
पश्चिम बंगाल की नवगठित विधानसभा का बजट सत्र 8 जून से शुरु होने वाला है, इस बीच संकेत मिल रहे हैं कि निवर्तमान सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस में टूट होने वाली है। यह खबरे सार्वजनिक होने के बाद कि पार्टी द्वारा बुलाई गई बैठक में तृणमूल के 80 में से 20 विधायक गायब रहे, पार्टी ने अपने दो विधायकों, ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को पार्टी से निकाल दिया। इन दोनों ही विधायकों के बारे में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया था कि इन विधायकों ने विधानसभा स्पीकर से शिकायत की है कि अभिषेक बनर्जी द्वारा हस्ताक्षरित स्पीकर को भेजे पत्र में उनके हस्ताक्षर फर्जी थे।
स्पीकर को लिखे पत्र में ज़ाहिर तौर पर, विधानसभा में पार्टी के वरिष्ठ नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय के लिए 'विपक्ष के नेता' का पद दिए जाने का अनुरोध किया गया था। एक जानकारी के अनुसार, विधानसभा अधिकारियों के पास जमा किए गए दस्तावेज़ों पर मौजूद हस्ताक्षरों और नए चुने गए विधायकों के शपथ ग्रहण के दौरान दर्ज किए गए हस्ताक्षरों के बीच कुछ विसंगतियां मिलीं। इसके बाद विधानसभा सचिवालय ने एक शिकायत दर्ज कराई, जिस पर सीआईडी जांच शुरू की गई है।
Published: undefined
ऋतब्रत बनर्जी और संदीपान साहा ने दावा किया है कि पार्टी की पिछली बैठक के दौरान लिए गए हस्ताक्षरों का इस्तेमाल बाद में जमा किए गए दस्तावेज़ों में किया गया, जिसे उन्होंने अनैतिक और अनुचित माना। इसके बाद, दोनों विधायकों ने अपनी शिकायतें लेकर विधानसभा अध्यक्ष से संपर्क किया। यह स्पष्ट नहीं है कि दोनों विधायकों के हस्ताक्षरों की जालसाज़ी करना क्यों ज़रूरी था, या उनमें से कितने हस्ताक्षर असली थे। हालांकि, जब मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक रूप से तृणमूल कांग्रेस के इन दोनों विधायकों के नाम की 'व्हिसल ब्लोअर' के तौर पर पुष्टि कर दी, तो तृणमूल कांग्रेस के पास डैमेज कंट्रोल के लिए उन्हें पार्टी से निकालने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचा था।
पूर्व सांसद ऋतब्रत बनर्जी, जिन्हें पहले सीपीएम ने पार्टी-विरोधी गतिविधियों के कारण निकाल दिया था, उन्होंने दावा किया कि बीजेपी के सूत्रों ने उन्हें पार्टी तोड़ने और खुद विपक्ष का नेता बनने के लिए उकसाया था। कहा जा रहा है कि 'बागी' नेताओं ने शहर के एक होटल में बैठत की और दावा किया कि उन्हें 30 से 50 विधायकों का समर्थन हासिल है। वे इतने विधायक जुटाने की कोशिश कर रहे हैं ताकि वे खुद को 'असली तृणमूल' बता सकें और स्पीकर से विपक्ष के नेता का पद हासिल कर सकें।
Published: undefined
बंगाल की राजनीति के जानकारों ने तुरंत यह राय ज़ाहिर की है कि बीजेपी ममता बनर्जी को कमज़ोर करना चाहती है और उन्हें तथा उनके वफ़ादारों को कई मामलों में फंसाना चाहती है। लेकिन उनका मानना है कि पार्टी यह नहीं चाहती कि पूर्व मुख्यमंत्री विपक्ष की जगह को पूरी तरह से छोड़ दें। उनका तर्क है कि अगर तृणमूल पूरी तरह से खत्म हो जाती है, तो उस खाली जगह को लेफ्ट फ्रंट और कांग्रेस भर सकते हैं। विपक्ष की इस जगह में तृणमूल के दो गुटों को शामिल करना बीजेपीं के लिए फ़ायदेमंद होगा, क्योंकि इससे विपक्ष में ही दो फाड़ हो जाएगा।
एक फेसबुक लाइव में बोलते हुए, तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी ने उन अवसरवादियों की आलोचना की, जो पार्टी के सत्ता में रहने के दौरान मिलने वाले फ़ायदों का मज़ा लेने के बाद अब पार्टी छोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि तृणमूल नेताओं की नहीं, बल्कि कार्यकर्ताओं की पार्टी है। ममता ने चेतावनी दी कि, "हो सकता है कि नेता डर जाएं, लेकिन पार्टी कार्यकर्ता नहीं डरते। वे विधायक और सांसद इसलिए बने, क्योंकि पार्टी ने उन्हें टिकट दिया था। जैसे ही पार्टी को कोई झटका लगता है, कुछ लोग दूसरी जगहों पर अपना इंतज़ाम करना शुरू कर देते हैं। अगर किसी को लगता है कि वे तृणमूल कांग्रेस को अस्थिर कर सकते हैं, तो वे ग़लतफ़हमी में हैं।"
