
दिल्ली की सड़कों पर एक बार फिर जेएनयू छात्रों और पुलिस के बीच भारी बवाल देखने को मिला है। अपनी मांगों को लेकर 'लॉन्ग मार्च' निकाल रहे जेएनयू छात्र संघ के नेताओं और छात्रों पर पुलिस ने जमकर डंडा चलाया है, जिसमें कई छात्र घायल हो गए हैं। वहीं पुलिस ने कई छात्रों को हिरासत में ले लिया है और अज्ञात जगह ले गई है। छात्रों का आरोप है कि उनके शांतिपूर्ण मार्च पर पुलिस ने बर्बरता की है, जबकि पुलिस का कहना है कि बार-बार मना करने के बावजूद हंगामा किया जा रहा था।
जेएनयू में प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने पुलिस को अल्टीमेटम दिया है। छात्रों ने कहा है कि रात 9 बजे तक डिटेन किए गए छात्रों को रिलीज किया जाए वरना पुलिस स्टेशन का घेराव करेंगे। पुलिस ने छात्रों से की अपील की है आप सभी कॉलेज के अंदर जाएं। हालांकि, छात्र अभी भी यूनिवर्सिटी गेट पर ही धरना दे रहे हैं। जेएनयूएसयू के छात्रों को पुलिस द्वारा उठाए जाने के बाद jnusu_official ने अपने इंस्टाग्राम पर थाने की घेराव की अपील की। छात्र नेता ने वीडियो में अपील करते हुए कहा कि वसंत कुंज पुलिस स्टेशन के घेराव के लिए रात 9 बजे शामिल हों।
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यह मार्च विश्वविद्यालय की कुलपति शांतिश्री धुलिपुड़ी पंडित द्वारा एक पॉडकास्ट में यूजीसी नियमों के कार्यान्वयन पर की गई हालिया टिप्पणियों, जेएनयूएसयू पदाधिकारियों के निष्कासन और प्रस्तावित 'रोहित अधिनियम' को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शनों का हिस्सा था। जेएनयू छात्र संघ के नेतृत्व में अपनी मांगों को लेकर छात्र जैसे ही ‘लॉन्ग मार्च’ पर निकले तभी पुलिस से उनकी झड़प हो गई। दिल्ली पुलिस और छात्रों के बीच जमकर नोकझोंक और धक्का-मुक्की हुई। हालात इतने बिगड़ गए कि पुलिस ने जमकर बल प्रयोग किया और फिर जबरन छात्रों को डिटेन कर लिया। इस दौरान सड़क पर अंबेडकर-अंबेडकर के नारे गूंजते रहे।
प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर बर्बरता और ‘बदसलूकी’ का गंभीर आरोप लगाया है। प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि उनके खिलाफ अत्यधिक बल का प्रयोग किया गया, झड़प में कई छात्र घायल हो गए और उनमें से कुछ को पुलिस द्वारा "अपुष्ट स्थानों" पर ले जाया गया। कई छात्रों को चोटें आईं, लेकिन पुलिस ने घायलों को चिकित्सा सहायता देने से इनकार कर दिया। जेएनयूएसयू ने सभी छात्रों से आंदोलन तेज करने की अपील की है। इसने कहा कि आज रात से पूर्ण लॉकडाउन सुनिश्चित करें। शाम 9 बजे मुख्य द्वार पर पहुंचकर वसंत कुंज पुलिस स्टेशन की ओर मार्च करें।
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पुलिस ने दावा किया कि प्रदर्शनकारियों ने उन पर हमला किया। पुलिस ने कहा कि प्रदर्शनकारियों ने लाठियां और जूते फेंके और हमला किया, जिससे कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। पुलिस ने आरोप लगाया कि इस खींचतान के दौरान कुछ पुलिसकर्मियों को दांतों से "काटा" भी गया। पुलिस ने कहा कि छात्रों ने जेएनयू परिसर से शिक्षा मंत्रालय तक "लॉन्ग मार्च" का आह्वान किया था। पुलिस ने बताया कि जब प्रदर्शनकारियों ने परिसर से बाहर रैली निकालने की कोशिश की, तो कॉलेज गेट पर छात्रों की पुलिस से झड़प हो गई। जेएनयूएसयू अध्यक्ष अदिति मिश्रा, पूर्व अध्यक्ष नीतीश कुमार और कई अन्य को हिरासत में लिया गया।
पुलिस के अनुसार, जेएनयू प्रशासन ने प्रदर्शनकारी छात्रों को सूचित किया था कि परिसर के बाहर किसी भी विरोध प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई है और उन्हें अपना प्रदर्शन विश्वविद्यालय परिसर के भीतर ही सीमित रखने की सलाह दी गई थी। इसके बावजूद, लगभग 400-500 छात्र परिसर में एकत्र हुए और विरोध मार्च शुरू कर दिया। पुलिस ने बताया कि दोपहर करीब 3:20 बजे प्रदर्शनकारी मुख्य गेट से बाहर निकले और मंत्रालय की ओर बढ़ने का प्रयास किया।
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एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, "स्थिति बिगड़ने पर परिसर के बाहर लगाए गए बैरिकेड को क्षतिग्रस्त कर दिया गया। प्रदर्शनकारियों ने बैनर और लाठियां फेंकीं, जूते चलाए और हमला किया। हाथापाई के दौरान कुछ पुलिसकर्मियों को काटा गया, जिससे मौके पर तैनात कई अधिकारी घायल हो गए।" पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को जेएनयू परिसर के उत्तरी गेट पर रोका और धीरे-धीरे उन्हें वापस विश्वविद्यालय परिसर के अंदर धकेल दिया। अधिकारी ने बताया, "हमने कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया है। कुछ प्रदर्शनकारी पुलिस पर हाथापाई का आरोप लगा रहे हैं जो पूरी तरह निराधार है। वहां तैनात प्रत्येक अधिकारी कानून-व्यवस्था बनाए हुए था।"
वहीं, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (जेएनयूटीए) ने पुलिस द्वारा "बल के क्रूर प्रयोग" की निंदा की। संघ ने आरोप लगाया कि महिलाओं सहित कई छात्र घायल हुए हैं और हिरासत में लिए गए छात्रों की सुरक्षा पर चिंता व्यक्त करते हुए दावा किया कि कुछ को "अपुष्ट स्थानों" पर ले जाया गया है। जेएनयूटीए ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस की कार्रवाई का उद्देश्य छात्रों को मार्च करने के उनके लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग करने से रोकना था और हिरासत में लिए गए सभी छात्रों को तत्काल रिहा करने की मांग की।
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जेएनयू प्रोफेसर्स ने एडिशनल डीसीपी से मुलाकात की और बात की। प्रोफेसर्स ने पुलिस से ये मांग कि जो बच्चे डिटेन हैं उनको छोड़ दिया जाएय़। दिल्ली पुलिस ने जवाब दिया कि जिन बच्चों को डिटेन किया गया है, वे अपना आइडेंटिफिकेशन नहीं बता रहे हैं, इसीलिए अभी वो डिटेन हैं। हालांकि, प्रोफेसर्स इस मामले को खत्म करने का रिक्वेस्ट कर रहे हैं। कल कुछ छात्रों को मिनिस्ट्री भी ले जाने की बात की गई है। हालांकि, मिनिस्ट्री ले जाने की बात पर कुछ साफ नहीं सका है। फिलहाल जेएनयू गेट और वसंतकुज थाने पर गहमागहमी बनी हुई है।
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