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चुनाव आयोग की जल्दबाजी लोकतंत्र के लिए खतरा, SIR पर विपक्ष की चेतावनी को किया नजरअंदाज: प्रमोद तिवारी

प्रमोद तिवारी ने कहा कि बीजेपी के इशारे पर निर्वाचन आयोग ने जल्दबाजी में इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया, जिसका नतीजा यह हुआ कि अब उसे अपने ही शेड्यूल को कई चरणों में बढ़ाना पड़ रहा है। उन्होंने इसे अहंकार बताते हुए लोकतंत्र के लिए खतरा करार दिया।

चुनाव आयोग की जल्दबाजी लोकतंत्र के लिए खतरा, SIR पर विपक्ष की चेतावनी को किया नजरअंदाज: प्रमोद तिवारी
चुनाव आयोग की जल्दबाजी लोकतंत्र के लिए खतरा, SIR पर विपक्ष की चेतावनी को किया नजरअंदाज: प्रमोद तिवारी फोटोः सोशल मीडिया

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी ने निर्वाचन आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि आयोग एक के बाद एक गलतियां कर रहा है और एसआईआर प्रक्रिया को लेकर विपक्ष की जायज चेतावनियों की अनदेखी की गई। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने शुरू से ही स्पष्ट किया था कि इतने कम समय में एसआईआर की प्रक्रिया पूरी कराना व्यावहारिक नहीं है और इसके लिए कम से कम चार से पांच वर्ष का समय दिया जाना चाहिए।

प्रमोद तिवारी ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के इशारे पर निर्वाचन आयोग ने जल्दबाजी में इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया, जिसका नतीजा यह हुआ कि अब उसे अपने ही शेड्यूल को कई चरणों में बढ़ाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा, “काश निर्वाचन आयोग ने अहंकार छोड़कर विपक्ष की बात और जमीनी सच्चाई पर ध्यान दिया होता, तो बार-बार जल्दबाजी में फैसले बदलने की नौबत नहीं आती।”

प्रमोद तिवारी ने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया को जल्दबाजी में पूरा करने की जिद के कारण अकेले उत्तर प्रदेश में ही लगभग 2 करोड़ 90 लाख, यानी करीब तीन करोड़ से अधिक चिन्हित मतदाताओं की संख्या कम आई है। उन्होंने इसे बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि यह संख्या दुनिया के कई देशों की कुल आबादी के बराबर है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब एक ही राज्य में इतने बड़े पैमाने पर मतदाता प्रभावित हो रहे हैं, तो देशव्यापी स्तर पर इसके परिणाम कितने भयावह हो सकते हैं।

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि जब सरकार को अपनी गलती का अहसास हुआ, तो पोलिंग बूथों और पोलिंग स्टेशनों पर प्रिंटेड फॉर्म के जरिए मतदाताओं के नाम काटने की कोशिशें की गईं। उन्होंने कहा कि इनमें बड़ी संख्या में अल्पसंख्यक समुदाय, अनुसूचित जाति, पिछड़े वर्ग, प्रवासी मजदूर और दिहाड़ी मजदूरी करने वाले गरीब शामिल थे, जो वर्ष में एक-दो बार ही अपने गांव-घर लौट पाते हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि जागरूक जनता और कुछ ईमानदार अधिकारियों की वजह से इन मंसूबों पर पानी फिर गया।

प्रमोद तिवारी ने उन सभी राज्यों के नागरिकों से, जहां एसआईआर की प्रक्रिया चल रही है, लोकतंत्र की रक्षा के लिए आगे आने की अपील की। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में अपना नाम सुरक्षित रखना लोकतंत्र के सबसे बड़े अधिकारों में से एक है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते नाम दर्ज नहीं कराए गए, तो भविष्य में मुफ्त राशन, चिकित्सा और शिक्षा जैसे अधिकारों से भी वंचित होना पड़ सकता है। उन्होंने इसे “लोकतंत्र का अमृत रूपी आशीर्वाद” बताते हुए सभी से अपने अधिकारों की रक्षा करने का आह्वान किया।

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