Published: undefined
ममता बनर्जी ने आगे कहा कि, "कुछ लोगों को धमकाया जा रहा है, तो कुछ को प्रलोभन दिया जा रहा है। लेकिन तृणमूल कांग्रेस को इतनी आसानी से तोड़ा नहीं जा सकता। हमारी असली ताकत हमारे कार्यकर्ताओं और समर्थकों में है।
ऋतब्रत बनर्जी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, "ऐसे लोगों को टिकट देना एक गलती थी। हमने उन पर भरोसा किया, उन्हें मौके दिए और ज़िम्मेदारियां सौंपी। आज वे उस भरोसे का बदला धोखे से चुका रहे हैं।" उनके वफ़ादार कुणाल घोष ने इन दोनों को "गद्दार" बताया, जिन्होंने पार्टी के चुनाव चिह्न पर चुने जाने के एक महीने से भी कम समय में अपनी ही पार्टी पर हमला करना शुरू कर दिया। घोष ने तीखे शब्दों में कहा, "अगर उन्हें इतनी ही दिक्कत थी, तो उन्होंने तृणमूल के टिकट पर चुनाव क्यों लड़ा? पार्टी के अंदरूनी मुद्दों पर पार्टी के भीतर ही चर्चा होनी चाहिए, न कि उन्हें पार्टी के खिलाफ हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया जाना चाहिए।"
ममता बनर्जी के वफ़ादार लोगों का कहना है कि ऋतब्रत बनर्जी की एक तस्वीर सामने आई थी, जिसमें वे नई दिल्ली के 'बंगा भवन' में शुभेंदु अधिकारी के साथ बातचीत करते नज़र आ रहे थे। यह तस्वीर उस समय की है, जब अधिकारी शपथ ग्रहण से पहले नई दिल्ली में लोगों का आभार व्यक्त करने के लिए आए थे। इन लोगों का आरोप है कि बनर्जी ने बीजेपी में शामिल होने की संभावना पर विचार किया था, लेकिन उन्हें तृणमूल के विधायक दल में ही बने रहने और अपने लिए 'नेता प्रतिपक्ष' का पद हासिल करने की कोशिश करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
Published: undefined
तृणमूल कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों ने विपक्ष के नेता के चुनाव को लेकर मतभेदों की बात स्वीकार की है। जहां विधायकों का एक तबका कथित तौर पर इस भूमिका के लिए कुणाल घोष के पक्ष में था—उनकी आक्रामक शैली और विधानसभा के भीतर बीजेपी का मुकाबला करने की क्षमता के कारण—वहीं दूसरों का मानना था कि तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के साथ उनकी कथित नज़दीकी कुछ विधायकों के बीच असहजता पैदा कर सकती है।
पार्टी नेतृत्व ने शोभनदेव चट्टोपाध्याय को नेता विपक्ष के लिए चुना है, जो एक अनुभवी राजनेता हैं और सभी गुटों में उनका सम्मान किया जाता है। एक वरिष्ठ विधायक ने कहा, "शोभनदेव-दा पर कोई विवाद का दाग नहीं है और वह ऐसे व्यक्ति हैं जो सभी से बात कर सकते हैं। उनके पास विधायक दल को एकजुट रखने का अनुभव और कद दोनों हैं।" अन्य लोग उनकी उम्र और स्वास्थ्य को लेकर चिंताओं को स्वीकार करते हैं। पार्टी के एक सूत्र ने कहा, "कोई भी उनकी ईमानदारी या राजनीतिक अनुभव पर सवाल नहीं उठाता। एकमात्र चिंता यह है कि क्या उनकी शारीरिक स्थिति उन्हें विपक्ष के नेता की भूमिका की सभी मांगों को संभालने की अनुमति देगी।"
इस बीच, सीआईडी की जांच का दायरा बढ़ गया है और इस सिलसिले में तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को समन भेजा गया है। अभिषेक ने बीमारी का हवाला देते हुए तय तारीख पर पेशी नहीं दी और कथित तौर पर उन्होंने इसके लिए और समय मांगा है।
Published: undefined
Google न्यूज़, व्हाट्सएप, नवजीवन फेसबुक पेज और नवजीवन ट्विटर हैंडल पर जुड़ें
प्रिय पाठकों हमारे टेलीग्राम (Telegram) चैनल से जुड़िए और पल-पल की ताज़ा खबरें पाइए, यहां क्लिक करें @navjivanindia
Published: undefined