिव, फंडों, समितियों, हब्स आदि की संख्या बढ़ाते जाने से थकती नहीं हैं। मैंने कम से कम 24 की गिनती की है। मैं आपकी कल्पना पर छोड़ता हूँ कि इनमें से कितने अगले साल तक भुला दिए जाएंगे और गायब हो जाएंगे।
अंत में, भाषण के भाग बी पर।
आयकर अधिनियम, 2026 के पारित होने के महीनों बाद- जो 1 अप्रैल, 2026 से लागू होगा- वित्त मंत्री ने कुछ दरों में छेड़छाड़ की है।
यद्यपि अनेक छोटे-छोटे परिवर्तनों के प्रभाव की सावधानीपूर्वक जाँच की जानी होगी, यह याद रखना चाहिए कि लोगों के विशाल बहुमत का आयकर या आयकर दरों से कोई सरोकार नहीं है। जहाँ तक अप्रत्यक्ष करों का संबंध है, औसत व्यक्ति केवल भाषण के अनुच्छेद 159, 160 और 161 से ही चिंतित होगा। मैं इन छोटी रियायतों का स्वागत करता हूँ।
हमारा निष्कर्ष यह है कि बजट भाषण और बजट, आर्थिक रणनीति और आर्थिक राजनेतृत्व (economic statesmanship) की कसौटी पर खरे नहीं उतरते।
मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जितेंद्र (जीतू) पटवारी ने केंद्रीय बजट 2026 पर कहा, "प्रधानमंत्री मोदी ने 2014 में 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का वादा किया था... कृषि को लेकर उनके जो भाषण थे, इस बार उनके विपरीत बजट आया है..."
केंद्रीय बजट 2026 पर RJD सांसद मीसा भारती ने कहा, "हमें बजट समझ नहीं आ रहा है। इसमें बड़े-बड़े वादे किए गए हैं। आज तक जितने बजट पेश किए गए हैं उनमें वादे किए गए हैं लेकिन उसके अनुरूप सरकार काम नहीं करती है। इसमें महिलाओं, किसानों, युवाओं और रेलवे पर कुछ नहीं कहा गया है... इस बार बजट समझ से परे है।"
बजट पर कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, मोदी सरकार के पास अब नए विचार खत्म हो चुके हैं। यह बजट भारत की गंभीर आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक चुनौतियों के समाधान देने के बजाय और अधिक सवाल खड़े करता है। इसमें गरीबों के लिए कुछ भी नहीं है। महंगाई पर काबू पाने के लिए न तो कोई समाधान दिया गया है, न कोई सकारात्मक सुझाव और न ही कोई ठोस कदम।
आर्थिक सर्वेक्षण में बताया गया है कि व्यापारिक अनिश्चितता भारत के लिए एक बड़ी चुनौती है, लेकिन बजट में इस समस्या को लगभग नजरअंदाज कर दिया गया है। इसी तरह, रुपये के गिरते मूल्य से निपटने की कोई योजना नहीं है।
बजट में उपभोक्ता मांग को पुनर्जीवित करने का कोई इरादा नहीं दिखता। घरेलू बचत में गिरावट और व्यक्तिगत कर्ज के बढ़ते बोझ को भी अनदेखा किया गया है।
शिक्षित युवाओं में फैली व्यापक बेरोजगारी की समस्या का भी कोई समाधान नहीं है। वित्त आयोग की सिफारिशों पर और अध्ययन की आवश्यकता है, लेकिन वे गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रहे राज्य सरकारों को कोई राहत देती नहीं दिखतीं।
असमानता ब्रिटिश राज के समय से भी अधिक बढ़ चुकी है, लेकिन बजट में इसका जिक्र तक नहीं है। न ही अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों, अन्य पिछड़ा वर्ग, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों या अल्पसंख्यकों के लिए किसी तरह की सहायता का कोई प्रावधान किया गया है।”
Union Budget 2026 पर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा, "हमें उम्मीद थी कि किसानों और युवाओं को कुछ मिलेगा, लेकिन सबको खाली हाथ मिला... उन्होंने उस इंडस्ट्री के बारे में बात भी नहीं की जो 50% टैरिफ की वजह से बर्बाद हो गई, जिसके बारे में ट्रंप लगातार बात करते थे।
केंद्रीय बजट को लेकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि बजट में जिन तीन कॉरिडोर की बात की जा रही है, वह पूरी तरह से झूठ और भ्रामक है।
