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राजनीति में दिल तोड़े भी जाते हैं, दुखाए भी जाते हैंः वसुंधरा राजे

वसुंधरा राजे ने कहा कि जैन धर्म अहिंसा पर आधारित है। लेकिन हथियार से हिंसा या किसी को मारना-पीटना ही हिंसा नहीं है। किसी का दिल दुखाना और किसी का दिल तोड़ना भी हिंसा है। राजनीति में अक्सर ऐसा होता है। राजनीति में दिल तोड़े भी जाते है और दुखाए भी जाते हैं।

राजनीति में दिल तोड़े भी जाते हैं, दुखाए भी जाते हैंः वसुंधरा राजे
राजनीति में दिल तोड़े भी जाते हैं, दुखाए भी जाते हैंः वसुंधरा राजे फोटोः सोशल मीडिया

राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता वसुंधरा राजे ने एक बार फिर इशारों-इशारों में बीजेपी पर निशाना साधा है। सोमवार को छोटी खाटू में जैन धर्म के एक कार्यक्र में उन्होंने कहा कि राजनीति में दिल तोड़े भी जाते हैं और दुखाए भी जाते हैं। राजे ने आचार्य महाश्रमण मर्यादा महोत्सव कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जैन धर्म में अहिंसा के नियम का जिक्र करते हुए यह बात कही।

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वसुंधरा राजे ने कहा, “जैन धर्म अहिंसा पर आधारित है। किसी भी जीव, किसी भी प्राणी के जीवन को नुकसान पहुंचाना हिंसा मानी गई है। लेकिन हथियार से हिंसा करना या किसी को मारना-पीटना ही हिंसा नहीं है। किसी का दिल दुखाना और किसी का दिल तोड़ना भी हिंसा है। राजनीति में अक्सर ऐसा होता है।” राजे ने कहा, “राजनीति में दिल तोड़े भी जाते है और दिल दुखाए भी जाते हैं।”

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उन्होंने कहा कि माता विजया राजे सिंधिया ने सिखाया है कि जीवन में किसी का मन आहत न करें और उन्हीं के रास्ते पर चल रही हैं। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी के साथ अन्याय करना और किसी का हक छीनना भी अधर्म है। उन्होंने कहा, “भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों के पास समय का अभाव है। यदि लोग समय निकाल कर भगवान का स्मरण कर लें तो जीवन में कठिनाइयां आएंगी ही नहीं।” इस अवसर आचार्य महाश्रमण ने कहा कि नैतिकता,सद्भावना और नशा मुक्ति व्यक्ति के जीवन में होना चाहिए।

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वसुंधरा राजे सिंधिया के इस बयान को बीजेपी में उन्हें नजरअंदाज किए जाने पर टिप्पणी के तौर पर देखा जा रहा है। दरअसल राज्य की दो बार मुख्यमंत्री रहीं वसुंधरा राजे सिंधिया पिछले लंबे समय से बीजेपी में हाशिये पर हैं। राज्य की सरकार में कोई भूमिका नहीं देने और पार्टी में भी उन्हें अलग-थलग किए जाने पर वह लगातार इशारों-इशारों में पार्टी पर निशाना साधती आ रही हैं। वसुंधरा राजे खुद को राज्य में और पार्टी में प्रासंगिक बनाए रखने के लिए लगातार कोई न कोई कार्यक्रम आयोजित कर रही हैं और बयान भी देती आ रही हैं। ताजा बयान को भी इसी संदर्भ में देखा जा रहा है।

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