
ईरान ने बुधवार को संकेत दिया कि ईरान पर बमबारी जारी रखते हुए अमेरिका शांति की बात नहीं कर सकता। ईरान की यह प्रतिक्रिया ट्रंप के उस दावे के बाद सामने आई जिसमें ट्रंप ने कहा था कि ईरान में 'सही लोगों' के साथ '15-सूत्रीय' शांति फ़ॉर्मूले पर बातचीत चल रही है। इसके जवाब में ईरान के एक सैन्य प्रवक्ता ने अमेरिकी राष्ट्रपति का मज़ाक उड़ाते हुए एक रिकॉर्डेड संदेश में कहा कि हो सकता है कि ट्रंप खुद से ही बातचीत कर रहे हों।
ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका के साथ किसी भी तरह की बातचीत से इनकार किया है और ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर ग़ालिबफ़ ने इन रिपोर्टों को "फेक न्यूज" बताते हुए कहा कि इसका मकसद "वित्तीय और तेल बाज़ारों में हेर-फेर करना है।"
गालिबफ ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि, “हम इस क्षेत्र में अमेरिका की सभी गतिविधियों पर, खासकर सैनिकों की तैनाती पर, बारीकी से नज़र रख रहे हैं। जनरलों ने जो हालात बिगाड़े हैं, उसे सैनिक ठीक नहीं कर सकते; बल्कि इसके बजाय, वे नेतन्याहू के भ्रम का शिकार बन जाएँगे। हमारी ज़मीन की रक्षा करने के हमारे संकल्प की परीक्षा न लें।”
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ग़ालिबफ़ ने इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति का मज़ाक उड़ाते हुए कहा था, “उन्होंने दावा किया है कि पिछले दो हफ़्तों में उन्होंने हमें नौ बार ‘हराया’ है। कितना हास्यास्पद है!” एक और पोस्ट में उन्होंने स्पष्ट किया था, “अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं हुई है, और वित्तीय तथा तेल बाज़ारों में हेरफेर करने और उस दलदल से निकलने के लिए फ़र्ज़ी ख़बरों का इस्तेमाल किया जा रहा है जिसमें अमेरिका और इज़रायल फँसे हुए हैं।”
बुधवार को अल जज़ीरा ने ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई के हवाले से कहा कि, “तथ्यों को देखिए। ईरान पर अमेरिका और इज़राइल लगातार बमबारी और मिसाइल हमले कर रहे हैं। इसलिए, कूटनीति और मध्यस्थता का उनका दावा विश्वसनीय नहीं है। क्योंकि उन्होंने ही इस युद्ध की शुरुआत की है और वे ईरान पर हमले जारी रखे हुए हैं। तो क्या कोई भी यह मान सकता है कि मध्यस्थता का उनका दावा विश्वसनीय है?”
इंडिया टुडे टीवी चैनल को दिए एक इंटरव्यू में बगाई ने कहा, “मैं समझता हूं कि हमारे क्षेत्र में जो कुछ हो रहा है, उससे दुनिया की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है, लेकिन इसमें हमारी कोई गलती नहीं है। आप तेल की कीमतों और किराने के सामान की कीमतों को लेकर चिंतित हैं, लेकिन हम अपने नागरिकों की जान को लेकर चिंतित हैं।”
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इस बीच ईरानी रेड क्रिसेंट सोसाइटी ने दावा किया है कि अमेरिकी और इज़राइली सेनाओं द्वारा ईरान पर किए गए हमलों में 82,000 से ज़्यादा आम लोगों की इमारतें क्षतिग्रस्त या नष्ट हो गई हैं। क्षतिग्रस्त इमारतों में 62,000 घर, 281 मेडिकल सेंटर, अस्पताल और दवाखाने शामिल हैं। इसके अलावा, 498 स्कूल, 17 बचाव केंद्र और 12 बचाव वाहन भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। कहा जा रहा है कि अमेरिका और इज़राइल ने 28 फरवरी 2026 को हमला शुरू करने के बाद से ईरान में ठिकानों पर बमबारी करने के लिए 15 हज़ार उड़ानें भरी हैं। स्वतंत्र रिपोर्टों ने इस बात की पुष्टि की है कि जिन ठिकानों पर बमबारी की गई है, उनमें बिजली संयंत्र, पानी को मीठा बनाने वाले संयंत्र और यहाँ तक कि कूड़ा उठाने वाले वाहन भी शामिल हैं।
