
लखनऊ में गोमती रिवर फ्रंट में कथित घोटाले को लेकर ने प्रवर्तन निदेशालय आज ताबड़तोड़ कई राज्यों में छापेमारी की है। 1500 करोड़ रुपये के गोमती रिवरफ्रंट विकास परियोजना के संबंध में ईडी ने दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में करीब 10 जगहों पर छापे मारे। इसमें सिंचाई विभाग के पूर्व अधिकारियों के 8 ठिकानों पर छापा पड़ा है। ईडी के अधिकारी ने कहा, “सुबह से हमारी टीमें गोमती रिवरफ्रंट परियोजना मामले में धनशोधन ( अवैध चल-अचल संपत्ति अर्जित) के आरोपों की जांच के तहत छापे मार रही हैं।”
खबरों के मुताबिक, लखनऊ में ईडी की टीमों ने गोमती नगर के विशाल खण्ड और राजाजीपुरम इलाके में छापेमारी शुरू की है। इस दौरान इंजीनियरों और ठेकेदारों के घर को खंगाला जा रहा है। दूसरी ओर राजस्थान के भिवाड़ी में ईडी की छापेमारी जारी है। यही नहीं हरियाणा के गुरुग्राम, नोएडा के सेक्टर-62 स्थित आईथम टॉवर में छापेमारी की सूचना है। जांच एजेंसी पता लगानी चाहती है कि क्या आरोपियों ने इस विकास परियोजना के सौंदर्यीकरण के लिए दी गई राशि का धनशोधन किया या फिर इससे अवैध संपत्ति बनाई।
सीबीआई ने इस संबंध में दिसंबर 2017 में एफआईआर दर्ज की थी, जिस पर संज्ञान लेते हुए ईडी ने 30 मार्च 2018 को धनशोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत मामला दर्ज किया था। सीबीआई ने तत्कालीन मुख्य अभियंताओं गुलेश चंद्रा, एस एन शर्मा, काजिम अली, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता मंगल यादव, अखिल रमन, कमलेश्वर सिंह, रूप सिंह यादव और अधिशासी अभियंता सुरेन्द्र यादव के खिलाफ एक प्राथमिकी दर्ज की थी। गुलेश चंद्रा, मंगल यादव, अखिल रमन और रूप सिंह यादव सेवानिवृत्त हो गये हैं।
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बता दें कि बता दें कि गोमती रिवरफ्रंट पूर्व सीएम अखिलेश यादव का ड्रीम प्रोजेक्ट था। यूपी में योगी सरकार के आने के बाद राज्य के सिंचाई विभाग द्वारा गोमती रिवर चैनलाइजेशन प्रोजेक्ट और गोमती रिवर फ्रंट विकास परियोजना को लागू करने में ‘आपराधिक इरादे’ से की गई अनियमितताओं की जांच के आदेश दिये थे। और इस मामले की सीबीआई से जांच कराने की गुजारिश की थी।
(आईएएनएस के इनपुट के साथ)
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