ममता बनर्जी ने कहा, “तीन कॉरिडोर को लेकर जो बातें कही जा रही हैं, वह सरासर झूठ है। यह काम पहले से ही प्रक्रिया में है और हमने वहां काम शुरू कर दिया है। पुरुलिया के जंगलमहल क्षेत्र में जंगल सुंदरी प्रोजेक्ट के तहत इस आर्थिक कॉरिडोर में 72 हजार करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने बंगाल को एक पैसा भी नहीं दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा, “उन्होंने बंगाल को एक भी पैसा नहीं दिया। सिर्फ एक टैक्स है- जीएसटी। वे हमारा ही पैसा ले रहे हैं और यह कह रहे हैं कि वे हमें दे रहे हैं। यह हमारा पैसा है।”
केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि उसे देश चलाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा, “इस तरह सरकार चलाने और देश को खत्म करने का उन्हें कोई नैतिक अधिकार नहीं है। ये देश की आर्थिक व्यवस्था, संवैधानिक ढांचे और स्वतंत्र संस्थाओं को नष्ट करना चाहते हैं।”
मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार बातें बहुत करती है, लेकिन काम बहुत कम करती है।
वित्त मंत्री ने संसद में वित्त वर्ष 2026-27 का आम बजट पेश कर दिया है। इस बजट में सरकार की प्राथमिकताएं साफ तौर पर दिखाई देती हैं, जहां बुनियादी ढांचे और सुरक्षा पर सबसे ज्यादा जोर दिया गया है।
बजट आवंटन के मामले में परिवहन मंत्रालय सबसे आगे रहा है। सरकार ने इस मंत्रालय के लिए 5,98,520 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जो किसी भी मंत्रालय को दिया गया सबसे बड़ा बजट है। इसके ठीक बाद रक्षा मंत्रालय दूसरे स्थान पर रहा, जिसे 5,94,585 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
तीसरे स्थान पर ग्रामीण विकास मंत्रालय रहा है, जिसे 2,73,108 करोड़ रुपये मिले हैं। वहीं, गृह मंत्रालय को चौथे नंबर पर 2,55,234 करोड़ रुपये का बजट दिया गया है। कृषि मंत्रालय को इस बार 1,62,671 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जिससे किसानों और कृषि क्षेत्र को मजबूती देने का संकेत मिलता है।
इसके अलावा, शिक्षा मंत्रालय के लिए 1,39,289 करोड़ रुपये, ऊर्जा मंत्रालय के लिए 1,09,029 करोड़ रुपये और स्वास्थ्य मंत्रालय के लिए 1,04,599 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। शहरी विकास मंत्रालय को 85,522 करोड़ रुपये मिले हैं।
बजट आवंटन की सूची में आईटी और टेलीकॉम मंत्रालय दसवें स्थान पर रहा है, जिसे 74,560 करोड़ रुपये दिए गए हैं।
कुल मिलाकर, बजट 2026-27 में सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर, रक्षा और ग्रामीण विकास को प्राथमिकता देते हुए विकास और सुरक्षा के संतुलन पर फोकस किया है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का संबोधन खत्म हो गया। इसके साथ ही लोकसभा की कार्यवाही आज के लिए स्थगित हो गई है।
शेयर मार्केट में बजट का नेगिटिव प्रभाव जारी है, एक ओर जहां सेंसेक्स डे हाई 2800 से ज्यादा प्वाइंट टूटा तो वहीं निफ्टी भी 800 से ज्यादा प्वाइंट टूटा
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, 'मैं छोटे करदाताओं के लिए एक नई योजना का प्रस्ताव करती हूं, जिसमें एक नियम आधारित स्वचालित सिस्टम के ज़रिए कम या शून्य TDS डिडक्शन सर्टिफिकेट प्राप्त किया जा सकेगा। इसके लिए अब असेसिंग ऑफिसर को आवेदन देने की आवश्यकता नहीं होगी। टैक्सपेयर्स की सुविधा के लिए, जिनके पास कई कंपनियों की सिक्योरिटीज़ हैं, मैं प्रस्ताव करती हूँ कि डिपॉजिटरीज़ Form 15G या Form 15H निवेशक से स्वीकार कर सकें और उन्हें सीधे संबंधित कंपनियों को भेज सकें।'
आयकर कानूनों, टैक्स कलेक्शन से जुड़े ऐलान
नया इनकम टैक्स एक्ट 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा।
शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए TCS रेट घटाया गया। यह 5% से घटाकर 2% किया जाएगा।
रिटर्न संशोधन का समय बढ़ाया गया। नाममात्र फीस देकर रिवाइज रिटर्न फाइल करने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा।