बुधवार को कई सूत्रों ने इस बात की पुष्टि की कि ईरान को अमेरिकी राष्ट्रपति पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं है, और पिछले नौ महीनों में अमेरिका द्वारा दो बार धोखा दिए जाने के बाद से उसने अमेरिका के साथ बातचीत करने से लगातार इनकार किया है। सूत्रों का दावा है कि ईरानी सेना का आकलन यह है कि राष्ट्रपति ट्रंप के बातचीत जारी होने के दावे, असल में बाज़ार को शांत करने, ईरान को दी गई 48 घंटे की पिछली समय-सीमा से पीछे हटने के मामले से दुनिया का ध्यान भटकाने, और इस मिली मोहलत का इस्तेमाल करके पूरे क्षेत्र के देशों में अपनी सेनाओं को फिर से तैनात करने तथा हवाई सुरक्षा व्यवस्था मज़बूत करने के लिए किए जा रहे हैं।
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उधर ईरान ने दूसरे देशों को बता दिया है कि उसे अमेरिकी सैनिकों की हलचल पर शक है और उसे पूरा यकीन है कि ईरान पर ज़मीनी हमले की तैयारियां चल रही हैं। ईरानी सूत्रों के मुताबिक, शुक्रवार तक का समय अमेरिका द्वारा ईरान के वरिष्ठ अधिकारियों के ठिकानों और उनकी गतिविधियों के बारे में खुफिया जानकारी जुटाने में इस्तेमाल किया जाएगा, ताकि उनकी हत्या की जा सके। आखिर में, ईरान को पूरा यकीन है कि अमेरिकी राष्ट्रपति शांति के लिए उनके प्रस्तावों को ठुकराने का आरोप ईरान पर लगाएंगे और 27 मार्च 2026 को ट्रंप द्वारा बातचीत के लिए दी गई पाँच दिन की समय सीमा खत्म होने के बाद, देश पर और भी ज़्यादा ज़ोरदार हमले शुरू कर देंगे। यह समय सीमा ठीक उसी समय खत्म होगी जब अमेरिकी पूंजी बाज़ार सप्ताहांत के लिए बंद होगा।
ईरानी नौसेना की ओर से यह औपचारिक दावा किए जाने की खबरों के बीच कि उसने फ़ारस की खाड़ी पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया है, ईरान के 'खातम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर' (यह वह कमान है जो ईरान की नियमित सेना और विशिष्ट 'रिवोल्यूशनरी गार्ड' दोनों की संयुक्त रूप से देखरेख करती है) के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल इब्राहिम ज़ुल्फ़िकारी ने सरकारी टेलीविज़न पर एक रिकॉर्डेड बयान प्रसारित किया।
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इस बयान में उन्होंने कहा कि इस संबंध में किसी भी तरह की कोई बातचीत नहीं हुई है। ज़ुल्फ़िकारी ने तंज कसते हुए कहा, "क्या अब आपके आंतरिक संघर्षों का स्तर इतना गिर गया है कि आप खुद से ही बातचीत करने लगे हैं?"
जुल्फिकारी ने कहा कि, "जिस रणनीतिक शक्ति की आप बात किया करते थे, वह अब एक रणनीतिक विफलता में बदल गई है।" उन्होंने कहा, "जो खुद को वैश्विक महाशक्ति होने का दावा करता है, अगर वह ऐसा कर पाता, तो अब तक इस मुश्किल से बाहर निकल चुका होता। अपनी हार को समझौते का नाम मत दो। तुम्हारे खोखले वादों का दौर अब खत्म हो चुका है।"
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