हालात

कांग्रेस ने यूपीआई के मामले में सीतारमण की सफाई पर उठाया सवाल, संदिग्ध दावों पर आधारित बताया

रमेश ने कहा कि वित्त मंत्री का यह कहना भ्रामक है कि एमडीआर केवल व्यापारियों पर लागू होगा, उपभोक्ताओं पर नहीं। व्यापारी इस अतिरिक्त लागत का बोझ अंततः वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों के माध्यम से उपभोक्ताओं पर ही डालेंगे।

कांग्रेस ने यूपीआई के मामले में सीतारमण की सफाई पर उठाया सवाल, संदिग्ध दावों पर आधारित बताया
कांग्रेस ने यूपीआई के मामले में सीतारमण की सफाई पर उठाया सवाल, संदिग्ध दावों पर आधारित बताया फोटोः IANS

कांग्रेस ने शुक्रवार को यूपीआई पर 'मर्चेंट डिस्काउंट रेट' (एमडीआर) से जुड़े प्रावधानों को लेकर सरकार पर निशाना साधा और दावा किया कि इस मामले में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की सफाई पांच संदिग्ध दावों पर आधारित है। सीतारमण ने गुरुवार को कहा था कि डिजिटल लेनदेन पर लगने वाला एमडीआर ग्राहकों पर नहीं, बल्कि व्यापारियों पर लागू होता है।इसके साथ ही उन्होंने कहा था कि यह शुल्क बैंकों और वित्तीय-प्रौद्योगिकी कंपनियों को बुनियादी ढांचे और सुरक्षा में निवेश बढ़ाने में मदद करेगा।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स'’ पर एक पोस्ट में कहा कि वित्त मंत्री का यह कहना भ्रामक है कि एमडीआर केवल व्यापारियों पर लागू होगा, उपभोक्ताओं पर नहीं। उन्होंने दावा किया कि व्यापारी इस अतिरिक्त लागत का बोझ अंततः वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों के माध्यम से उपभोक्ताओं पर ठीक वैसे ही डालेंगे जैसे क्रेडिट और डेबिट कार्ड से भुगतान के मामले में होता है। उन्होंने कहा, ‘‘छोटे एवं मझोले कारोबारी, किराना दुकानदार और रेहड़ी-पटरी वाले भी 'मर्चेंट' की श्रेणी में आते हैं, जो यूपीआई को व्यापक रूप से अपनाए जाने की असली रीढ़ हैं।’’

कांग्रेस नेता ने सरकार के इस तर्क पर भी सवाल उठाया कि एमडीआर से बैंकों और फिनटेक कंपनियों को बुनियादी ढांचे, नवाचार और सुरक्षा में अधिक निवेश करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि यूपीआई एक सार्वजनिक डिजिटल अवसंरचना के रूप में विकसित किया गया था और इसकी सफलता में शून्य एमडीआर की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। रमेश के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के पास यूपीआई प्रणाली को बिना व्यापारियों या उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त शुल्क लगाए समर्थन देने की क्षमता है।

कांग्रेस महासचिव ने यह भी कहा कि सरकार का यह तर्क कि एमडीआर पर अंतिम फैसला संचालन समिति को करना है, पर्याप्त नहीं है। उन्होंने दावा किया कि संशोधन विधेयक के जरिये संबंधित कानून की धारा 10ए में शून्य एमडीआर की वैधानिक गारंटी समाप्त कर दी गई है और भविष्य में शुल्क लगाने का अधिकार सरकारी अधिसूचना पर छोड़ दिया गया है। उन्होंने कहा कि वैधानिक सुरक्षा के स्थान पर सरकारी आश्वासन पर्याप्त नहीं हो सकते।

रमेश ने दावा किया कि संशोधन का कदम ऐसे समय उठाया गया है जब अमेरिका की व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) की 2026 की रिपोर्ट में भारत के यूपीआई और ‘रुपे’ तथा ब्राजील के 'पिक्स' भुगतान तंत्र का उल्लेख किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि जहां ब्राजील ने अपने सार्वजनिक डिजिटल भुगतान ढांचे को मजबूत बनाए रखा है, वहीं केंद्र सरकार यूपीआई की वैधानिक सुरक्षा कमजोर कर रही है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि जब विदेशी नियंत्रण वाले मंच पहले से ही इस क्षेत्र में प्रमुख भूमिका में हैं, तो भारत को अपनी सार्वजनिक डिजिटल अवसंरचना को मजबूत करना चाहिए, न कि उसकी वैधानिक सुरक्षा कमजोर करनी चाहिए।

रमेश ने यह भी आरोप लगाया कि इस विषय पर संसद में चर्चा हो सकती थी, लेकिन संसद का कामकाज सरकार की जवाबदेही से बचने की वजह से बाधित रहा। उन्होंने दावा किया कि विपक्ष छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर केंद्रीय गृहमंत्री के बयान की मांग कर रहा है, लेकिन सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया। रमेश ने आरोप लगाया कि सरकार ने इसी स्थिति का लाभ उठाते हुए लोकसभा में संबंधित विधेयक पेश किए जाने के कुछ ही मिनटों के भीतर ध्वनिमत से पारित करा लिया।

प्रिय पाठकों हमारे टेलीग्राम (Telegram) चैनल @navjivanindia से जुड़िए और पल-पल की ताज़ा खबरें पाइए