ITR फाइलिंग की समयसीमा
ITR 1 और ITR 2 फाइल करने वाले 31 जुलाई तक फाइल कर सकेंगे।
Non audit business cases और Trusts के लिए रिटर्न फाइल करने की अंतिम तिथि 31 अगस्त होगी।
प्रॉपर्टी बेचने वाले NRI पर TDS नियम में बदलाव
अब TDS की कटौती निवासी खरीदार करेगा
पहले TAN की आवश्यकता होती थी, वह अब नहीं होगी।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारण ने नए इनकम टैक्स को लेकर बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि इनकम टैक्स फॉर्म को आसान किया जाएगा। एक अप्रैल, 2026 से नया कानून लागू हो जाएगा। इस कानून में तकनीकी खामी को दंड से जुर्माने में बदलने का प्रस्ताव है। छोटे टैक्स अपराधों में सिर्फ जुर्माना लगेगा। विदेश यात्रा पर लगने वाले टैक्स कम। विदेश यात्रा टीसीएस दर 5 फीसदी हुई। 31 जुलाई तक रिटर्न दाखिल कर सकते हैं। इस कानून में अघोषित आय एक करोड़ रुपये तक करने का प्रस्ताव है।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि विदेश यात्रा कार्यक्रम पैकेज की बिक्री पर TCS दर अब 2% होगी, जो पहले 5% और 20% थी। इसके लिए किसी राशि की शर्त नहीं होगी। उन्होंने यह भी बताया कि मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल से किसी व्यक्ति को मिले ब्याज पर अब आयकर नहीं लगेगा और इस पर TDS भी नहीं काटा जाएगा
केंद्रीय बजट के बाद शेयर बाजार में नकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली। कारोबार के दौरान सेंसेक्स करीब 300 अंकों की बढ़त के साथ ऊपर जाने के बाद अचानक दबाव में आ गया और अंत में गिरावट के साथ कारोबार करता दिखा। वहीं निफ्टी भी बढ़त बनाए रखने में नाकाम रहा और लाल निशान में फिसल गया।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने उत्तर-पूर्वी भारत में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए नई पहल का ऐलान किया है। उन्होंने बताया कि नॉर्थ ईस्ट के राज्यों में बुद्ध सर्किट विकसित किया जाएगा। यह सर्किट अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, असम, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में स्थापित होगा, जिससे धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री ने इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को लेकर सरकार की प्राथमिकताओं और आगामी योजनाओं का खाका पेश किया। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में बुनियादी ढांचे में निवेश पर लगातार जोर दिया गया है और यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। खास तौर पर पांच लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में इन्फ्रा डेवलपमेंट को गति दी जाएगी।
वर्ष 2026-27 के लिए पूंजीगत व्यय को बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव
इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के लिए आंशिक ऋण गारंटी उपलब्ध कराने हेतु इन्फ्रा रिस्क गारंटी फंड की स्थापना
समर्पित REIT के माध्यम से रियल एस्टेट परिसंपत्तियों की रिसाइक्लिंग प्रक्रिया को तेज करने की योजना
कार्गो के पर्यावरण के अनुकूल परिवहन को प्रोत्साहित करने के लिए नए उपाय और प्रस्ताव
पूर्व में डानकूनी से लेकर पश्चिम में सूरत तक डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के निर्माण की घोषणा
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण में कहा कि हमारा 2-3 शहरों और मंदिरों वाले शहरों पर फोकस रहेगा। इसके लिए 5000 करोड़ का एलोकेशन किया जा रहा है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण में कहा कि देश में हेल्थ प्रमोशन के लिए मौजूदा इंस्टीट्यूट्स अपग्रेड होंगे। साथ ही 1.5 केयर गिवर्स को ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके अलावा 5 रीजनल मेडिकल हब बनाए जाएंगे। ये हब कई तरह के जॉब के मौके खोलेंगे।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण में स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार को लेकर कई अहम घोषणाएं कीं।
