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हिंदू संगठन के कार्यक्रम में IPS अधिकारी का भाषण राजनीतिक तटस्थता और सेवा नियमों के पालन पर गंभीर सवाल: कांग्रेस

एक अन्य पोस्ट में कांग्रेस ने कहा कि पुलिस का दायित्व कानून-व्यवस्था बनाए रखना है, न कि उन संगठनों का महिमामंडन करना जिन पर समाज में विभाजन को बढ़ावा देने के आरोप लगते रहे हैं।

हिंदू संगठन के कार्यक्रम में IPS अधिकारी का भाषण राजनीतिक तटस्थता और सेवा नियमों के पालन पर गंभीर सवाल: कांग्रेस
हिंदू संगठन के कार्यक्रम में IPS अधिकारी का भाषण राजनीतिक तटस्थता और सेवा नियमों के पालन पर गंभीर सवाल: कांग्रेस फोटोः सोशल मीडिया

महाराष्ट्र कांग्रेस ने आईपीएस अधिकारी विश्वास नांगरे पाटिल द्वारा सकल हिंदू समाज नामक संगठन के एक कार्यक्रम में दिए गए भाषण पर आपत्ति जताते हुए इसकी जांच की मांग की है।

कांग्रेस का कहना है कि भाषण में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की कथित प्रशंसा किए जाने से अधिकारी की राजनीतिक तटस्थता और सेवा नियमों के पालन पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

सकल हिंदू समाज द्वारा आयोजित हिंदू सम्मेलन में पाटिल के भाषण का एक बिना तारीख वाला वीडियो बृहस्पतिवार को सोशल मीडिया पर वायरल हुआ।

पाटिल को इसी सप्ताह नागपुर का पुलिस आयुक्त नियुक्त किया गया है।

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कांग्रेस ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से पूछा कि क्या इस कार्यक्रम में शामिल होने से पहले अधिकारी ने सरकार से आवश्यक पूर्व अनुमति ली थी।

पार्टी ने अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियमों का हवाला देते हुए कहा कि भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के किसी भी अधिकारी को इस प्रकार के कार्यक्रम में भाग लेने से पहले सरकार की पूर्व स्वीकृति लेना अनिवार्य होता है।

कांग्रेस ने सवाल किया कि क्या नांगरे पाटिल ने ऐसी अनुमति प्राप्त की थी और यदि नहीं, तो क्या राज्य सरकार उनके खिलाफ सेवा नियमों के तहत कार्रवाई करेगी?

पार्टी ने यह भी कहा कि अपने भाषण में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस), हिंदुत्व और आरएसएस के संस्थापक के बी हेडगेवार की प्रशंसा कर नांगरे पाटिल ने उन प्रावधानों के पालन पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है, जिनके तहत अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों का राजनीतिक रूप से तटस्थ रहना और अपने पद की गरिमा के अनुरूप आचरण करना अपेक्षित है।

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कांग्रेस ने आचरण नियमों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनमें अधिकारियों को राजनीति से जुड़े संगठनों के साथ किसी भी प्रकार का संबंध रखने से रोका गया है। पार्टी ने सवाल उठाया कि क्या किसी विशेष वैचारिक संगठन के मंच से उसका गुणगान करना उसी श्रेणी में नहीं आता?

कांग्रेस ने कहा कि यह मामला केवल एक अधिकारी तक सीमित नहीं है, बल्कि सिविल सेवाओं की विश्वसनीयता, राजनीतिक तटस्थता के संवैधानिक सिद्धांत और पुलिस प्रशासन में जनता के विश्वास से जुड़ा हुआ है।

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एक अन्य पोस्ट में कांग्रेस ने कहा कि पुलिस का दायित्व कानून-व्यवस्था बनाए रखना है, न कि उन संगठनों का महिमामंडन करना जिन पर समाज में विभाजन को बढ़ावा देने के आरोप लगते रहे हैं।

पार्टी ने तंज कसते हुए कहा कि नांगरे पाटिल का तबादला अब नागपुर कर दिया गया है, जिससे उन्हें ‘‘जिन्हें वह खुश करने की कोशिश कर रहे हैं, उनकी सीधे सेवा करने का अवसर मिल गया है।’’ यह टिप्पणी स्पष्ट रूप से नागपुर स्थित आरएसएस मुख्यालय को लेकर की गई मानी जा रही है।

पीटीआई के इनपुट के साथ

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