
कोरोना लॉकडाउन के दौरान पुलिस ज्यादतियों की हद उत्तर प्रदेश में पार हो रही है। उत्तर प्रदेश में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या 100 के पार हो चुकी है, इसी बीच एक दलित युवक ने कथित तौर पर क्वेरंटाइन नियमों का उल्लंघन करने पर हुए पुलिस जुल्म से तंग आकर जान दे दी।
“दोस्तों, अगर किसी को मेरी बात पर यकीन न हो तो मेरी पैंट उतारकर देख लेना, वहां खून ही खून और पुलिस की बर्बरता के निशान नजर आएंगे, इस बेइज्जती के बाद मेरे पास जिंदा रहने का कारण नहीं बचा है और मैं अपनी जान दे रहा हूं....” यह शब्द उत्तर प्रदेश के लखीमपुर जिले के फरिया पिपरिया गांव के दलित युवक रोशन लाल के हैं, जो उसने जान देने से पहले अपने फोन में रिकॉर्ड किए थे। रोशन लाल अभी 29 मार्च को अपने गांव लौटा था। वह दिल्ली के नजदीक गुरुग्राम में दिहाड़ी मजदूर था। गांव लौटने के बाद स्थानीय प्रशासन ने उसे गांव के ही एक स्कूल में क्वेरंटाइन में रखा था।
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रोशन लाल अब इस दुनिया में नहीं रहा। उसने अपने फोन में रिकॉर्ड ऑडियों क्लिप को अपने परिवार और कुछ दोस्तों को व्हाट्सऐप पर भेजा। इस क्लिप में अपनी कहानी सुनाते हुए वह बेहद तकलीफ में सुनाई दे रहा है। वह चिल्ला रहा है और कमजोर आवाज में अपनी कहानी सुना रहा है।
वह कह रहा है कि, “मेरे हाथ तोड़ दिए गए हैं, अब मैं जिंदा रहकर क्या करूंगा।” वह आगे कहता है, “मैं आपको बताना चाहता हूं कि यह सब गलत है। मेरी रिपोर्ट निगेटिव आई है और मेरे पास इसका रिजल्ट भी है। लेकिन मैं अब अपनी जान खत्म करना चाहता हूं। मैं चाहता हूं कि अनूप कुमार सिंह के खिलाफ कार्रवाई हो। अनूप कुमार ने मेरे साथ बहुत नाइंसाफी की है। मैं बहुत मजबूर हूं...”
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रोशन लाल के परिवार का दावा है कि उसने मरने से पहले तीन ऑडियो क्लिप भेजी हैं। एक और ऑडियो क्लिप में वह कहता सुना जा रहा है, “इस सबके बावजूद कोई मेरी मदद के लिए नहीं आया, इसीलिए मैं यह कदम उठा रहा हूं...।” अपनी आखिरी इच्छा के तौर पर उसने कहा है कि, “पीएनबी खाते में मेरे 80,000 रुपए हैं, वह मेरी मां को दे दिए जाएं। इलाहाबाद बैंक में भी मेरे 20,000 रुपए हैं, उसे भी मेरी मां के दो दिया जाए।”
उसने गुरुग्राम के उस ठेकेदार का नाम भी लिया है जिसके पास वह काम करता था। उसने कहा है कि ठेकेदार पर उसके 25,000 रुपए बकाया हैं, वह भी मेरी मां को दे दिए जाएं। वह कहता है, “अनूप कुमार सिंह ने मुझे बेरहमी से पीटा, मेरी पीठ पर हर जगह आपको खून जमा हुआ दिखेगा। इसी वजह से अब मैं खुदकुशी कर रहा हूं...।”
एक और ऑडियो क्लिप में रोशन लाल अपना परिचय देता है। इसमे वह कहता है, “हेलो, नमस्कार, मेरा नाम रोशन लाल है। मैं बहुत दुखी हूं। मेरा कसूर सिर्फ इतना है कि मैं मैं स्कूल से बाहर आ गया था आटा लाने के लिए क्योंकि मेरे घर में खाने को कुछ नहीं था। एक पुलिस वाला अनूप सिंह है उसने मुझे इतनी बेरहमी से मारा कि मेरे दाएं हाथ ने काम करना बंद कर दिया। शायद वह टूट गया है। मैं कितना मजबूर हूं मैं बता नहीं सकता।”
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रोशन लाल के परिवार ने पुलिस कांस्टेबिल अनूप कुमार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने रिपोर्ट नहीं दर्ज की। रोशन लाल के परिवार ने अनूप कुमार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
गौरतलब है कि कोरोना लॉकडाउन के बाद फैली दहशत और दिक्कतों के चलते आत्महत्या का यह चौथा मामला सामने आया है। इससे पहले कानपुर के एक युवक ने मंगलवार को फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी, उसे डर था कि वह कोरोना वायरस से संक्रमित है। दो अन्य मामलों में हापुड़ और बरेली के एक-एक युवक ने इसी वायरस के खौफ से आत्महत्या कर ली।
इस मामले पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय सिंह लल्लू ने फोन पर कहा कि इस घटना से उत्तर प्रदेश पुलिस का असली और क्रूर चेहरा सामने आ गया है। उन्होंने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। नवजीवन से बातचीत में उन्होंने कहा कि, “यूपी में कानून और संविधान का नहीं बल्कि डंडे का राज चल रहा है। कोरोना पर नियंत्रण के नाम पर पुलिस गरीबों पर, मजदूरों पर डंडा बरसा रही है। जिन पुलिस वालों ने इस बर्बर कृत्य को अंजाम दिया है उनके खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए।“
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