रोजगार और सेवा क्षेत्र
शिक्षा से रोजगार और उद्यमिता को जोड़ने पर विशेष फोकस
विकसित भारत के लिए सेवा क्षेत्र को कोर ड्राइवर के रूप में विकसित किया जाएगा
AI समेत नई तकनीकों के प्रभाव का आकलन करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन
दक्षता आधारित रोजगार
स्किल आधारित रोजगार को बढ़ावा
स्वास्थ्य पेशेवर तैयार करने वाले संस्थानों का अपग्रेडेशन
रेडियोलॉजी, एनेस्थीसिया जैसे विशेष क्षेत्रों पर जोर
अगले 5 वर्षों में 1 लाख एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल (AHP) जोड़े जाएंगे
1.5 लाख केयर गिवर्स को प्रशिक्षण दिया जाएगा
स्वास्थ्य और मेडिकल टूरिज्म
मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए 5 क्षेत्रीय मेडिकल हब की स्थापना
निजी क्षेत्र की भागीदारी के साथ हेल्थकेयर कॉम्प्लेक्स विकसित होंगे
कॉम्प्लेक्स में आयुष केंद्र, डायग्नोस्टिक, पोस्ट केयर और रीहैबिलिटेशन सेंटर शामिल होंगे
इससे स्वास्थ्य क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे
योग और आयुर्वेद
प्राचीन योग पद्धति और आयुर्वेद को बढ़ावा
तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेदिक संस्थानों की स्थापना
जामनगर में एक रिसर्च सेंटर बनाया जाएगा
लोन लिंक्ड कैपिटल सपोर्ट स्कीम का भी ऐलान किया
ऑरेंज इकोनॉमी
गेमिंग, कॉमिक्स जैसे सेक्टर में 2030 तक 20 लाख पेशेवरों की जरूरत
AVGC कंटेंट क्रिएटर लैब्स स्थापित की जाएंगी
पूर्वी भारत में नए राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान की स्थापना
शिक्षा
बड़े औद्योगिक और लॉजिस्टिक कॉरिडोर के पास 5 यूनिवर्सिटी टाउनशिप बनाई जाएंगी
हर जिले में एक महिला छात्रावास का निर्माण
पर्यटन
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हॉस्पिटैलिटी की स्थापना
20 प्रमुख पर्यटन स्थलों पर 10 हजार गाइड्स के कौशल उन्नयन की योजना
नेशनल डेस्टिनेशन डिजिटल नॉलेज ग्रिड की शुरुआत
वर्ल्ड ट्रैकिंग एंड हाइकिंग: हिमाचल, उत्तराखंड और जम्मू कश्मीर, अराक्कू घाटी में माउंटेन ट्रेल्स बनेंगे। ओडिशा, कर्नाटक, केरल में टर्टल ट्रेल्स बनेंगे।
खेल
खेलो इंडिया मिशन की स्थापना होगी। अगले 10 वर्ष में इसके तहत काम किया जाएगा। इसके तहत प्रशिक्षण केंद्र बनाएंगे।
व्यवस्थित तरीके से कोच और सपोर्ट स्टाफ को प्रशिक्षित किया जाएगा। प्रतियोगिताएं और लीग होंगी।
खेल ढांचे को प्रशिक्षण और प्रतियोगिता के लिए विकसित किया जाएगा।
इसके अलावा अपने बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री ने बताया कि पांच वर्ष में 20 नए जल मार्ग शुरू होंगे। वाराणसी और पटना में जहाज मरम्मत सुविधा स्थापित होगी। समुद्री विमान वीजीएफ योजना की शुरुआत होगी।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण को दौरान बताया कि AI का इस्तेमाल बहुत बड़े लेवल पर होगा। AI मिशन, क्वांटम मिशन, इनोवेशन फंड के जरिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल होगा।
लोकसभा में बजट भाषण देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि देश का बैंकिंग सिस्टम इस समय मजबूत स्थिति में है और बैंकों की बैलेंसशीट सुदृढ़ बनी हुई है। उन्होंने बताया कि ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए बैंकिंग सेक्टर के लिए एक हाई लेवल कमेटी का गठन किया जाएगा।
वित्त मंत्री ने यह भी घोषणा की कि पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (PFC) और REC की रीस्ट्रक्चरिंग की जाएगी। इसके अलावा कॉरपोरेट बॉन्ड मार्केट को बढ़ावा देने के लिए टोटल रिटर्न स्वैप की शुरुआत होगी। नगर निकायों को वित्तीय रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से म्यूनिसिपल बॉन्ड के लिए 100 करोड़ रुपये की विशेष योजना लाने का भी ऐलान किया गया।
बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश में रेल कनेक्टिविटी को नई रफ्तार देने का ऐलान किया। उन्होंने बताया कि भारत में छह हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे। प्रस्तावित कॉरिडोर में मुंबई-पुणे, पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-चेन्नई, चेन्नई-बेंगलुरु, दिल्ली-वाराणसी और वाराणसी-सिलीगुड़ी रूट शामिल हैं। इन परियोजनाओं से प्रमुख शहरों के बीच यात्रा समय घटेगा और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ऐलान किया है कि ओडिशा, केरल और छत्तीसगढ़ में माइनिंग कॉरिडोर बनाया जाएगा।
वित्त मंत्री ने घोषणा की कि छोटे और मझोले उद्यमों (SME) को मजबूती देने के लिए 10 हजार करोड़ रुपये का ग्रोथ फंड बनाया जाएगा। इसके साथ ही सरकार टेक्सटाइल सेक्टर को भी प्रोत्साहन देने की तैयारी में है। बजट में यह भी ऐलान किया गया कि 5 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में बुनियादी ढांचे के विकास पर विशेष जोर दिया जाएगा, जिससे शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर को नई गति मिलेगी।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि यह कर्तव्य भवन में बना पहला बजट है। हमारा दूसरा कर्त्वय लोगों की आकांक्षा को पूरा करना है। तीसरा कर्तव्य सबका साथ सबका विकास करना है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद में बजट पेश कर रही हैं। उन्होंने कहा, घरेलू विनिर्माण क्षमता का निर्माण किया गया, ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत किया गया। सरकार ने लोकलुभावनवाद की बजाय आम लोगों को प्राथमिकता दी। सरकार ने बयानबाज़ी की जगह सुधारों को चुना। मोदी सरकार ने असमंजस छोड़कर निर्णायक कार्रवाई का रास्ता अपनाया। भारत की विकास यात्रा लगातार आर्थिक वृद्धि और नियंत्रित महंगाई से चिन्हित रही है। नीतिगत फैसलों से मजबूत मैक्रो-आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित हुई है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद में अपना 9वां केंद्रीय बजट पेश कर रही हैं, टैक्सपेयर्स, किसान, युवा और निवेशक को बजट से कई उम्मीदें हैं।
Union Budget 2026 पर उम्मीदों के बारे में कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था में स्ट्रक्चरल समस्याएं हैं जिन्हें एक दशक से ठीक नहीं किया गया है, प्राइवेट कैपिटल इन्वेस्टमेंट शुरू नहीं हुआ है... फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट कम हो गया है... मुझे उम्मीद है कि वित्त मंत्री भारतीय अर्थव्यवस्था में स्ट्रक्चरल असमानताओं को पहचानेंगे और उन्हें ठीक करने के लिए ईमानदार होंगे।"
बजट 2026 से पहले भारतीय शेयर बाजार लाल निशान पर खुला, वहीं चांदी 26 हजार से ज्यादा टूटी, वहीं सोना करीब 13500 तक टूटा
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लगातार नौवीं बार बजट पेश करेंगी। इसके साथ ही वो देश के संसदीय इतिहास में नया रिकॉर्ड बनाएंगी। वित्त मंत्री सीतारमण पूर्व पीएम मोरारजी देसाई के 10 बजट के रिकॉर्ड के बेहद करीब पहुंच जाएंगी। देसाई ने 1959-1964 के बीच 6 और 1967-1969 के बीच 4 बजट पेश किए थे। हालांकि, लगातार बजट पेश करने के मामले में सीतारमण सबसे आगे रहेंगी। उन्होंने पूर्व वित्त मंत्री चिदंबरम (9 बजट) और प्रणब मुखर्जी (8 बजट) को भी पीछे छोड़ दिया है। इन दोनों वित्त मंत्री ने अलग-अलग कार्यकालों में ये आंकड़े छुए थे।
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Published: 01 Feb 2026, 9:17 AM IST